Source :- LIVE HINDUSTAN
बढ़ती LPG कीमतों के बीच एथेनॉल चूल्हा लोगों के लिए राहत की खबर बनकर सामने आया है। यह तकनीक न सिर्फ जेब पर कम बोझ डाल सकती है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जा रही है। जानिए कैसे करता है काम, इसकी कीमत और फायदे:
देश में लगातार बढ़ती LPG सिलेंडर की कीमतों ने आम लोगों के किचन का बजट बिगाड़ दिया है। हर महीने गैस सिलेंडर भरवाना अब बहुत महंगा हो गया है। ऐसे समय में एक नई तकनीक तेजी से चर्चा में है, जिसका नाम है एथेनॉल चूल्हा। दावा किया जा रहा है कि यह चूल्हा LPG के मुकाबले सस्ता भी है और पर्यावरण के लिए बेहतर भी। यही वजह है कि सरकार से लेकर कई कंपनियां अब इस तकनीक को बढ़ावा देने में जुटी हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक मेड इन इंडिया एथेनॉल बेस्ड कुकिंग स्टोव पेश किया है। दावा किया जा रहा है कि यह चूल्हा LPG गैस सिलेंडर से सस्ता पड़ सकता है और इससे खाना बनाना भी आसान होगा। गडकरी के मुताबिक यह स्टोव एथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ 7 प्रतिशत एथेनॉल को पानी में मिलाकर ऐसी लौ तैयार की जा सकती है जिससे खाना पकाया जा सके।
एथेनॉल चूल्हा क्या है?
एथेनॉल चूल्हा एक ऐसा स्टोव है जो LPG गैस की बजाय एथेनॉल फ्यूल से चलता है। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल आधारित ईंधन होता है जिसे गन्ना, मक्का और दूसरी फसलों से तैयार किया जाता है। भारत में इसे बायोफ्यूल के तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इस चूल्हे में एक छोटा फ्यूल टैंक होता है जिसमें एथेनॉल डाला जाता है। इसके बाद स्टोव को जलाने पर यह ईंधन साफ लौ पैदा करता है और उसी से खाना पकाया जाता है। देखने में यह सामान्य गैस स्टोव जैसा ही लगता है, लेकिन इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती।
एथेनॉल स्टोव कैसे काम करता है?
एथेनॉल चूल्हे की टेक्नोलॉजी काफी आसान है। इसमें लिक्विड एथेनॉल को बर्नर तक पहुंचाया जाता है। वहां यह ईंधन हवा के संपर्क में आकर जलता है और गर्मी पैदा करता है। इसी गर्मी पर खाना पकाया जाता है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि एथेनॉल आसानी से जलता है और इससे धुआं भी कम निकलता है। गडकरी के अनुसार इस तकनीक में 7 प्रतिशत एथेनॉल को पानी के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद खास तरह के बर्नर सिस्टम की मदद से यह मिश्रण जलता है और खाना पकाने लायक गर्मी पैदा करता है। यही वजह है कि इसे क्लीन फ्यूल माना जाता है। कई नए मॉडल में ऑटो इग्निशन और फ्लेम कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जिससे यह इस्तेमाल में और आसान हो जाता है।
LPG से कितना सस्ता पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल चूल्हा लंबे समय में LPG से सस्ता साबित हो सकता है। इस तकनीक को सस्ता इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि एथेनॉल भारत में ही तैयार किया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इसमें सिलेंडर भरवाने जैसा बड़ा खर्च नहीं आता। जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में भी एथेनॉल खरीदा जा सकता है। एथेनॉल स्टोव पर खाना बनाना LPG के मुकाबले काफी सस्ता माना जा रहा है। यूएन क्लाइमेट टेक्नोलॉजी सेंटर एंड नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, सुपरब्लू एथेनॉल स्टोव सिर्फ 1 लीटर एथेनॉल में करीब 15 घंटे तक लगातार जल सकता है।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसकी क्षमता पारंपरिक LPG चूल्हों की तुलना में लगभग 5 गुना ज्यादा बेहतर है। अगर एथेनॉल की सप्लाई बड़े स्तर पर शुरू होती है तो इसकी कीमत और कम हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में जहां गैस सिलेंडर पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां यह तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है।
पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जा रहा?
आज पूरी दुनिया प्रदूषण कम करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में एथेनॉल को ग्रीन फ्यूल के तौर पर देखा जा रहा है। LPG और कोयले के मुकाबले इससे कम प्रदूषण होता है। इसके जलने पर कार्बन emission भी कम होता है। भारत सरकार भी एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को तेजी से बढ़ा रही है। पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने के बाद अब घरेलू इस्तेमाल में भी इसकी संभावनाएं देखी जा रही हैं। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो इससे पर्यावरण को फायदा मिल सकता है।
ग्रामीण इलाकों में आज भी कई घर लकड़ी और कोयले पर खाना बनाते हैं। इससे धुआं निकलता है और महिलाओं की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। एथेनॉल चूल्हा इस समस्या का समाधान बन सकता है। यह हल्का होता है, आसानी से कहीं भी रखा जा सकता है और गैस सिलेंडर जैसी भारी व्यवस्था की जरूरत नहीं होती। अगर सरकार इस पर सब्सिडी देती है तो गांवों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।
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