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एक सोशल मीडिया पोस्ट और मौत की सजा; कौन है 23 साल की ईरानी छात्रा नजमेह अमीनी?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान की 23 साल की अकाउंटिंग छात्रा नजमेह अमीनी को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। उस पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का आरोप है।

ईरान में एक छात्रा को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। उस पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का आरोप है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा नजमेह अमीनी को पहले जनवरी में देशभर में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था। फरवरी में ईरान की साइबर पुलिस ने उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच के बाद फिर से गिरफ्तार कर लिया। उसके परिवार के करीबी सूत्र के अनुसार, बाद में उन्हें ‘सब उल-नबी’ यानी पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई।

नजमेह अमीनी कौन हैं?

नजमेह अमीनी ईरान की 23 साल की अकाउंटिंग स्टूडेंट है। जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें हिरासत में लिया था। फरवरी में उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। एक अलग मामले में उसे 12 साल, 6 महीने और 1 दिन की जेल की सजा भी सुनाई गई है। इस मामले में उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने और ईरानी सरकार के खिलाफ प्रचार फैलाने का आरोप है।

पिछले महीने जारी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में अमीनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र, वकीलों और मानवाधिकार संगठनों से अपने मामले की जांच करने की अपील की। उसने कहा कि मैं आज खुद को हीरो नहीं बनाना चाहती। मैं बस एक चीज चाहती हूं, अपनी आवाज बनना। अमीनी ने आगे कहा कि मैं एक मासूम लड़की हूं जिसके बहुत सारे सपने और उम्मीदें हैं। मेरे माता-पिता मेरा इंतजार कर रहे हैं। एक परिवार जो हर रात मुझे खोने के डर से अपनी रात को सुबह में बदल देता है।

कोर्ट में क्या हुआ?

जिस सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से उन्हें मौत की सजा मिली, उसका सही कंटेंट सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है। ईरान के इस्लामिक पीनल कोड के आर्टिकल 262 के तहत पैगंबर मुहम्मद या किसी सम्मानित शिया व्यक्ति का अपमान करने पर मौत की सजा हो सकती है। हालांकि आर्टिकल 263 में बिना सोचे-समझे या नशे में दिए गए बयानों के लिए कुछ छूट का प्रावधान है, लेकिन कुछ मामलों में कोड़े जैसी अन्य सजाएं भी दी जा सकती हैं।

ईरानी अखबार खोरासन के अनुसार, अमीनी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दोस्तों के साथ साइकेडेलिक मशरूम लेने के बाद हालूसिनेशन की हालत में बात कही थी। उनके बचाव पक्ष ने कहा कि यह ‘जुबान फिसलने’ की वजह से हुआ था। लेकिन जज ने यह दलील खारिज कर दी। जज ने सवाल उठाया कि अगर वे वहम वाली हालत में थीं, तो उन्होंने अमेरिका और इजरायल समेत अन्य लोगों या ईरानी सरकार के विरोधियों की बेइज्जती क्यों नहीं की।

बता दें कि अमीनी की मौत की सजा अभी अंतिम नहीं है। फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

इस साल 600 से ज्यादा लोगों को मौत की सजा

दूसरी ओर मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ईरान विरोध को दबाने के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। ओस्लो स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, इस साल ईरान में 600 से ज्यादा लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है। संगठन के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट के लिए एक युवा महिला को मौत की सजा देना खतरनाक संकेत है। इससे शांतिपूर्ण बोलने की आजादी पर और सख्ती हो सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी सख्त कदम नहीं उठाएगा, तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN