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कर्नाटक में डीके शिवकुमार ने भाजपा के साथ मिलकर 5 सीटों पर क्रॉस वोटिंग से जीत हासिल की

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कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए 18 जून 2026 को हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने पांच सीटों पर विजय प्राप्त की, जबकि भाजपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव में कांग्रेस के लिए पांचवीं सीट के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं था, लेकिन मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की रणनीति के कारण पार्टी ने यह सीट भी अपने नाम की।

**चुनाव परिणाम और कांग्रेस की रणनीति**

चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार थिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी. वी. मोहन, बी. के. हरिप्रसाद, शिवन्ना बी एस, और विनय कार्तिक प्रकाश ने जीत दर्ज की। भा.ज.पा. के लिंगराज पाटिल और रघु आर तथा जद(एस) के गोविंदराजू ने भी अपनी-अपनी सीटें जीतीं। चुनाव में कांग्रेस को पांचवीं सीट के लिए आवश्यक 28 वोटों की संख्या जुटाने में कठिनाई हो रही थी, लेकिन डीके शिवकुमार की रणनीति ने यह संभव किया।

**क्रॉस वोटिंग की भूमिका**

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा से निष्कासित दो विधायकों, एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार, को कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के लिए प्रेरित किया। चुनाव के दिन दोनों विधायक मुख्यमंत्री के साथ पोज देते हुए देखे गए, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना की ओर इशारा मिला। ([ndtv.in](https://ndtv.in/india/karnataka-mlc-elections-bjp-mla-st-somashekhar-shivaram-hebbar-seen-with-cm-dk-shivakumar-11653050?utm_source=openai)) एस.टी. सोमशेखर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के हित में कांग्रेस को वोट दिया। उन्होंने यह भी बताया कि भाजपा और जद(एस) ने उनसे समर्थन नहीं मांगा, जबकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें बैठक के लिए बुलाया।

**विधानसभा में मतदान प्रक्रिया**

मतदान में सभी 222 विधायकों ने अपने वोट डाले। प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 28 वोटों की आवश्यकता थी। चुनाव में कांग्रेस और जद(एस) दोनों ने अपने विधायकों को रिजॉर्ट में ठहराया था, ताकि क्रॉस वोटिंग की संभावना को कम किया जा सके।

**मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया**

चुनाव के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस ने कोई विशेष रणनीति नहीं अपनाई। उन्होंने कहा कि विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने अपने विधायकों से बातचीत की थी और यह सुनिश्चित किया कि पहली बार वोट देने वालों को मतदान प्रणाली के बारे में सही जानकारी दी जाए।

**भा.ज.पा. और जद(एस) की प्रतिक्रिया**

भा.ज.पा. और जद(एस) ने क्रॉस वोटिंग के आरोपों को नकारा किया। भा.ज.पा. के नेताओं ने कहा कि पार्टी के विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया। जद(एस) के नेताओं ने भी क्रॉस वोटिंग के आरोपों को खारिज किया और कहा कि पार्टी के विधायकों ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से मतदान किया।

**निष्कर्ष**

कर्नाटक विधान परिषद के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। क्रॉस वोटिंग की भूमिका ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया, लेकिन अंततः कांग्रेस ने अपनी मेहनत और रणनीति के बल पर पांच सीटों पर विजय प्राप्त की।

यह घटना कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

यह लेख AI-जनित सामग्री है। कृपया इस लेख पर आधारित किसी भी कार्रवाई से पहले जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।