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ईरान: मोजतबा ख़ामेनेई क्या अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे, जानिए क्या है करबला से तेहरान तक तैयारी

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Source :- BBC INDIA

काले रंग की पगड़ी और भूरे रंग का चोगा पहने मोजतबा खामेनेई कैमरे से नज़रें फेरे हुए हैं

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ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के मारे जाने के चार महीने से अधिक समय बाद उनकी श्रद्धांजलि सभा शनिवार, चार जुलाई से तेहरान में शुरू हो रही है,

ईरानी अधिकारी इसे “सदी का अंतिम संस्कार” बता रहे हैं. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 1.2 करोड़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है.

तैयारियों का स्तर ईरान में किसी भी सरकारी समारोह की तुलना में अभूतपूर्व बताया जा रहा है.

इन तैयारियों की अगुवाई तेहरान स्थित मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर कर रहा है. यह इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड कोर की प्रमुख प्रांतीय इकाई है.

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तेहरान पहुँचने वाले राजनीतिक, धार्मिक और सुरक्षा से जुड़े नेताओं की सूची सबसे ज़्यादा नज़र में रहने वाले पहलुओं में से एक होगी.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जो लोग समारोह में शामिल नहीं होंगे, उनकी अनुपस्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितनी लोगों की मौजूदगी.

अधिकारियों के अनुसार, दर्जनों देशों से सार्वजनिक हस्तियां इसमें शामिल होंगी, जिनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद अध्यक्ष और मंत्री शामिल हैं.

करीब 800 विदेशी पत्रकार इस कार्यक्रम की कवरेज करेंगे.

ईरानी अधिकारियों ने अंतिम संस्कार का नारा “वी मस्ट राइज़” रखा है, जिसके साथ मुट्ठी भींचे हुए हाथ का प्रतीक जोड़ा गया है.

छह दिनों तक चलने वाले समारोह शनिवार सुबह छह बजे स्थानीय समयानुसार तेहरान के इमाम ख़ुमैनी मुसल्ला से शुरू होंगे.

लोग रविवार दोपहर तक श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे.

क्या है तैयारी

मोजतबा ख़ामेनेई की तस्वीर लिए हुए एक महिला

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हसन हसानज़ादेह ने कहा कि ख़ामेनेई का ताबूत एक ऊंचे मंच पर रखा जाएगा. भीड़ प्रबंधन इस तरह से किया गया है कि लोग 15-20 मिनट के भीतर अंदर जाकर बाहर निकल सकें.

वहां एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु जमकारान मस्जिद में जनाज़े की नमाज़ पढ़ाएंगे, जो शिया समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है.

बुधवार को ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर नजफ़ ले जाया जाएगा.

वहां शिया इस्लाम के पहले इमाम इमाम अली की दरगाह पर जुलूस निकाला जाएगा.

इसके बाद श्रद्धांजलि समारोह करबला में जारी रहेगा, फिर पार्थिव शरीर वापस ईरान लाया जाएगा.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इराक़ में होने वाले कार्यक्रम वहाँ के विभिन्न समूहों के अनुरोध पर आयोजित किए जा रहे हैं.

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह शिया मुस्लिम दुनिया में अली ख़ामेनेई के प्रभाव और पूरे क्षेत्र में ईरान के धार्मिक और राजनीतिक संबंधों को रेखांकित करता है.

व्यवस्थाओं के समन्वय के लिए बग़दाद पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अंतिम संस्कार के “प्रतीकात्मक महत्व” पर ज़ोर दिया.

गुरुवार को ख़ामेनेई को उनके जन्मस्थान मशाहद में दफ़नाया जाएगा.

उनका अंतिम संस्कार इमाम रज़ा श्राइन में होगा, जो शिया इस्लाम के आठवें इमाम का मकबरा है और ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है.

हर साल यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं.

इसके बाद पूरे देश में 40 दिनों तक शोक समारोह जारी रहेंगे. श्रद्धांजलि कार्यक्रम उनकी दफन प्रक्रिया की पहली बरसी तक आयोजित किए जाएंगे.

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मोजतबा को लेकर संदेह

ख़ामेनेई का अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है, जब इस्लामी गणराज्य गंभीर राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है.

विश्लेषकों का कहना है कि वैचारिक राजनीतिक व्यवस्थाओं में नेताओं के अंतिम संस्कार सिर्फ़ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक महत्व भी रखते हैं.

कुछ लोगों का मानना है कि ये समारोह ईरानी राज्य के लिए एकता का प्रदर्शन करने और अपनी राजनीतिक कथा को मज़बूत करने का अवसर बन सकते हैं.

यह खामेनेई के बाद की सत्ता व्यवस्था को स्थिर करने और उनके बेटे के साथ उत्तराधिकारी मोजतबा के समर्थन को मज़बूत करने में प्रतीकात्मक भूमिका निभा सकता है.

हालांकि अन्य विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों का जमा होना भी गहरे राजनीतिक और सामाजिक विभाजनों को ख़त्म नहीं कर सकता.

व्यापक तैयारियों के बावजूद कई अहम सवाल अब भी बने हुए हैं.

इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मोजतबा और उनके भाई-बहन अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे.

28 फ़रवरी 2026 के हमले में परिवार के कई सदस्यों, जिनमें मोजतबा की पत्नी भी शामिल थीं, के मारे जाने की ख़बरों के बाद से उनकी सेहत को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है.

30 जून, मंगलवार को आयोजन समिति के सचिव अली अकबर पौरजमशिदिआन ने कहा कि मोजतबा की मौजूदगी पर कोई भी फ़ैसला सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर और सर्वोच्च नेता के कार्यालय की ओर से घोषित किया जाएगा.

एक और बड़ा सवाल यह है कि जनाज़े की नमाज़ कौन पढ़ाएगा.

शिया परंपरा में यह भूमिका धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है.

कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर मोजतबा सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो इसे ईरान के भविष्य के नेतृत्व को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जाएगा.

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इसी साल फ़रवरी महीने में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत में एक हवाई हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई मारे गए थे.

अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के मारे जाने के बाद उनके बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया था.

ईरान के सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा को अभी तक सार्वजनिक रूप से देखा नहीं गया है. यह भी पता नहीं है कि वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं.

अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई है.

अपने पिता के उलट, 56 वर्षीय मोजतबा ने एक गुमनाम जीवन व्यतीत किया है. उन्होंने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला, न ही सार्वजनिक भाषण दिए हैं और न ही इंटरव्यू दिए हैं.

उनकी कुछ ही तस्वीरें और वीडियो भले प्रकाशित हुए हैं.

लेकिन सालों से ऐसी अफ़वाहें थीं कि ईरान में पर्दे के पीछे उनका काफ़ी प्रभाव था.

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, विकीलीक्स ने 2000 के दशक के अंत में अमेरिकी राजनयिक केबल को प्रकाशित किया था, जिसमें उन्हें पर्दे के पीछे की शक्ति के रूप में बताया गया था. उन्हें शासन के भीतर एक “सक्षम और प्रभावशाली” व्यक्ति के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता था.

एक ईरानी व्यक्ति, जिसने काला सूट जैकेट और सफे़द शर्ट पहनी हुई है, 11 फ़रवरी 2026 को तेहरान में इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लेते हुए मोजतबा ख़ामेनेई की तस्वीर लिए हुए

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मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

आठ सितंबर 1969 को उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में जन्मे मोजतबा, अली ख़ामेनेई के छह बच्चों में दूसरे नंबर के हैं. उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा तेहरान के धार्मिक अलावी स्कूल से हासिल की.

ईरानी मीडिया के अनुसार, 17 वर्ष की उम्र में मोजतबा ने ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान कई बार थोड़े-थोड़े समय के लिए सेना में सेवा दी. आठ साल के इस ख़ूनी संघर्ष ने इस्लामी शासन को अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रति और भी अधिक संदेहपूर्ण बना दिया. पश्चिमी देशों ने इराक़ का समर्थन किया था.

1999 में मोजतबा अपनी धार्मिक पढ़ाई जारी रखने के लिए क़ोम गए, जो एक पवित्र शहर है और शिया धर्मशास्त्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.

उन्होंने इस समय तक धार्मिक वस्त्र नहीं पहने थे और यह स्पष्ट नहीं है कि 30 वर्ष की उम्र में मदरसे में जाने का फ़ैसला क्यों लिया, क्योंकि आमतौर पर ऐसा कम उम्र में ही किया जाता है.

काले रंग की पगड़ी और चश्मा पहने हुए मोजतबा खामेनेई 2024 में तेहरान में हिजबुल्लाह के कार्यालय के दौरे के दौरान

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राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप

मोजतबा का नाम पहली बार 2005 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सार्वजनिक सुर्खियों में आया, जिसके परिणामस्वरूप एक लोकलुभावन कट्टरपंथी महमूद अहमदीनेजाद की जीत हुई.

खामेनेई को लिखे एक खुले पत्र में, सुधारवादी उम्मीदवार मेहदी करौबी ने मोजतबा पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और बासिज मिलिशिया के माध्यम से चुनाव में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था.

आरोप था कि अहमदीनेजाद को जीतने में मदद करने के लिए धार्मिक समूहों को पैसा वितरित किया गया था.

चार साल बाद, मोजतबा को फिर से उसी आरोप का सामना करना पड़ा. अहमदीनेजाद के दोबारा चुने जाने पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें ग्रीन मूवमेंट के नाम से जाना जाता है.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस विचार का विरोध करते हुए नारे लगाए कि मोजतबा ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में अपने पिता का उत्तराधिकारी बन सकते हैं.

2009 के विरोध प्रदर्शन के दौरान इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग आंसू गैस के प्रभाव को कम करने के लिए एक-दूसरे की आंखों में धुआं फूंक रहे थे

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ईरान के तत्कालीन उप गृह मंत्री मुस्तफ़ा ताजज़ादेह ने चुनाव परिणाम को “चुनावी तख्तापलट” क़रार दिया. उन्हें सात साल की जेल हुई और इसके लिए मोजतबा को ज़िम्मेदार ठहराया था.

2009 के चुनाव के बाद दो सुधारवादी उम्मीदवारों, मीर-हुसैन मूसावी और मेहदी कारौबी को नज़रबंद कर दिया गया था. ईरानी सूत्रों ने बीबीसी न्यूज़ पर्शियन को बताया था कि फ़रवरी 2012 में मोजतबा ने मूसावी से मुलाक़ात की और उनसे अपना विरोध प्रदर्शन छोड़ने का आग्रह किया.

अब, ईरान के नए सर्वोच्च नेता के रूप में, कई लोगों को उम्मीद है कि मोजतबा अपने पिता की कठोर नीतियों को जारी रखेंगे.

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि जिस व्यक्ति ने अमेरिकी-इसराइली हमलों में अपने पिता, अपनी मां और अपनी पत्नी को खो दिया है, उसके पश्चिमी दबाव के आगे झुकने की संभावना कम है.

लेकिन उनके सामने इस्लामी रिपब्लिक के अस्तित्व को सुनिश्चित करने और जनता को यह विश्वास दिलाने का मुश्किल काम भी है कि वह देश को राजनीतिक और आर्थिक तबाही से बाहर निकालने के लिए सही व्यक्ति हैं.

उनके नेतृत्व का रिकॉर्ड अभी तक पूरी तरह से परखा नहीं गया है और यह धारणा कि गणतंत्र एक वंशानुगत प्रणाली में बदल रहा है, जनता के असंतोष को और गहरा कर सकती है.

मोजतबा अब निशाने पर हैं क्योंकि इसराइल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि अगला सर्वोच्च नेता “नष्ट करने के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य” होगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS