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SIP और सेविंग के बाद भी नहीं बढ़ रही दौलत? कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 7 गलतियां

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Source :- LIVE HINDUSTAN

आज के समय में पैसे बचाना और नियमित रूप से निवेश करना अच्छी फाइनेंशियल आदत मानी जाती है। लेकिन, सिर्फ हर महीने कुछ रकम सेव कर लेना या SIP चलाना ही पर्याप्त नहीं है। कई बार व्यक्ति पूरी ईमानदारी से बचत और निवेश करता रहता है, फिर भी कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां करता है, जो लंबे समय में उसकी आर्थिक स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों पर बड़ा असर डाल सकती हैं। खास बात यह है कि ये गलतियां सिर्फ उन लोगों से नहीं होतीं, जिन्हें पर्सनल फाइनेंस की जानकारी कम है। अच्छे निवेशक और नियमित रूप से बजट बनाने वाले लोग भी कभी-कभी इन गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए, यह समझना जरूरी है कि पैसा बचाने के साथ-साथ उसे सही तरीके से संभालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

1- इमरजेंसी फंड को नजरअंदाज करना

लंबी अवधि के लिए निवेश करना अच्छी बात है, लेकिन अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग से पैसा रखना भी जरूरी है। नौकरी चली जाना, अचानक मेडिकल खर्च, घर की बड़ी मरम्मत, वाहन खराब होना या परिवार में कोई जरूरी खर्च सामने आ जाना जैसी परिस्थितियां कभी भी आ सकती हैं। अगर आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है, तो ऐसी स्थिति में आपको अपने निवेश को समय से पहले निकालना पड़ सकता है या फिर कर्ज लेना पड़ सकता है। इससे आपकी लंबे समय की वित्तीय योजना प्रभावित हो सकती है। इसलिए निवेश के साथ ऐसा फंड रखना चाहिए, जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

2- निवेश करने के बाद पोर्टफोलियो को भूल जाना

बहुत से लोग SIP, म्यूचुअल फंड, शेयर या दूसरी योजनाओं में निवेश शुरू करने के बाद उसे लंबे समय तक देखते ही नहीं हैं। नियमित निवेश जरूरी है, लेकिन समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आपकी उम्र, आय, जिम्मेदारियां, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य समय के साथ बदल सकते हैं। जो निवेश 5 साल पहले आपके लिए सही था, जरूरी नहीं कि आज भी उतना ही उपयुक्त हो। इसलिए समय-समय पर यह देखना चाहिए कि आपका निवेश आपके मौजूदा लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुरूप है या नहीं।

3- मार्केट को टाइम करने की कोशिश

शेयर बाजार में निवेश करने वालों की एक आम गलती यह है कि वे बाजार के ऊपर जाने या गिरने का सही समय पहले से पता लगाने की कोशिश करते हैं। बाजार गिरने पर निवेश रोक देना और तेजी आने पर अचानक बड़ी रकम लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। यहां तक कि अनुभवी निवेशकों के लिए भी लगातार बाजार की दिशा का सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं होता। बार-बार खरीद-बिक्री करने से लागत और टैक्स का बोझ भी बढ़ सकता है। लंबी अवधि के निवेशक के लिए अनुशासन और अपने लक्ष्य पर ध्यान देना अक्सर बाजार की हर छोटी चाल को पकड़ने की कोशिश से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

4- कमाई बढ़ते ही खर्च बढ़ा देना

अगर आपकी सैलरी बढ़ रही है, लेकिन बचत उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही, तो आपको लाइफस्टाइल क्रीप (Lifestyle Creep) की समस्या हो सकती है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ने लगते हैं। महंगी कार, बड़ा घर, नए गैजेट, ज्यादा बाहर खाना या महंगी छुट्टियां धीरे-धीरे बजट का बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। समस्या तब होती है, जब आय बढ़ने के बावजूद निवेश और बचत में पर्याप्त वृद्धि नहीं होती। इसलिए हर वेतन वृद्धि का पूरा फायदा बढ़े हुए खर्च में लगाने के बजाय उसका एक हिस्सा निवेश और भविष्य के लक्ष्यों के लिए अलग करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

5- टैक्स को नजरअंदाज करना

किसी निवेश से अच्छा रिटर्न मिलना हमेशा यह नहीं बताता कि पूरा लाभ आपके हाथ में आएगा। अलग-अलग निवेश और आय के स्रोतों पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू हो सकते हैं। ब्याज से होने वाली आय, शेयर या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला लाभ, प्रॉपर्टी की बिक्री और दूसरी कमाई पर टैक्स का असर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी निवेश ने कितना रिटर्न दिया। यह भी देखना चाहिए कि टैक्स और अन्य लागतों के बाद वास्तविक रिटर्न कितना बच रहा है। निवेश करने से पहले उसके टैक्स प्रभाव को समझना भविष्य में अप्रत्याशित बोझ से बचा सकता है।

6- बिना क्लियर फाइनेंशियल लक्ष्य के बचत करना

सिर्फ पैसा जमा करना अच्छी शुरुआत है, लेकिन किस उद्देश्य के लिए कितना पैसा चाहिए, यह तय करना वित्तीय योजना को ज्यादा प्रभावी बनाता है। उदाहरण के लिए घर खरीदना, बच्चों की शिक्षा, शादी, रिटायरमेंट या किसी बड़े बिजनेस के लिए पैसा जमा करना अलग-अलग लक्ष्य हैं और इनकी समयसीमा भी अलग हो सकती है। अगर लक्ष्य स्पष्ट है, तो यह तय करना आसान होता है कि हर महीने कितनी रकम बचानी है और किस तरह के निवेश का इस्तेमाल करना है। बिना लक्ष्य के निवेश करने पर व्यक्ति कभी बहुत ज्यादा जोखिम ले सकता है, तो कभी जरूरत से ज्यादा पैसा कम रिटर्न वाले विकल्प में रख सकता है।

7- इंश्योरेंस को निवेश समझने की गलती

नियमित बचत करने वाले लोग कभी-कभी यह मान लेते हैं कि उनका निवेश ही उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त है। लेकिन, निवेश और इंश्योरेंस का उद्देश्य अलग-अलग होता है। जीवन बीमा का मुख्य उद्देश्य परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना है, जबकि निवेश का उद्देश्य संपत्ति या धन का निर्माण करना है। इसी तरह स्वास्थ्य बीमा अचानक आने वाले बड़े मेडिकल खर्च से बचाने में मदद कर सकता है। पर्याप्त इंश्योरेंस कवर नहीं होने पर किसी गंभीर घटना के समय सालों की बचत और निवेश का पैसा खर्च हो सकता है।

निष्कर्ष के तौर पर अच्छी वित्तीय स्थिति बनाने के लिए सिर्फ नियमित बचत और निवेश करना पर्याप्त नहीं है। इमरजेंसी फंड, सही इंश्योरेंस, पोर्टफोलियो की समीक्षा, टैक्स की समझ, क्लियर फाइनेंशियल लक्ष्य और खर्च पर नियंत्रण भी उतने ही जरूरी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि निवेश को एक बार किया जाने वाला फैसला न समझें। आपकी आय, उम्र, जिम्मेदारियां और लक्ष्य बदलते हैं, इसलिए आपकी वित्तीय रणनीति में भी समय के साथ जरूरी बदलाव होने चाहिए। यही छोटी-छोटी सावधानियां लंबे समय में आपकी बचत को बेहतर तरीके से धन में बदलने में मदद कर सकती हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN