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इजरायल में नेतन्याहू के विरोधी आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका; 6 हफ्ते में साबित करना होगा बहुमत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग आज याशर पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने का मौका देंगे। यह फैसला राष्ट्रपति ने सभी राजनीतिक दलों से लगभग एक हफ्ते तक बातचीत करने के बाद लिया है।

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोंग ने घोषणा की है कि वह इजरायल की अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी ‘यशार’ पार्टी के चेयरमैन गादी आइजेनकोट को सौंपेंगे। आइजेनकोट जिस ‘चेंज ब्लॉक’ (बदलाव गुट) का नेतृत्व कर रहे हैं, वह भविष्य के संभावित गठबंधन सहयोगियों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है। इनमें अति-रूढ़िवादी पार्टियां, अरब-नेतृत्व वाली पार्टियां और यहां तक कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि आइजेनकोट आज रविवार शाम स्थानीय समयानुसार 5 बजे (भारत समय रात 8:30 बजे) राष्ट्रपति आवास पर आयोजित एक समारोह में औपचारिक रूप से जनादेश प्राप्त करेंगे। इसके बाद उनके पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय होगा, और जरूरत पड़ने पर हर्जोग उन्हें 14 दिन तक का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। अगर वह बहुमत प्राप्त करने में विफल रहते हैं तो इसके बाद नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका दिया जा सकता है।

हर्जोग ने बताया कि उन्होंने बुधवार और गुरुवार को नेसेट (संसद) के सभी दलों के साथ विचार-विमर्श करने और सप्ताहांत में इन दो प्रतिद्वंद्वियों सहित राजनीतिक जगत की विभिन्न हस्तियों से बातचीत करने के बाद, शाम को ही आइजेनकोट और नेतन्याहू को अपने फैसले के बारे में सूचित कर दिया था।

पार्टी प्रतिनिधिमंडलों के साथ हर्जोग की बातचीत के दौरान आइज़ेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए 67 सिफारिशें मिलीं जो 120 सदस्यों वाली संसद में बहुमत है जबकि नेतन्याहू को 46 सिफारिशें मिलीं। सात सीटों वाली ‘यूनाइटेड तोराह जुडाइज़्म’ पार्टी ने कोई सिफारिश नहीं दी। हर्जोग की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए आइजेनकोट ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अब एक राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय आ गया है और हम इसके योग्य बनें इसके लिए मैं हर संभव प्रयास करूंगा।

गठबंधन सरकार बनाने की राह आसान नहीं

हालांकि गठबंधन सरकार बनाने की आइज़ेनकोट की राह बिल्कुल भी आसान नहीं है। उनके गुट के कट्टरपंथी सदस्य सार्वजनिक रूप से अरब-नेतृत्व वाले ‘राआम’ और ‘जॉइंट लिस्ट’ पर किसी भी तरह की निर्भरता का विरोध कर रहे हैं। वहीं, उनके गुट के कई सदस्यों ने इस बात पर जोर देते हुए चुनाव प्रचार किया था कि नेतन्याहू और अति-रूढ़िवादी पार्टियों दोनों को विपक्ष में भेजा जाना चाहिए।

शनिवार रात यशर पार्टी ने कहा कि लिकुड और उसके सहयोगी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो सकते हैं लेकिन यह प्रस्ताव नेतन्याहू को नहीं दिया गया। आइजेनकोट ने खुद कई बार जोर देकर कहा है कि वह किसी भी गठबंधन में नेतन्याहू के साथ नहीं जुड़ेंगे। उनका यह भी मानना है कि सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के समय जो लोग सत्ता में किसी बड़े पद पर थे उन्हें सार्वजनिक जीवन से हट जाना चाहिए।

नेतन्याहू ने क्या कहा

शनिवार शाम को एक वीडियो बयान में नेतन्याहू ने आइजेनकोट के नेतृत्व वाले ‘बदलाव गुट’ की पार्टियों से एक ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ बनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसमें उनके पिछले गठबंधन के सभी सहयोगियों को शामिल करना होगा, जिसकी संभावना न के बराबर है। इस बातचीत से चुनाव के बाद नेतन्याहू की शब्दावली में एक और बदलाव देखने को मिला। 27 अक्टूबर को मतदान खत्म होने के कुछ घंटों बाद, उन्होंने कहा कि वह एक ‘मजबूत, राष्ट्रीय, दक्षिणपंथी गठबंधन’ बनाएंगे। दो नवंबर को उन्होंने अपने नेतृत्व में एक ‘व्यापक राष्ट्रीय सरकार’ बनाने की बात कही। नेतन्याहू ने हालांकि यह नहीं बताया कि ऐसी सरकार का नेतृत्व किसे करना चाहिए।

नेतन्याहू ने सत्ता-साझाकरण के लिए रोटेशन समझौते का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन शनिवार को सार्वजनिक प्रसारक ‘कान’ ने नेतन्याहू के एक अज्ञात सहयोगी के हवाले से अनुमान जताया कि अगर मिली-जुली सरकार बनाने के लिए बातचीत होती है तो वह इस संभावना पर चर्चा करने के लिए तैयार हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि नेतन्याहू द्वारा आइजेनकोट के साथ मिलकर एक मिली-जुली सरकार बनाने की संभावना तलाशने के लिए भेजे गए व्यक्ति को तुरंत ही खारिज कर दिया गया।

दी कड़ी चेतावनी

अपने वीडियो बयान में प्रधानमंत्री ने अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के खिलाफ एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने इन पार्टियों को आतंकवाद का समर्थक करार दिया और दावा किया कि इससे देश बर्बाद हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ‘हमास समर्थकों पर निर्भर सरकार हमास से नहीं लड़ेगी,’ और गाजा तथा लेबनान में काम कर रहे आईडीएफ सैनिकों का बचाव भी नहीं करेगी।

प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि हाल के हफ्तों में यूरोप में भीषण दंगे देखे गए हैं और अगर अरब पार्टियों के समर्थन वाली सरकार बनती है तो वैसे ही दंगे इज़रायल में भी हो सकते हैं। नेतन्याहू ने इन दंगों को ‘इस्लामवादियों’ की करतूत बताया। वीडियो में नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि चुनाव से पहले उन्होंने एक मिली-जुली सरकार बनाने की बात कही थी। उन्होंने एक ‘व्यापक राष्ट्रीय सरकार’ के समर्थन में बयान तो दिए लेकिन दक्षिणपंथी ‘चैनल 14’ को दिए गए कई साक्षात्कारों में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब एक ‘व्यापक दक्षिणपंथी सरकार’ से था। एक बार तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि कोई मिली-जुली सरकार नहीं बनेगी।

आइजेनकोट की पार्टी ने किया पलटवार

वीडियो बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आइजेनकोट की याशर पार्टी ने नेतन्याहू पर पाखंड का आरोप लगाया और इजरायली समाज को विभाजित करने और उनके द्वारा स्थापित पिछली एकता सरकारों को कमजोर करने के लिए उनकी निंदा की। यशार पार्टी ने कहा कि अगर लिकुड और उसके सहयोगी अचानक एकता और एक व्यापक सरकार बनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, तो उनका स्वागत है। वे सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर सकते हैं कि वे चरमपंथियों के साथ अपना गठबंधन तोड़ रहे हैं, आइजेनकोट के चार सिद्धांतों को स्वीकार करते हैं, और प्रधानमंत्री आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN