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TRAI के नए स्पैम नियम: अब ऐसे कॉलर्स के नंबर होंगे ब्लॉक, टेलीकॉम कंपनियां कर सकेंगी डिस्कनेक्ट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

TRAI ने स्पैम कॉल और अनचाहे कमर्शियल कम्युनिकेशन पर लगाम लगाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। AI से संदिग्ध स्पैमर्स की पहचान होने पर टेलीकॉम कंपनियां नंबर को ब्लॉक या डिस्कनेक्ट कर सकेंगी।

स्पैम कॉल और अनचाहे मैसेज से परेशान मोबाइल यूजर्स के लिए TRAI ने नियमों को और सख्त कर दिया है। टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कॉमर्शियल कम्युनिकेशंस से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियां AI और मशीन लर्निंग बेस्ड सिस्टम से संदिग्ध स्पैमर्स की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगी। खास बात यह है कि अब हर मामले में यूजर की शिकायत का इंतजार करना जरूरी नहीं होगा।

नए नियमों में Spam और Spammer की औपचारिक परिभाषा को शामिल किया गया है। इसके अलावा Application-to-Person यानी A2P कॉल को भी नियमों के दायरे में लाया गया है। इनमें ऑटो-डायलिंग, रोबोकॉल और पहले से रिकॉर्ड या आर्टिफिशियल वॉइस से की जाने वाली कॉल्स शामिल हैं। ऐसे कॉल करने वाले सेंडर्स को पहले से अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को जानकारी देनी। यह जानकारी DLT प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाएगी।

संदिग्ध नंबरों पर होगी कार्रवाई

अगर कोई A2P कॉल बिना जरूरी जानकारी दिए की जाती है तो उसे Unsolicited Commercial Communication माना जा सकता है। AI सिस्टम से संदिग्ध कॉलिंग नंबर की पहचान होने पर संबंधित टेलीकॉम कंपनी उस सेंडर की KYC पहचान से जुड़ी जानकारी दूसरे ऑपरेटरों के साथ साझा करेगी। इसके बाद दूसरे ऑपरेटर भी अपने नेटवर्क में पिछले 10 दिनों के दौरान उससे जुड़े नंबरों की जांच करेंगे। अगर किसी सेंडर से जुड़े पांच या उससे ज्यादा CLI संदिग्ध गतिविधि में पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

पहली बार AI सिस्टम के जरिए नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर सेंडर के सभी टेलीकॉम रिसोर्सेज की आउटगोइंग सर्विस 15 दिनों के लिए बंद की जा सकती है। इसमें वे रिसोर्स भी शामिल हो सकते हैं जिनका उस स्पैम कम्युनिकेशन में इस्तेमाल नहीं हुआ था। अगर बाद में भी वॉयलेशन सामने आता है तो PRI/SIP ट्रंक और SIM समेत टेलीकॉम रिसोर्सेज को सभी ऑपरेटरों के स्तर पर एक साल तक डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। संबंधित सेंडर को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है और इस दौरान नए टेलीकॉम रिसोर्स लेने पर रोक लग सकती है।

सेंडर रख सकेगा अपना पक्ष

हालांकि, AI सिस्टम की ओर से फ्लैग किए गए सेंडर को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। अगर उसकी ओर से दी गई सफाई उचित पाई जाती है तो संबंधित CLI को अनफ्लैग किया जा सकता है। यानी केवल AI सिस्टम की पहचान के आधार पर बिना किसी प्रक्रिया के स्थायी कार्रवाई करने की व्यवस्था नहीं है।

TRAI के मुताबिक अप्रैल 2026 में टेलीकॉम कंपनियों के AI सिस्टम ने करीब 771 करोड़ कॉल और 48 करोड़ SMS को संदिग्ध स्पैम के तौर पर फ्लैग किया था। रेगुलेटर का कहना है कि AI से पहचाने गए संदिग्ध स्पैम और यूजर्स की ओर से दर्ज शिकायतों के बीच बड़ा अंतर है। इसलिए शिकायत आधारित सिस्टम के साथ टेक्नोलॉजी आधारित पहचान को भी मजबूत किया जा रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN