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US-कजाकिस्तान डील का फायदा किसे, अमेरिका नहीं ट्रंप परिवार की होगी मोटी कमाई! क्या है पूरा खेल?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और कजाकिस्तान के बीच हुई 1.1 अरब डॉलर की टंगस्टन डील में भारी घालमेल सामने आया है। इस सौदे का सीधा आर्थिक लाभ राष्ट्रपति ट्रंप और वाणिज्य सचिव लुटनिक के परिवारों को मिल रहा है!

अमेरिका और कजाकिस्तान के बीच गुप्त रूप से हुई एक बड़ी खनिज डील अब बड़े विवाद में तब्दील हो गई है। एक खोजी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले साल नवंबर 2025 में कजाकिस्तान के टंगस्टन भंडारों के खनन के लिए जो समझौता हुआ था, उसका सीधा फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के परिवारों और उनके निजी व्यवसायों को मिलने वाला है। इस डील के समय दोनों परिवारों के निजी हितों की बात को जनता से छिपाकर रखा गया था।

टंगस्टन क्या है और अमेरिका के लिए यह क्यों ‘लाइफलाइन’ है?

इस पूरे विवाद को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर ‘टंगस्टन’ क्या है और इसके पीछे इतनी होड़ क्यों मची है।

टंगस्टन को डिफेंस इंडस्ट्री में ‘वॉर मेटल’ कहा जाता है। बहुत ज्यादा घनत्व, बहुत ऊंचे मेल्टिंग प्वाइंट और बेजोड़ मजबूती के कारण इसका इस्तेमाल मिसाइल के वॉरहेड, बख्तरबंद गाड़ियों को भेदने वाले गोला-बारूद और लड़ाकू विमानों को बनाने में होता है।

साल 2025 की शुरुआत में जब वैश्विक व्यापारिक तनाव बढ़ा, तो चीन ने टंगस्टन सहित कई महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए, जिससे दुनिया भर में इसकी भारी किल्लत हो गई।

अमेरिका ने करीब एक दशक पहले अपनी आखिरी टंगस्टन खनन फैक्ट्री को बंद कर दिया था। तब से अमेरिका पूरी तरह से इसके आयात पर निर्भर है।

क्या थी यह ‘टंगस्टन डील’?

नवंबर 2025 में कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव जब वॉशिंगटन के दौरे पर आए थे, तब दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के सहयोग को लेकर एक सहमति पत्र (MoU) साइन हुआ था। इस दौरे पर अमेरिकी कंपनियों के साथ 17.2 अरब डॉलर के 30 समझौते हुए, जिनमें से अकेले टंगस्टन प्रोजेक्ट के लिए 1.1 अरब डॉलर के निवेश की योजना थी।

इस समझौते के तहत:

  • अमेरिकी कंपनी ‘कोव काज कैपिटल ग्रुप’ को कजाकिस्तान की सरकारी माइनिंग फर्म के साथ ज्वाइंट वेंचर में 70% की हिस्सेदारी दी गई।
  • इस प्रोजेक्ट के सफल होने पर अमेरिका को हर साल लगभग 12,000 मीट्रिक टन टंगस्टन मिलने की उम्मीद है, जो कि अमेरिका की तरफ से सालाना किए जाने वाले कुल टंगस्टन आयात के बराबर है। इससे अमेरिका की चीन पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।

जांच के घेरे में ट्रंप प्रशासन: ‘देश का फायदा या परिवार का मुनाफा?’

आर्थिक और रणनीतिक रूप से यह डील अमेरिका के लिए जितनी फायदेमंद दिखती है, उतनी ही यह व्हाइट हाउस के भीतर चल रहे ‘हितों के टकराव’ को लेकर सवालों के घेरे में है।

The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, डील साइन होने के कई महीने पहले से ही ट्रंप और लुटनिक के परिवारों से जुड़ी कंपनियों ने खुद को इस तरह सेट कर लिया था कि उन्हें सीधे मुनाफा हो:

फोन पर हुई थी ‘डीलिंग’: हालांकि समझौता नवंबर 2025 में हुआ, लेकिन इसकी रूपरेखा दो महीने पहले ही सेंट रेगिस होटल में वाणिज्य सचिव लुटनिक और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति के बीच तय हो गई थी। इस बैठक में खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने फोन के जरिए जुड़कर कजाकिस्तान के राष्ट्रपति को इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने के लिए राजी किया था।

ट्रंप के बेटों का निवेश: डील साइन होने के कुछ ही दिन पहले ‘स्काईलाइन बिल्डर्स’ नाम की कंपनी का विलय ‘कोव काज कैपिटल’ में हुआ, जिससे नई कंपनी ‘काज रिसोर्सेज इंक’ बनी। ट्रंप के बेटों- डोनाल्ड जूनियर और एरिक ट्रंप ने ‘डोमिनारी सिक्योरिटीज’ और एक स्पेशल पर्पज व्हीकल के जरिए स्काईलाइन बिल्डर्स में हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसने डील से ठीक पहले कोव काज में 20% शेयर हासिल कर लिए।

लुटनिक के बेटों की कमाई: लुटनिक के परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ (जिसकी देखरेख उनके बेटे ब्रैंडन और काइल करते हैं) ने एक प्रमुख निवेशक के लिए 210 मिलियन डॉलर जुटाने में मदद की और फीस के रूप में करोड़ों डॉलर कमाए।

सरकारी खजाने से मदद: इस साल (2026) इस कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग होने से ठीक पहले यह बात सामने आई है कि ट्रंप प्रशासन ने इस टंगस्टन सौदे को चलाने के लिए पहले ही 1.6 अरब डॉलर की सरकारी मदद की प्रारंभिक प्रतिबद्धता जारी कर दी थी।

बड़ा फैक्ट: ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में करीब 60 महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं के लिए लगभग 19 अरब डॉलर के सरकारी फंड को मंजूरी दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कुल फंड का लगभग आधा हिस्सा (करीब 9.5 अरब डॉलर) सीधे तौर पर ट्रंप और लुटनिक परिवारों से जुड़ी कंपनियों के खातों में गया है।

कजाकिस्तान को इस कूटनीति से क्या मिला?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते सैन्यीकरण के बीच कजाकिस्तान खुद को एक बड़े सप्लायर के रूप में स्थापित कर रहा है। वह उन देशों को आकर्षित कर रहा है जो चीन से हटकर अपने सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई (विविध) करना चाहते हैं। कजाकिस्तान के पास अमेरिका की क्रिटिकल मिनरल्स लिस्ट में शामिल 60 में से कम से कम 25 खनिजों को प्रोसेस करने की क्षमता है।

कजाकिस्तान पिछले कुछ सालों से रूस और चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, तुर्की और दक्षिण कोरिया के साथ काम कर रहा है। क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप मानवाधिकारों और लोकतंत्र की पारंपरिक कूटनीति को छोड़कर ‘लेन-देन वाली व्यावहारिक विदेश नीति’ पर भरोसा करते हैं, इसलिए कजाकिस्तान के लिए उनके साथ रिश्ते गहरे करना आसान हो गया। कजाकिस्तान ने अमेरिका को खुश करने के लिए अब्राहम केंट में शामिल होने और बोर्ड ऑफ पीस का संस्थापक सदस्य बनने जैसे कई बड़े कदम उठाए हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN