Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- UPI से जुड़े कारोबारियों के लिए बड़ी खबर है
- 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले MDR को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI चार्जेज को लेकर एक बड़ी खबर है। दरअसल, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे अब 1 जनवरी 2027 से लागू किया जा सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। अगर सरकार फैसला लेती है तो इससे त्योहारों के मौसम की शुरुआत में रिटेलर्स को राहत मिलेगी।
शेयरों में बड़ी गिरावट
बहरहाल, इस रिपोर्ट के बाद पेमेंट एग्रीगेटर पेटीएम के शेयरों में 10% की गिरावट आई, जिससे उसका मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया जबकि मोबिक्विक और पाइन लैब्स के शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखी गई। पेटीएम के शेयरों में भारी बिकवाली के कारण गुरुवार सुबह यह कुछ समय के लिए एनएसई पर 1,558.80 रुपये प्रति शेयर के लोअर सर्किट पर आ गया, जिससे बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों में इसके मार्केट कैपिटलाइजेशन से लगभग 10,972 करोड़ रुपये कम हो गए। इस बीच, मोबिक्विक के शेयर 8% से अधिक गिरकर 234.52 रुपये प्रति शेयर पर आ गए और पाइन लैब्स के शेयर 4% से अधिक गिरकर 170.21 रुपये प्रति शेयर पर थे।
बता दें कि सरकार ने करीब छह साल से पूरी तरह नि:शुल्क यूपीआई भुगतान व्यवस्था के बाद 15 अक्टूबर से यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिये व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और छोटे भुगतानों को किसी भी शुल्क से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। वहीं 75,000 रुपये और उससे अधिक के भुगतान पर एमडीआर अधिकतम 300 रुपये होगा।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन जैसे जरूरी, कम ‘मार्जिन’ वाले क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का तय एमडीआर होगा। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर तथा डीलर के जरिये किए जाने वाले भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) ट्रांसफर पर आकार की परवाह किए बिना शून्य शुल्क जारी रहेगा। यह यूपीआई के लेनदेन की मात्रा का 37 प्रतिशत और उसके मूल्य का 70 प्रतिशत है।
कोर्ट तक पहुंचा मामला
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। हालांकि, बीते दिनों कोर्ट ने फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया लेकिन केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। कोर्ट ने अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान यह नोटिस जारी किया।
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