Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान का शाहेद ड्रोन बीते कुछ दिनों से खूब चर्चा में हैं। अमेरिका के साथ हालिया जंग में ईरान ने इस ड्रोन की मदद से खूब उत्पात मचाया, जिसकी वजह से अमेरिका को काफी नुकसान हुआ। अब अमेरिका भी ऐसा ही ड्रोन बनाएगा।

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास दोनों देशों ने एक बार फिर एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके बाद युद्ध की आग और भड़क सकती है। इस बीच अमेरिका को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका जल्द ही सऊदी अरब के साथ मिलकर ईरान के शाहेद जैसे ड्रोन बनाने जा रहा है। बता दें कि यह वही ड्रोन है जिसने युद्ध में अमेरिका की नाक में दम कर दिया और जिसकी वजह से अमेरिका को करोड़ो रुपए का नुकसान झेलना पड़ा।

सेमाफोर की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस ड्रोन को बनाने के लिए रियाद में एक फैक्ट्री बनाई जाएगी। रियाद के पास बनने वाली नई डिफेंस फैसिलिटी में ‘अटैक ड्रोन’ बनाए जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट अमेरिका और सऊदी अरब की कंपनियों के बीच हुई साझेदारी के बाद शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साझेदारी के तहत एक खतरनाक ड्रोन सिस्टम तैयार करने की योजना है। इस ड्रोन का नाम ‘SKYWASP’ रखा गया है। इसके डिजाइन और मारक क्षमता की बात की जाए तो यह पूरी तरह ईरान के शाहेद ड्रोन जैसा होगा। जानकारी के मुताबिक शाहेद ड्रोन की तरह की इन ड्रोन्स को ‘वन-वे स्ट्राइक’ यानी आत्मघाती हमलों के लिए डिजाइन किया जाएगा।

क्या है अमेरिका-सऊदी अरब की योजना?

सऊदी अरब और अमेरिका इस ड्रोन से ईरान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर होगी। यानी सऊदी अरब की धरती से लॉन्च होने के बाद यह ड्रोन सीधे ईरान की राजधानी तेहरान के अंदर घुसकर तबाही मचाने में सक्षम होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए SR2 के को-फाउंडर और चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर लुसिएन ज़िग्लर ने बताया है कि स्काइवास्प एक ऐसा प्रोग्राम है जो युद्ध के मैदान में खेल को पूरी तरह बदल देगा और सऊदी अरब की सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।

क्यों पड़ी इस ड्रोन की जरूरत?

गौरतलब है कि हालिया युद्ध में खाड़ी देशों पर हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ईरान के शाहेद ड्रोंस ने सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और UAE जैसे देशों में ना सिर्फ अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, बल्कि उनके ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी काफी नुकसान हुआ है। वहीं इस ड्रोन को इंटरसेप्ट करने में अमेरिका के लाखों डॉलर स्वाहा हो गए।

गौरतलब है कि कि ईरान का एक शाहेद ड्रोन महज 35,000 डॉलर यानी करीब 29 लाख रुपए में बनकर तैयार हो जाता है। लेकिन इस सस्ते ड्रोन को मार गिराने के लिए सऊदी और अमेरिका को अपने बेहद महंगे पैट्रियट जैसी मिसाइल डिफेंस प्रणालियों का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे एक मिसाइल की कीमत करोड़ो रुपए तक होती है। यही वजह है कि आधुनिक युद्ध में कम लागत वाले ड्रोन और इंटरसेप्टर बेहद अहम हो गए हैं।

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