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उज्जैन में 650 साल पुरानी शाही मस्जिद के बाहर झड़प, सड़क चौड़ीकरण पर क्या है विवाद?

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Source :- BBC INDIA

सोमवार सुबह मस्जिद के पास तनाव हो गया था

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण के बीच उज्जैन की करीब 650 साल पुरानी बताई जा रही शाही मस्जिद को लेकर सोमवार सुबह 10 बजे के करीब विवाद बढ़ गया.

रविवार रात से ही छतरी चौक इलाके में बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के पास जमा हुए और सोमवार सुबह भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जो कुछ ही देर में हिंसक हो गई.

झड़प के दौरान पथराव और मारपीट की स्थिति बन गई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. फ़िलहाल शाही मस्जिद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है.

इस मामले पर बात करते हुए उज्जैन के कलेक्टर रौशन सिंह ने कहा, “सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए मास्टर प्लान के मुताबिक सड़कों के चौड़ीकरण और दूसरे निर्माण कार्य चल रहे हैं. सभी धर्म और समुदाय के लोग अपनी इच्छा से इसमें सहयोग कर रहे हैं.”

“कई लोग सड़क की जद में आ रहे अपने मकान या धार्मिक स्थल खुद हटा रहे हैं. छतरी चौक में सड़क की जद में आ रहा शाही मस्जिद का हिस्सा भी मुस्लिम समाज के लोग स्वयं हटा रहे हैं. मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी अफवाह में न आएं और शांति व्यवस्था बनाए रखने में शासन का सहयोग करें.”

बीबीसी से बात करते हुए उज्जैन के शहर क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने बताया, “मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच रविवार रात हुई बातचीत के बाद कमेटी ने उस हिस्से को खुद हटाने का फैसला किया है. कुछ लोग अफवाहों के चलते आक्रोशित हो गए थे और थोड़ी झड़प भी हुई, लेकिन अभी स्थिति सामान्य है. हम सभी से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहे हैं.”

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ के जवानों को भी मौके पर तैनात किया गया है. वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं.

मस्जिद का जो हिस्सा हटाया जाना है, वह उस सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट में आ रहा है जिसे उज्जैन नगर निगम 15 मीटर तक चौड़ा करना चाहता है.

प्रशासन इसे सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए जरूरी बता रहा है.

सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद

उज्जैन में बुलडोज़र एक्शन

उज्जैन नगर निगम के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण का काम उज्जैन विकास योजना 2035 के तहत किया जा रहा है.

नगर निगम का कहना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे और शहर में यातायात और लोगों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए सड़कों को चौड़ा करना जरूरी है.

शाही मस्जिद भी सड़क के उसी हिस्से में मौजूद है, जिसे 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना है. मस्जिद का एक हिस्सा इस प्रस्तावित सड़क की जद में आ रहा है.

उज्जैन के शहर क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सिंहस्थ का विरोध नहीं करता.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “सिंहस्थ पहले भी हुआ था आगे भी होगा. मुस्लिम समुदाय हमेशा उसका पक्षधर रहा है. हम बस ये कह रहे हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था तलाशी जाए और किसी भी धार्मिक स्थल को न तोड़ा जाए. क्योंकि इनमें से कई तो हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स हैं. अब शाही मस्जिद को ही ले लीजिए, यह लगभग 650 साल पुरानी है.”

मस्जिद कमेटी का कहना था कि पहले भी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण हुआ है, लेकिन धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए अलग व्यवस्था की गई थी.

रविवार रात मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद कमेटी ने सड़क की जद में आ रहे हिस्से को खुद हटाने पर सहमति जताई.

हाई कोर्ट ने पहले ख़ारिज की थी याचिका

मस्जिद

इस विवाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 सितंबर के अपने आदेश में शाही मस्जिद के उस हिस्से को हटाने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं ख़ारिज कर दी थीं.

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई से मस्जिद के प्रार्थना स्थल का एक हिस्सा, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही प्रभावित होगा.

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत अपने अधिकारों का हवाला देते हुए याचिका दायर की थी.

जस्टिस संदीप एन भट्ट की पीठ ने कहा था कि नगर निगम ने तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया और प्रभावित पक्षों को अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया.

मस्जिद पक्ष की यह दलील भी थी कि धार्मिक स्थल होने की वजह से एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.

कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया था.

अदालत के सामने रखे गए रिकॉर्ड के मुताबिक़, इसी सड़क पर दस मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से पहले हटाए जा चुके हैं.

कोर्ट के आदेश में उज्जैन में करीब 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माण पर कारवाई का भी उल्लेख है.

अदालत ने कहा था कि सिर्फ इसलिए कि संबंधित संपत्ति धार्मिक स्थल है, नगर निगम की कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता.

सिंहस्थ की तैयारियों के बीच हुआ विवाद

उज्जैन

अदालत ने अपने आदेश में सिंहस्थ 2028 के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और यातायात प्रबंधन की जरूरत का भी उल्लेख किया.

शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के पास स्थित है.

अदालत ने कहा था कि सिंहस्थ के दौरान इस इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होगी और सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है.

9 सितंबर के फैसले के बाद मस्जिद कमेटी ने हाई कोर्ट की बड़ी बेंच के सामने मामला उठाया है.

सोमवार को होने वाली सुनवाई में कमेटी की ओर से कार्रवाई पर रोक लगाने और मस्जिद के हिस्से को बचाने की मांग किए जाने की बात कही गई है.

मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों ने कहा था कि अगर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.

मस्जिद कमेटी और शहर क़ाज़ी इसे करीब 650 साल पुरानी बताते हैं. शहर क़ाज़ी के मुताबिक, इसका निर्माण करीब 1390 में हुआ था.

नगर निगम ने अदालत में कहा था कि कारवाई केवल शाही मस्जिद के खिलाफ नहीं है और सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में दूसरे धार्मिक स्थलों के हिस्से भी हटाए गए हैं.

फ़िलहाल छतरी चौक और शाही मस्जिद के आसपास पुलिस बल तैनात है. मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद तय व्यवस्था के तहत कमेटी प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की कारवाई कर रही है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS