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US फेड ने 3 साल बाद बढ़ाई ब्याज दर, भारत पर पड़ेगा असर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के साथ जंग छिड़ी जंग के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। तीन साल से ज्यादा समय बाद फेड ने पहली बार ब्याज दर बढ़ाई है। महंगाई पर काबू पाने के लिए उठाए गए इस कदम के बाद अमेरिकी फेडरल फंड्स रेट बढ़कर 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में पहुंच गई है। फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बाद अमेरिकी शेयरों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। फैसले से पहले डाउ में खरीदारी थी तो फैसले के बाद यह रेड जोन में ट्रेड कर रहा था। S&P 500 में उछाल था तो नैस्डैक 0.82% में भी बढ़त देखी गई।

अभी एक और डोज?

फेडरल रिजर्व ने अपनी ‘इकोनॉमिक प्रोजेक्शन समरी’ में अनुमान लगाया कि साल के आखिर तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की जाएगी। इसके साथ ही, महंगाई और ग्रोथ के अपने अनुमानों को भी बढ़ाया है। इस अनुमान के मुताबिक, फेड को उम्मीद है कि साल के आखिर तक US की रियल GDP ग्रोथ 2.3 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी जबकि पहले का अनुमान इससे कम था। फेड को उम्मीद है कि महंगाई का उसका मानक 3.7 प्रतिशत रहेगा, जो साल के आखिर के लिए पहले लगाए गए 3.6 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।

2023 में आखिरी बढ़ोतरी

बता दें कि साल 2023 में US फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क फेडरल फंड्स रेट को चार बार बढ़ाया। हर बार 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की गई। महंगाई लगभग पांच साल से फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से स्थिति और खराब हो गई है।

यह फैसला नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के कार्यकाल में ब्याज दरों पर पहला बड़ा कदम है। बता दें कि वॉर्श की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। ट्रंप पहले भी फेड से ब्याज दरें कम करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में फेड की ओर से दर बढ़ाने का फैसला राष्ट्रपति की कम दरों की मांग से अलग रुख को दिखाता है।

जंग की वजह से 38.1 अरब डॉलर का नुकसान

अमेरिकी कांग्रेस के बजटीय कार्यालय (सीबीओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के कारण अमेरिका को एक अगस्त तक करीब 38.1 अरब अमेरिकी डॉलर (2,69,545 करोड़ रुपये) का भारी वित्तीय नुकसान हो चुका है। सैन्य अभियानों की तीव्रता के आधार पर आने वाले एक महीने की लड़ाई में अमेरिका को दो से तीन अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। सीबीओ की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि हथियारों का उत्पादन बढ़ाया भी जाता है, तो भी इस भंडार को पहले जैसी स्थिति में लाने में कम से कम पांच वर्ष का समय लगेगा।

फेड का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में चुनावी माहौल है। अमेरिकी नागरिक नवंबर में 2026 के मिड-टर्म चुनावों में वोट डालेंगे। हाउस की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं।

भारत पर क्या असर?

US फेडरल रिजर्व के फैसले का भारतीय बाजार पर भी असर पड़ेगा। US में ब्याज दरें बढ़ने से डॉलर में मौजूद एसेट्स ज्याद आकर्षक हो सकते हैं, जिससे भारत के बाजार में आने वाले कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है। डॉलर के मजबूत होने से रुपया पर भी दबाव पड़ सकता है। भारत में निवेशक निश्चित रूप से रुपये, भारतीय इक्विटी, सरकारी बॉन्ड यील्ड, विदेशी पोर्टफोलियो फ्लो, सोने आदि के असर पर नजर रखेंगे। यह भी देखना अहम होगा कि गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार कैसे रिएक्ट करते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN