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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की बंपर जीत से डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्या उनके खिलाफ तीसरी बार महाभियोग लाया जाएगा? जानिए कैसे राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया चलती है और क्या ट्रंप की कुर्सी खतरे में है।
अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित होते दिख रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत बढ़त ने अमेरिकी राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। चुनावी नतीजों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डेमोक्रेट्स संसद में अपनी ताकत बढ़ाकर डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू करेंगे? क्या ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाया जा सकता है?
हालांकि, एक बात स्पष्ट है कि मिडटर्म चुनाव में हारने का मतलब राष्ट्रपति का पद छोड़ना नहीं होता। अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग की अलग प्रक्रिया निर्धारित है। इसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों की भूमिका अहम होती है।
डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों में हासिल किया बहुमत
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के साथ-साथ सीनेट में भी बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के साथ रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण खत्म हो गया है।
इस चुनाव को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों पर जनता के फैसले के तौर पर देखा जा रहा था। चुनाव परिणामों ने संकेत दिया है कि मतदाताओं के एक बड़े वर्ग में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर नाराजगी है। खासतौर पर महंगाई, ईरान के साथ युद्ध, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप चुनावी मुद्दे बने।
डेमोक्रेट्स की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने उन राज्यों में भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों को शिकस्त दी, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को बड़ी जीत मिली थी। टेक्सास, आयोवा, कंसास, ओहायो और दक्षिण कैरोलिना जैसे राज्यों में डेमोक्रेट्स की सफलता ने इस चुनाव को रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका बना दिया।
मेन में रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिंस की हार भी चुनाव के सबसे चर्चित नतीजों में शामिल रही। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने उन्हें पराजित किया। वहीं टेक्सास में जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हराकर सीनेट की सीट हासिल की। ओहायो में शेरॉड ब्राउन और नॉर्थ कैरोलिना में रॉय कूपर की जीत ने भी डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत की।
ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच की तैयारी में डेमोक्रेट्स
कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के पास अब ट्रंप प्रशासन पर निगरानी रखने और उसकी नीतियों को चुनौती देने की कहीं अधिक ताकत होगी। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे नए कार्यकाल में प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों और राष्ट्रपति से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच कराएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ट्रंप के परिवार की कारोबारी गतिविधियों और उनकी संपत्ति में कथित बढ़ोतरी से जुड़े मामलों की भी पड़ताल करना चाहते हैं। इसके अलावा रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और एलन मस्क से जुड़े मामलों पर भी जांच की संभावना है।
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स की संभावित जांच के दायरे में ट्रंप के शेयर कारोबार, जेफ्री एपस्टीन से उनके संबंधों और एलन मस्क के साथ उनके रिश्तों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।
कांग्रेस में बहुमत होने से डेमोक्रेट्स को संसदीय समितियों का नियंत्रण मिलेगा। वे सुनवाई आयोजित कर सकेंगे, अधिकारियों को तलब कर सकेंगे और दस्तावेजों तथा अन्य जानकारियों के लिए समन जारी कर सकेंगे। इस तरह ट्रंप प्रशासन के लिए अपने फैसलों और गतिविधियों का बचाव करना पहले के मुकाबले मुश्किल हो सकता है।
क्या ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार महाभियोग लाया जाएगा?
चुनावी नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ट्रंप के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की हो रही है। इसकी वजह यह है कि ट्रंप पहले ही दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं। अब अगर डेमोक्रेट्स इस दिशा में आगे बढ़ते हैं तो यह उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में तीसरी ऐसी कार्रवाई होगी।
फोर्ब्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि डेमोक्रेट्स के पास ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार महाभियोग प्रस्ताव लाने का विकल्प मौजूद है। हालांकि, पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। कुछ नेता महाभियोग की मांग कर सकते हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व फिलहाल इस प्रक्रिया को प्राथमिकता देने से बचता दिख रहा है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि महाभियोग एक लंबी और राजनीतिक रूप से जोखिम भरी प्रक्रिया है। डेमोक्रेट्स के सामने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कई महत्वपूर्ण जांच शुरू करने का विकल्प है। ऐसे में पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि अपना राजनीतिक और संसदीय समय महाभियोग पर खर्च करने के बजाय प्रशासन की जवाबदेही तय करने पर ध्यान देना चाहिए।
पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भी महाभियोग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे चुकी हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि महाभियोग अच्छा विचार नहीं है, क्योंकि डेमोक्रेट्स के पास सीमित संसाधन हैं और उन्हें जांच तथा जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीनेट में ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए जरूरी वोट उपलब्ध नहीं हैं। ओहायो के नवनिर्वाचित सीनेटर शेरॉड ब्राउन ने भी महाभियोग का समर्थन नहीं किया है।
कैसे चलता है अमेरिका में महाभियोग का पूरा प्रोसेस?
अमेरिका में राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें कांग्रेस के दोनों सदनों की अलग-अलग भूमिका होती है।
1. प्रतिनिधि सभा में महाभियोग प्रस्ताव: सबसे पहले प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर मतदान होता है। इसके लिए साधारण बहुमत जरूरी है। प्रस्ताव पारित होने पर राष्ट्रपति पर औपचारिक रूप से महाभियोग लगाया जाता है।
2. सीनेट में चलेगा ट्रायल: इसके बाद मामला सीनेट में जाता है। यहां राष्ट्रपति के खिलाफ मुकदमे जैसी सुनवाई होती है। सीनेटर मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों पर विचार करते हैं।
3. दो-तिहाई बहुमत जरूरी: राष्ट्रपति को दोषी ठहराकर पद से हटाने के लिए सीनेट में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है।
यही वह सबसे बड़ी बाधा है, जो ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की संभावना को फिलहाल कमजोर करती है। डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों में बहुमत जरूर है, लेकिन सीनेट में दो-तिहाई बहुमत नहीं है। ऐसे में उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के कई सीनेटरों का भी समर्थन हासिल करना होगा।
अगर रिपब्लिकन सीनेटर बड़ी संख्या में ट्रंप के खिलाफ वोट नहीं करते हैं तो महाभियोग प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बावजूद सीनेट में विफल हो सकता है। इसलिए महाभियोग लगना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं।
ट्रंप के लिए 2028 के चुनाव से पहले बढ़ सकती हैं मुश्किलें
डेमोक्रेट्स की इस जीत का असर सिर्फ महाभियोग तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप के सामने अब अपने दूसरे कार्यकाल के शेष दो वर्षों में एक मजबूत विपक्ष का सामना करने की चुनौती होगी।
कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत गंवाने के बाद रिपब्लिकन पार्टी के लिए ट्रंप के एजेंडे को आसानी से आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति के फैसलों पर सवाल उठा सकेंगे, प्रशासन के कामकाज की जांच कर सकेंगे और कई विधेयकों के जरिए सरकार को राजनीतिक रूप से घेर सकते हैं।
हालांकि, ट्रंप के पास राष्ट्रपति के तौर पर वीटो की शक्ति बनी रहेगी। इसका मतलब है कि डेमोक्रेट्स कांग्रेस में कोई विधेयक पारित करा भी लेते हैं तो ट्रंप उसे रोक सकते हैं। राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी करने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
इसके अलावा सीनेट में डेमोक्रेटिक बहुमत होने से ट्रंप के लिए न्यायाधीशों, राजदूतों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना भी मुश्किल हो सकता है।
इस राजनीतिक टकराव का असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है। डेमोक्रेट्स इस जीत को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता के जनादेश के तौर पर पेश कर सकते हैं। वहीं रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ट्रंप की राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
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