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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/02/1200x900/2_june_raj_kapooe_1780401308055_1780401313238_976fe51b-9da3-4903-a1ce-0609961ff51f.jpgयह कहानी भारतीय सिनेमा के इतिहास के उस सबसे भावुक और अभूतपूर्व पल की है, जब एक गंभीर रूप से बीमार महानायक अपनी जिंदगी की आखिरी सांसों से लड़ते हुए देश का सर्वोच्च सिनेमा सम्मान लेने पहुंचे थे।
आज हम हिंदी सिनेमा के उस दिग्गज एक्टर की बात करेंगे जिन्होंने भारतीय सिनेमा को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचा दिया था। जिनकी फिल्में रूस, चीन, ईरान, तुर्की, अमेरिका, पूर्वी यूरोप में देखी जाती थीं। जिन्होंने अपनी आखिरी सांस तब सिर्फ सिनेमा के बारे में ही सोचा था और ऑक्सीजन मास्क लगाकर सिनेमा के लिए मंच तक पहुंचे थे।
कौन है ये एक्टर?
हम बात कर रहे हैं राज कपूर की। जब वह 64 साल के थे तब उनकी तबीयत खराब थी। वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया था।
राज कपूर की जिद
राज कपूर अस्थमा की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह से बेड रेस्ट की सलाह दी थी और कहीं भी बाहर जाने के लिए सख्त मना किया था। लेकिन जब बात सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान की हो, तो शोमैन को कोई कैसे रोक सकता था? उन्होंने दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल होने की जिद पकड़ ली।
फिर क्या हुआ?
दिल्ली के विज्ञान भवन में समारोह चल रहा था। तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन मंच पर मौजूद थे। जब राज कपूर का नाम पुकारा गया, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राज कपूर मंच पर जाने के लिए व्हील चेयर से उठने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि वो खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।
तोड़ा था प्रोटोकॉल
वहां मौजूद हर शख्स की सांसें अटक गई थीं। माहौल में एक अजीब सी खामोशी छा गई। हर कोई राज कपूर की ये हालत देख उदास था और तभी राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए, खुद मंच से नीचे उतरने का फैसला किया। वे खुद चलकर नीचे आए और उस राज कपूर की सीट के पास पहुंचे। उन्होंने नीचे झुककर राज कपूर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा।
आखिरी सफर…
ये लम्हा जितना ऐतिहासिक था, उतना ही दर्दनाक भी साबित हुआ। पुरस्कार लेने के तुरंत बाद राज कपूर की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें विज्ञान भवन से सीधे दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल ले जाया गया। वहां वे करीब एक महीने तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ते रहे। आखिरकार, 2 जून 1988 को भारतीय सिनेमा के इस चमकते सितारे ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। बता दें, फिल्मकार राज कपूर का करियर करीब 40 सालों का रहा, लेकिन उन्होंने कामयाबी, शोहरत और लीजेंड जैसी छवि महज तीन सालों के अंदर हासिल कर ली थी।
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