Source :- LIVE HINDUSTAN
पेरिस के पास सेंट-डेनिस के 53 साल के मेयर बैली बगायोको अब पूरे फ्रांस में चल रहे युवा विरोध का मुख्य चेहरा बन गए हैं। एक वीडियो वायरल होने के बाद उनकी चर्चा हर जगह हो रही है।
6 अक्टूबर 2026 की दोपहर पेरिस की सड़कों पर तनाव चरम पर था। स्टूडेंट्स का एक बड़ा समूह प्रदर्शन कर रहा था। अचानक दंगा पुलिस आगे बढ़ी। उसी समय सेंट-डेनिस (पियरेफिट-सुर-सीन) के 53 साल के मेयर बैली बगायोको भीड़ में खड़े थे। उन्होंने न तो अपना आधिकारिक मेयर वाला तीन रंग का सैश पहना था, न ही कोई खास सुरक्षा। उनके शरीर पर सिर्फ एक शार्प ग्रे सूट और हल्के बैंगनी रंग की टाई थी। जब पुलिस और युवा प्रदर्शनकारियों के बीच दूरी कम होने लगी, तो बगायोको अचानक आगे बढ़े। उन्होंने अपनी दोनों बाहें पूरी तरह फैला दीं और जोर से चिल्लाए- रुको! कुछ ही सेकंड बाद पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले उन पर गिर पड़े। जो कैमरे में कैद हो गया।
बताया जाता है कि यह वीडियो कुछ ही घंटों में TikTok और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। स्टूडेंट्स ने उन्हें ‘ग्रे सूट वाला स्पाइडरमैन’ और ‘असली जिंदगी का सुपरहीरो’ कहना शुरू कर दिया। कई युवाओं ने कहा कि पहली बार किसी चुने हुए अधिकारी ने उनके सामने आकर खुद को खतरे में डाला। वीडियो देखने वालों को यह बात सबसे ज्यादा छू गई कि एक मेयर अपनी जान जोखिम में डालकर नाबालिगों को बचाने की कोशिश कर रहा था।
बता दें कि बागायोको फ्रांस की कट्टर वामपंथी पार्टी ला फ्रांस इनसौमिस (LFI) से जुड़े हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि प्रदर्शन कर रहे टीनएजर्स मेरे अपने बच्चे भी हो सकते हैं। मैं उन्हें पुलिस के सामने अकेला नहीं छोड़ सकता। उन्होंने जानबूझकर अपना आधिकारिक मेयर सैश नहीं पहना। इसके बजाय उन्होंने सूट पहना और फ्रांस का झंडा साथ रखा। उनका कहना था कि काम करने वाले और ज्यादातर प्रवासी समुदाय वाले इलाके भी पूरी तरह फ्रांसीसी हैं। वे खुद को लोगों से अलग कोई अधिकारी नहीं, बल्कि उनके साथ खड़ा इंसान दिखाना चाहते थे।
गौरतलब है कि विरोध की शुरुआत भी उनके ही इलाके से हुई थी। सेंट-डेनिस फ्रांस के सबसे घनी आबादी वाले और अलग-अलग समुदायों वाले क्षेत्रों में से एक है। यहां सरकारी स्कूलों में टीचर्स की भारी कमी, खराब इमारतें और कम बजट की शिकायतें लंबे समय से चल रही थीं। इन्हीं मुद्दों पर स्टूडेंट्स ने हड़ताल शुरू की। बाद में यह विरोध पूरे फ्रांस में फैल गया।
बताया जाता है कि जैसे-जैसे वीडियो वायरल हुआ, बागायोको पूरे देश में युवा विरोध का चेहरा बनते चले गए। लोग उन्हें उन युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए देखने लगे, जो शिक्षा और भविष्य को लेकर परेशान हैं। लेकिन उनकी इस भूमिका की वजह से राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया। राइट विंग के कई नेता और क्षेत्रीय अधिकारी उन पर अशांति फैलाने का आरोप लगाने लगे। कुछ अधिकारियों ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन के दौरान स्कूलों को हुए नुकसान का खर्च वे खुद भरें।
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