Source :- LIVE HINDUSTAN
साओ पाउलो की एवेनिडा पॉलिस्टा पर समर्थकों की भारी भीड़ के सामने लूला ने खुलकर उनकी तारीफ की और उन्हें ‘जनरल जानोनेस’ की उपाधि दी। भीड़ ने भी जवाब में नारे लगाए- जनरल जानोनेस, देश का सिपाही!
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव की ऐतिहासिक रात जब लूला दा सिल्वा अपनी जीत का जश्न मना रहे थे, तो मंच पर वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के बीच एक नया चेहरा हर किसी का ध्यान खींच रहा था। बड़ी सी मुस्कान और ब्राजील फुटबॉल टीम की पीली जर्सी पहने यह शख्स कोई पुराना नेता नहीं, बल्कि आंद्रे जानोनेस (André Janones) थे। कभी बस में टिकट कंडक्टर का काम करने वाले 42 साल के जानोनेस ने महज तीन हफ्तों के भीतर व्हाट्सएप के जरिए 1.1 करोड़ लोगों की एक ऐसी ‘डिजिटल फौज’ तैयार की, जिसने सोशल मीडिया के एल्गोरिदम को हिलाकर रख दिया और लूला की सत्ता में जोरदार वापसी कराई।
साओ पाउलो की एवेनिडा पॉलिस्टा पर समर्थकों की भारी भीड़ के सामने लूला ने खुलकर उनकी तारीफ की और उन्हें ‘जनरल जानोनेस’ की उपाधि दी। भीड़ ने भी जवाब में नारे लगाए- “जनरल जानोनेस, देश का सिपाही!”
पहले दौर की हार से ऐतिहासिक जीत तक का सफर
पहले चरण के मतदान में लूला अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लैवियो बोल्सोनारो से लगभग 22 लाख वोटों से पिछड़ गए थे। ब्राजील के इतिहास में आज तक कोई प्रत्याशी पहले दौर में पिछड़ने के बाद वापसी नहीं कर सका था। लेकिन दूसरे दौर में बाजी पूरी तरह पलट गई।
लूला ने 4.4 मिलियन (44 लाख) से ज्यादा वोटों के अंतर से बोल्सोनारो को मात दी।
पहले चरण में वामपंथी खेमे की सबसे बड़ी कमजोरी युवाओं और सोशल मीडिया से उनका कटाव था। जानोनेस ने तीन हफ्तों में इस कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना दिया।
लूला ने मंच से कहा, “रूस, चीन या अमेरिका के पास भी लोकतंत्र की रक्षा करने वाली ऐसी डिजिटल सेना नहीं होगी। अब मैं मीडिया के चश्मे से नहीं, बल्कि सीधे जानोनेस की आर्मी के जरिए जनता से संवाद करूंगा।”
कैसे काम करती थी ‘जनरल जानोनेस’ की यह डिजिटल आर्मी?
आंद्रे जानोनेस की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने दक्षिणपंथियों के ही प्रतीकों और उनकी आक्रामक भाषा को हथियार बनाया। पीली जर्सी, जिसे वर्षों से दक्षिणपंथी अपना यूनिफॉर्म मानते थे, उसे लूला समर्थकों ने अपना लिया।
व्हाट्सएप चैनल के जरिए 1.1 करोड़ ‘सिपाहियों’ को रोज सुबह, दोपहर और रात में सख्त “मिशन” दिए जाते थे।
समर्थकों को निर्देश दिए जाते थे कि शनिवार सुबह ठीक 9 बजे एक साथ पीली जर्सी पहनकर ‘L’ का सिंबल बनाते हुए फोटो पोस्ट करें- “न एक मिनट पहले, न एक मिनट बाद!” इससे एल्गोरिदम को लगता था कि कोई असाधारण घटना हो रही है और पोस्ट ट्रेंड कर जाती थी।
एक सख्त नियम यह था कि विरोधी खेमे के पोस्ट पर कोई कमेंट या बहस नहीं करनी है, ताकि उनकी रीच न बढ़े।
जब बोल्सोनारो टीवी इंटरव्यू दे रहे थे, तो पूरे देश में एक ही समय पर बर्तन बजाकर विरोध प्रदर्शन कराने का टास्क दिया गया था।
कंडक्टर से ‘स्मार्टफोन वाले राष्ट्रपति’ के गुरु बनने तक
मिनस गेरैस के एक छोटे शहर में जन्मे जानोनेस की मां घरेलू सहायिका थीं। उन्होंने बस में कंडक्टर का काम करते हुए कानून की पढ़ाई पूरी की। 2018 में ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के दौरान सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता रातों-रात बढ़ गई थी।
हालांकि, शुरुआत में लूला की आधिकारिक प्रचार टीम उन पर भरोसा नहीं कर रही थी। लेकिन जब उन्होंने बिना फेक न्यूज फैलाए सोशल मीडिया पर हवा का रुख मोड़ा, तो खुद लूला देर रात तक उनके साथ लाइव स्ट्रीमिंग करने लगे।
यह अलग बात है कि खुद जानोनेस अपने संसदीय चुनाव में वोट नहीं जुटा सके। उन पर स्टाफ की सैलरी से कमीशन लेने के पुराने आरोप भी हैं। चुनावी नतीजों के बाद अब लूला के लिए वे सबसे भरोसेमंद योद्धा बन गए हैं। पहली बार स्मार्टफोन चलाना सीख रहे राष्ट्रपति लूला के पास अब फास्ट डायल पर एक ही नंबर है- ‘डिजिटल जनरल’ का।
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