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अमेरिका के लिए बहुत महंगा पड़ा ईरान से भिड़ना, नेपाल की GDP के बराबर फूंक डाले पैसे

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका 45.1 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। यह नेपाल की सालाना जीडीपी के बराबर है। डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि अब यु्द्ध खत्म हो जाए लेकिन ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। 

जिस युद्ध को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो से तीन सप्ताह में समेटने का दम भर रहे थे, वह अब सातवें महीने में प्रवेश कर एक विशाल आर्थिक दलदल का रूप ले चुका है। फरवरी में शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका अब तक 45.1 अरब डॉलर (करीब 4.30 लाख करोड़ रुपये) फूंक चुका है जोकि नेपाल जैसे देश की कुल सालाना जीडीपी (लगभग 45.84 अरब डॉलर) के बराबर है।

ट्रंप चाहते हैं अब खत्म हो जाए युद्ध

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) द्वारा कांग्रेस को सौंपी गई गोपनीय रिपोर्ट के हवाले से मीडिया ने रविवार को यह खुलासा किया। आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक : ताजा आंकड़ा कांग्रेसनल बजट ऑफिस के 1 अगस्त तक के 38 अरब डॉलर और जुलाई में पेंटागन के 37.5 अरब डॉलर के पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसमें अप्रत्यक्ष सैन्य-अभियान व्यय का आकलन जोड़ा गया है। राष्ट्रपति ट्रंप इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है, जिससे युद्ध के जल्द समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे।

हर महीने 25 हजार करोड़ का बोझ

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 45.1 अरब डॉलर के इस आंकड़े में पश्चिम एशिया में क्षतिग्रस्त हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों और प्रतिष्ठानों की मरम्मत का खर्च शामिल नहीं है। यदि बुनियादी ढांचे के इस नुकसान को जोड़ दिया जाए, तो वास्तविक लागत कई गुना बढ़ सकती है। सीबीओ का अनुमान है कि इस संघर्ष को जारी रखने के लिए अमेरिका को अब भी हर महीने 2 से 3 अरब डॉलर (लगभग 17 से 25 हजार करोड़ रुपये) का अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा।

शर्तें पूरी होने तक होर्मुज बंद रहेगा : गालिबाफ

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक अमेरिका, ईरान की सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, होर्मुज नहीं खोला जाएगा। यह बयान तब आया है जब ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को शर्तें भेज दी हैं और ट्रंप के जवाब का इंतजार है। गालिबाफ ने कहा कि कूटनीति में ईरान का रुख साफ, सही और बिना मोलभाव वाला है। वो दौर अब खत्म हो गया, जब हमारे ऊपर शर्तें थोपी जा रही थीं। ईरानी संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में पुरानी अमेरिकी व्यवस्था ढह गई है।

ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित

युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में तेल व प्राकृतिक गैस के जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रही हैं। सीबीओ ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा संकट के चलते 2027 की पहली तिमाही में ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर’ मुद्रास्फीति दर में 0.5 प्रतिशत अंक का उछाल आ सकता है, जबकि पहले इसके 0.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। विश्लेषकों का मानना है यदि सैन्य टकराव इसी तरह खिंचता रहा, तो युद्ध का बिल कई विकासशील देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था को भी पीछे छोड़ देगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN