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किशोर कुमार का यह हिट गाना मुसाफिर हूं यारों, बड़ी बुरी हालत में बना था यह सॉन्ग

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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किशोर कुमार ने अपने करियर में कई हिट गाने दिए हैं। उनका एक सक्सेसफुल गाना था मुसाफिर हूं यारों। इस गाने के पीछे की स्टोरी जान आप हैरान हो जाएंगे।

कई बार ऐसे गाने बनते हैं जिनके बनने की स्टोरी काफी शॉकिंग होती है। हमें पता नहीं होता कि कैसे एक गाने को बनाया जाता है। अब हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताते हैं जिसको सुनकर आपको लगेगा नहीं कि यह ऐसी हालात में बनाया गया जब हालात काफी दुख भरे थे।

कैसे बनाया गया मुसाफिर हूं यारों

जिस गाने की हम बात कर रहे हैं वो है मुसाफिर हूं यारो। दरअसल, आर डी बर्मन अपनी लाइफ में कुछ मुश्किलों से गुजर रहे थे। उस दौरान उनके साथ किशोर कुमार और गुलजार भी थे। तीनों किसी गाने को लेकर साथ थे, उन्हें एक गाना बनाना था। हालांकि उस वक्त माहौल काफी निराश था कि कोई किसी से ज्यादा बात नहीं कर रहा था। तभी आर डी बर्मन ने कहा कि चलो बाहर चलते हैं और रास्ते में बात करते हैं।

कैसे गुलजार की एक लाइन ने बनाया सक्सेसफुल गाना

इसके बाद तीनों साथ में ड्राइविंग पर निकले। उस वक्त गुलजार साहब ने ऐसी बाहर देखते हुए कहा कि मुसाफिर हूं यारों, ना घर है ठिकाना। इस लाइन को सुनते ही तुरंत बर्मन दा और किशोर कुमार ने उन्हें देखा और फिर बना एक एतिहासिक गाना।

इन उस्ताद ने बनाया ये हिट गाना

इस गाने के म्यूजिक डायरेक्टर आर डी बर्मन थे, गुलजार साहब ने लिरिक्स लिखे और किशोर कुमार की जादुई आवाज ने इस गाने को इतना जबरदस्त बनाया कि आज भी ट्रैवल करते हुए लोग इस गाने को सुनते हैं।

बता दें कि यह गाना फिल्म परिचय का है। दिलचस्प बात यह है कि गुलजार ने ही इस फिल्म को डायरेक्ट किया है। फिल्म में जितेंद्र, जया भादुरी, प्राण, वीना, ए के हंगल, लीला मिश्रा, केश्तो मुखर्जी, असरानी भी हैं।

आज भी किया जाता है यह गाना पसंद

बता दें कि यह गाना कई साल पुराना है, लेकिन इसके बाद भी आज भी हर उस इंसान को अपनी कहानी लगता है जो जिंदगी के सफर में आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फिल्म राज कुमार मैत्रा के बंगाली उपन्यास ‘रंगीन उत्तरायण’ और हॉलीवुड क्लासिक ‘द साउंड ऑफ म्यूजिक’ से प्रेरित है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी की शुरुआत राय साहब (प्राण) से होती है, जो एक अमीर और सख्त आदमी हैं। उनके बेटे नीलेश उनके खिलाफ जाकर एक गरीब लड़की से शादी कर लेता है। राय साहब फिर उसे घर से निकाल देते हैं। कुछ समय बाद नीलेश और सुजाता की गरीबी में मौत हो जाती है।

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