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ईरान डील की वजह से अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में दरार, वेंस ने यहूदी देश को लताड़ा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील से सबसे बड़ा झटका इजरायल को लगा है। इस डील की वजह से कंधे से कंधा मिलाकर साथ लड़ने वाले दोनों देश अब एक-दूसरे पर कटाक्ष करते नजर आ रहे हैं। वेंस ने गुरुवार को इजरायली नेताओं की आलोचना की।

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई जंग अब थम चुकी है। लेकिन इजरायल इस डील को लेकर खुले तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस डील की सार्वजनिक आलोचना नहीं की है, लेकिन उनके कुछ साथी इस पर मुखर रहे हैं। अब इन्हीं हमलों का जवाब अमेरिकी उप राष्ट्रपति जे डी वेंस ने दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल को वास्तविकता को देखना चाहिए। वर्तमान में दुनिया में ऐसे बहुत कम देश हैं जो इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं और अमेरिका उनमें से एक है।

वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने इजरायल के उन नेताओं को भी लताड़ लगाई, जो अमेरिका और ईरान की डील की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इजरायल की समस्या डोनाल्ड ट्रंप नहीं है। अगर वहां किसी को ऐसा लगता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति इजरायल की समस्या है, तो उसे जागना चाहिए और वास्तविकता को समझना चाहिए।”

इजरायली रक्षा मंत्री को लिया निशाना पर

हालांकि, वेंस ने कहा कि नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आलोचना नहीं की है लेकिन इजरायली कैबिनेट के कुछ लोगों ने अमेरिका की अमेरिका की आलोचना की है। दरअसल, वेंस का इशारा इजरायल के रक्षा मंत्री को लेकर था, जिन्होंने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि ईरान के साथ डील अमेरिका की डील है। इजरायल इसमें बाध्य नहीं है। वह किसी भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

अमेरिका ईरान पीस डील से इजरायल नाराज

बता दें, अमेरिकी उप राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान के साथ शांति समझौते की वजह से अमेरिका और इजरायल के रिश्ते खटास में पड़ गए हैं। इस बयान से यह दरार और भी ज्यादा गहरी हो गई है। दरअसल, यह पूरा मामला 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा एक साथ ईरान पर किए गए हमले को लेकर है। उस समय पर दोनों देशों ने सोचा था कि कुछ ही समय में ईरान घुटने टेक देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अमेरिका को लंबे युद्ध में ले जाने के खिलाफ रहे डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध को जल्दी से जल्दी खत्म करना चाहते थे। लेकिन इजरायल का मानना था कि उन्हें ईरान पर हमला करते रहना चाहिए। 8 अप्रैल को जब अस्थाई सीजफायर का ऐलान किया गया उस वक्त भी नेतन्याहू ने इसकी आलोचना की थी। यहीं से दोनों पक्षों के बीच में विवाद शुरू हो गया। जब ईरान और अमेरिका के बीच में डील हुई, तो इजरायल में इसे लेकर व्यापक विरोध देखा गया। इजरायल के रक्षा मंत्री भी इस डील की आलोचना करते हुए कह चुके हैं कि इजरायल लेबनान में अपने अभियान को जारी रखेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN