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‘इसे पलट कर दिखाओ’: अमेरिका को हराने के बाद बेल्जियम ने कसा तंज़, ट्रंप के ‘क़दम’ पर की ये टिप्पणी

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Source :- BBC INDIA

6 जुलाई, 2026 को सिएटल, वॉशिंगटन के सिएटल स्टेडियम में अमेरिका और बेल्जियम के बीच  वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ़ 16 मैच के दौरान, अमेरिका के एलेक्स फ्रीमैन (दाएं) और बेल्जियम के निकोलस रास्किन बॉल के लिए मुकाबला करते हुए.

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बेल्जियम के मिडफ़ील्डर निकोलस रास्किन ने कहा है कि अमेरिका के स्ट्राइकर फ़ोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच के प्रतिबंध को फ़ीफ़ा द्वारा निलंबित किए जाने से उनकी टीम को “अन्याय का एहसास” हुआ था.

25 वर्षीय बालोगुन को बोस्निया-हर्ज़ेगोविना के डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच पर फ़ाउल करने के कारण रेड कार्ड दिखाया गया था. इसके बाद लगभग तय माना जा रहा था कि वह सिएटल में होने वाले बेल्जियम के ख़िलाफ़ मैच में वो नहीं खेल पाएंगे.

लेकिन रविवार को फ़ीफ़ा ने उनके एक मैच के स्वत: लागू होने वाले प्रतिबंध को 12 महीनों के लिए निलंबित कर दिया.

इस फ़ैसले की व्यापक आलोचना हुई. यूईएफ़ए, बेल्जियम और इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस टुखेल समेत कई लोगों ने इस फ़ैसले पर आपत्ति जताई.

सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फ़ीफ़ा से बालोगुन के प्रतिबंध की समीक्षा करने को कहा था. उनके अनुसार, अगर यह प्रतिबंध लागू रहता तो इससे टूर्नामेंट पर “बड़ा दाग़” लगता.

हालांकि अमेरिकी स्टार स्ट्राइकर को खेलने की अनुमति मिल गई और उन्होंने मैच की शुरुआत भी की, लेकिन बेल्जियम ने टूर्नामेंट के सह-मेज़बान अमेरिका को 4-1 से आसानी से हरा दिया.

‘अन्याय का एहसास’

अमेरिका और बेल्जियम के बीच फ़ुटबॉल मैच के दौरान बेल्जियम के अमादौ ओनाना

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बेल्जियम के मिडफ़ील्डर रास्किन ने कहा, “पिछले दो दिनों में मैदान के बाहर बहुत कुछ हुआ. टीम के भीतर अन्याय का एहसास था और हमने मैदान पर उसका जवाब देने का संकल्प लिया था.”

बेल्जियम के कप्तान यूरी टिलेमांस ने भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनकी टीम को और प्रेरणा मिली.

उन्होंने कहा, “हमने आपस में कहा था कि हमें मैदान पर जवाब देना है. और हमने वही किया.”

बेल्जियम के चौथा गोल करने के बाद उनकी टीम के कई खिलाड़ियों को ‘ट्रंप डांस’ जैसी शैली में नाचते हुए देखा गया. इस डांस में ट्रंप अपने कूल्हों को हिलाते हैं और धीरे-धीरे अपने हाथों को आगे-पीछे करते हैं.

यह अंदाज़ 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान काफ़ी चर्चित हुआ था.

‘इसे पलट कर दिखाओ’

बेल्जियम के रोमेलु लुकाकू अमेरिका के ख़िलाफ़ गोल करने के बाद जश्न मनाते हुए.

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बेल्जियम की राष्ट्रीय टीम के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट भी इस विवाद पर तंज़ कसता हुआ दिखाई दिया. अकाउंट पर स्ट्राइकर रोमेलू लुकाकू के कान पर हाथ रखे हुए एक तस्वीर साझा की गई, जिसके कैप्शन में लिखा था, “इसे पलट कर दिखाओ.”

बेल्जियम के मुख्य कोच रूडी गार्सिया ने पत्रकारों से कहा कि मैच के बाद बालोगुन उनसे “बात करने आए थे.”

उन्होंने कहा, “मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी. इसमें उनकी कोई ग़लती नहीं है. इसके लिए उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता और मैंने उनसे यही कहा.”

जब गार्सिया से पूछा गया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनकी टीम पर क्या असर पड़ा, तो उन्होंने कहा, “अमेरिका की शुरुआती टीम चाहे जो भी हो, हमारे लिए सबसे ज़्यादा अहम हमारी मैच योजना थी.”

उन्होंने कहा, “यह टीम बहुत परिपक्व है. मैंने खिलाड़ियों से कहा कि सबसे ज़्यादा मायने हम ख़ुद रखते हैं.”

ईरान ने भी अमेरिका और बालोगुन से जुड़े घटनाक्रम पर तंज़ कसा है. उसने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बेल्जियम के साथ अपने ड्रॉ और अमेरिका की बड़ी हार का स्क्रीनशॉट साझा किया.

इसके साथ संदेश लिखा गया, “अब पूरी दुनिया फ़ुटबॉल पर राजनीति की अपमानजनक हार पर नाच रही है.”

अमेरिका के गृह सुरक्षा प्रमुख मार्कवेन मुलिन ने इससे पहले कहा था कि जब ईरान ग्रुप चरण से बाहर हुआ तो उन्होंने “ख़ुशी से डांस ” किया था. ईरान की विश्व कप में भागीदारी भी अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वीज़ा और यात्रा संबंधी समस्याओं से प्रभावित रही थी.

ट्रंप ने कहा था- ‘सही फ़ैसला हुआ’

वाशिंगटन में 5 दिसंबर, 2025 को फीफा विश्व कप 2026 के आधिकारिक ड्रॉ के दौरान फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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रविवार को ट्रंप ने कहा कि फ़ीफ़ा ने “सही फ़ैसला” किया है. उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध लागू रहता तो इससे टूर्नामेंट पर “बड़ा दाग़” लगता.

सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फ़ीफ़ा से इस फ़ैसले की समीक्षा करने को कहा था क्योंकि उन्हें “नहीं लगता था कि वह फ़ाउल था.”

उन्होंने पुष्टि की कि उनकी फ़ीफ़ा अध्यक्ष जियानी इन्फ़ैन्टिनो से बात हुई थी, लेकिन ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सिर्फ़ समीक्षा का अनुरोध किया था. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इन्फ़ैन्टिनो से यह नहीं कहा था कि उन्हें बालोगुन का प्रतिबंध निलंबित करना चाहिए.

ट्रंप ने कहा, “मेरा मानना है कि यह प्रतिबंध टूर्नामेंट पर बड़ा दाग़ लगा देता. मैं उन्हें यह नहीं बता सकता कि उन्हें क्या करना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि फ़ैसला उन्होंने किया. मेरा मानना है कि यह फ़ैसला आयोग ने किया था. और यह सही फ़ैसला था.”

मैच से पहले रॉयल बेल्जियन फ़ुटबॉल एसोसिएशन (आरबीएफ़ए) ने कहा था कि बालोगुन का प्रतिबंध निलंबित किए जाने के फ़ैसले पर वह “हैरान” हैं.

आरबीएफ़ए ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील भी की थी, लेकिन फ़ीफ़ा की एक समिति ने कहा कि बेल्जियम इस मामले में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित पक्ष नहीं है क्योंकि मूल फ़ैसले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और वह सिर्फ़ अमेरिका का अगला प्रतिद्वंद्वी था.

इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस टुखेल ने कहा कि यह फ़ैसला एक ख़तरनाक मिसाल कायम करता है. वहीं यूईएफ़ए ने कहा कि किसी टूर्नामेंट के दौरान किसी खिलाड़ी का प्रतिबंध प्रभावी रूप से ख़त्म करने के लिए हस्तक्षेप करना लक्ष्मण रेखा पार करने जैसा है.

इंग्लैंड के डिफेंडर जारेल क्वान्सा को प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में मेक्सिको पर 3-2 की रोमांचक जीत के दौरान रेड कार्ड दिखाया गया था.

टुखेल ने कहा, “रेखा कहाँ खींची जाए, यही सवाल मैं पूछ रहा हूँ. मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है.”

विश्व कप के इतिहास में अब तक दिखाए गए 189 रेड कार्डों में सिर्फ़ एक बार ऐसा हुआ है कि किसी खिलाड़ी को प्रतिबंध से छूट मिली हो.

यह 1962 में ब्राज़ील के गैरिंचा के साथ हुआ था. तब स्वत: लागू होने वाले प्रतिबंध का नियम नहीं था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS