Source :- LIVE HINDUSTAN
प्रशांत महासागर में चीन ने परमाणु पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागकर खलबली मचा दी है। अमेरिका, ताइवान और फिलीपींस ने ड्रैगन के इस कदम को बड़ी चेतावनी बताया है। जानें पूरी खबर।
प्रशांत महासागर में चीन के एक मिसाइल टेस्ट ने अमेरिका समेत कई इंडो-पैसिफिक देशों की नींद उड़ा दी है। चीन ने अपनी परमाणु संचालित पनडुब्बी से एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। इस टेस्ट के बाद अमेरिका ने बीजिंग पर तेजी से अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाने का आरोप लगाया है, वहीं क्षेत्रीय सरकारों ने इस कदम को भड़काऊ और क्षेत्र को अस्थिर करने वाला करार दिया है।
मिसाइल टेस्ट से जुड़ी अहम बातें:
- चीन ने यह मिसाइल सोमवार को दागी थी, जिसमें एक ‘डमी वारहेड’ (नकली हथियार) लगा था।
- बीजिंग ने इसे अपना नियमित और वार्षिक सैन्य अभ्यास करार दिया है।
- बीते दो सालों में यह दूसरी बार है जब चीन ने सार्वजनिक तौर पर प्रशांत महासागर में लंबी दूरी की मिसाइल लॉन्च करने की बात कबूली है।
अमेरिका ने जताई कड़ी चिंता
इस परीक्षण के बाद अमेरिका ने चीन के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम की कड़ी आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, “ऐसे समय में जब अमेरिका परमाणु प्रसार को रोकने के लिए पहले से कहीं अधिक प्रयास कर रहा है, चीन इसके ठीक विपरीत काम कर रहा है।” उन्होंने बीजिंग के तेजी से और अपारदर्शी तरीके से हथियार बढ़ाने को लेकर चिंता जताई। साथ ही चीन से अपील की है कि वह हथियार नियंत्रण पर सार्थक बातचीत करे और ऐसी मिसाइल लॉन्चिंग से पहले सूचना देने की एक नियमित व्यवस्था बनाए।
ताइवान और फिलीपींस समेत इन देशों ने किया कड़ा विरोध
क्षेत्रीय देशों ने इस मिसाइल लॉन्च पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। फिलीपींस ने इसे ‘सैन्य शक्ति का गैर-जिम्मेदाराना प्रदर्शन’ बताते हुए कहा कि इसका कोई शांतिपूर्ण उद्देश्य नहीं है। यह उन देशों के खिलाफ सोची-समझी उकसावे की कार्रवाई है, जो चीन की विस्तारवादी नीतियों का विरोध कर रहे हैं।
ताइवान ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने बताया कि यह जेएल-2 मिसाइल थी, जो प्रशांत महासागर में गिरने से पहले फिलीपींस के ऊपर से गुजरी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “चीन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह इस इलाके का दादा है।”
ऑस्ट्रेलिया ने इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला कदम बताया, जबकि जापान ने चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त करते हुए बीजिंग से इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
न्यूजीलैंड ने कहा कि उसे लॉन्च से कुछ ही घंटे पहले इसकी सूचना मिली थी। वहीं सोलोमन आइलैंड्स के प्रधानमंत्री मैथ्यू वाले ने प्रशांत देशों की ओर से चीनी राजनयिकों के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
रूस आया ड्रैगन के बचाव में
जहां एक तरफ दुनिया भर में इस टेस्ट का विरोध हो रहा है, वहीं रूस ने बीजिंग का बचाव किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे चीन का ‘संप्रभु अधिकार’ बताया और जोर देकर कहा कि “चीन दुनिया में किसी को भी कोई धमकी नहीं दे रहा है।”
क्यों मायने रखता है चीन का यह मिसाइल टेस्ट?
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह मिसाइल लॉन्च चीन के सैन्य आधुनिकीकरण में एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे पनडुब्बी-आधारित परमाणु क्षमता में चीन की बढ़ती ताकत का पता चलता है।
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो लाइल मॉरिस के अनुसार, यह परीक्षण दिखाता है कि चीन अपनी नौसेना की ताकत बढ़ा रहा है और अब वह चीनी जलक्षेत्र के करीब से ही अमेरिकी महाद्वीप को निशाना बनाने में सक्षम है।
इससे यह साफ हो जाता है कि अब चीन सिर्फ जमीन से मार करने वाली मिसाइलों पर निर्भर नहीं है। गौरतलब है कि पेंटागन के अनुमान के मुताबिक, चीन के पास इस समय करीब 600 परमाणु वारहेड हैं और 2030 तक यह आंकड़ा 1,000 को पार कर सकता है।
प्रशांत क्षेत्र में तेज हुई रणनीतिक होड़
यह मिसाइल टेस्ट ऐसे समय में हुआ है जब ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सोलोमन द्वीप, फिजी और वानुअतु जैसे देशों के साथ रक्षा समझौतों पर काम कर रहा है। हालांकि चीनी अधिकारियों का दावा है कि उनका यह टेस्ट अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में था और किसी देश के खिलाफ नहीं था, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी प्रशांत महासागर को वाशिंगटन और बीजिंग के बीच भविष्य की रणनीतिक होड़ के सबसे बड़े अखाड़े के रूप में देख रहे हैं।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




