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Stock Market outlook: घरेलू शेयर बाजार की स्थिति में इस हफ्ते क्या दिखेगा बदलाव? निवेशक इन बातों का रखें ध्यान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Stock Market outlook: स्थानीय शेयर बाजार में आगामी कम कारोबारी सत्रों वाले सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत और कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। ‘गांधी जयंती’ के मौके पर शुक्रवार दो अक्टूबर को शेयर बाजार में अवकाश रहेगा।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट(रिसर्च) अजित मिश्रा ने कहा, ‘अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से जुड़ी किसी रूपरेखा से ऊर्जा कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारत के आयात बिल और रुपये पर भी दबाव कम हो सकता है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।’

ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर. ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर के नीतिगत फैसले के बाद वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल भी महत्वपूर्ण रहेगा। प्रतिफल और डॉलर में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है। वहीं, प्रतिफल में नरमी से बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण होगी। कच्चे तेल की खरीद के लिए डॉलर की मांग और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगने की संभावना रहती है।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी निवेशकों की बनी रहेगी नजर

एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरिसेल्वन राधाकृष्णन के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 105-106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अभी राहत देने वाला स्तर नहीं है। अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से तेल की कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक जोखिम कम हो सकता है, जबकि तनाव बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

औद्योगिक आंकड़ों भी नजर

घरेलू मोर्चे पर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और एचएसबीसी विनिर्माण पीएमआई बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों और वाहन बिक्री के मासिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि बाजार की नजर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन और केंद्र के राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर रहेगी। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उपभोक्ता भरोसा, जेओएलटीएस के रोजगार आंकड़े और यूरो क्षेत्र की सितंबर मुद्रास्फीति के आंकड़े भी ब्याज दर को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.53 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 205.9 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN