Source :- LIVE HINDUSTAN
Stock in News Today: आज 9 जून को टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल लिमिटेड और वोडाफोन आइडिया के शेयरों में उछाल देखने को मिली है। कंपनियों के शेयरों की कीमतों में 3 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है। इस उछाल बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद देखने को मिली। कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया पर एकमुश्त स्पेक्ट्रम शुल्क (ओटीएससी) लगाने के केंद्र सरकार के 2012 के फैसले को सोमवार को खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने इस तरह के फैसले के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया
वोडाफोन आइडिया के शेयरों में 3.61% की तेजी (Vodafone idea Share price)
आज मंगलवार को वीआई के शेयर बीएसई में 14.38 रुपये के स्तर पर ओपन हुए थे। दिन में कंपनी के शेयरों का भाव 3.61 प्रतिशत की तेजी के साथ 14.90 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, इसके बाद शेयरों में नरमी देखने को मिली। लेकिन बढ़त 1 प्रतिशत से अधिक की बनी हुई है।
एयरटेल के शेयरों में तेजी (Airtel Share price)
इस टेलीकॉम कंपनी का शेयर 1834.65 रुपये के स्तर पर खुला था। कंपनी के शेयर 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 1835.85 रुपये के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया। इसके बाद एयरटेल के शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई। जिसकी वजह से कंपनी का शेयर 1 प्रतिशत से अधिक लुढ़क भी गया है।
क्या कुछ कहा है कोर्ट ने अपने आदेश में?
जस्टील मनीष पिटाले और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसाट की खंडपीठ ने ओटीएससी की वसूली के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी मांग नोटिसों को भी रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकार यह बताने में विफल रही है कि उसे ऐसा निर्णय लेने और उसके आधार पर मांग नोटिस जारी करने का अधिकार किस स्रोत से प्राप्त हुआ।
बेंच ने पाया कि सरकार ने जनहित की आड़ में दूरसंचार कंपनियों के साथ हुए अनुबंध/लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया तथा विवादित निर्णय जारी करने के लिए कोई वैधानिक अधिकार बताने में असमर्थ रही है।
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा,”हमने पाया है कि सरकार अनुबंध/लाइसेंस समझौतों की शर्तों और संबंधित वैधानिक प्रावधानों के दायरे में निर्णय जारी करने की अपनी एकतरफा कार्रवाई को उचित ठहराने में सक्षम नहीं रही है।” इन दोनों कंपनियों ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि केंद्र सरकार को टेलीग्राफ अधिनियम के तहत इस प्रकार का एकमुश्त स्पेक्ट्रम शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आठ नंबर, 2012 को निर्णय लिया था कि जुलाई, 2008 से 6.2 मेगाहर्ट्ज से ऊपर के स्पेक्ट्रम पर एकमुश्त स्पेक्ट्रम शुल्क लगाया जाएगा। कंपनियों ने जनवरी, 2013 में इस निर्णय और मांग नोटिसों को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। उस समय अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए सुनवाई पूरी होने तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।
(भाषा के इनपुट के साथ)
(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)
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