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कैंसर का खतरा बढ़ाती है आपके रात के खाने की टाइमिंग, डॉक्टर से जानें सही समय

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Source :- LIVE HINDUSTAN

क्या आपको पता है कि रात में आप कितने बजे खाना खाते हैं, भविष्य में होने वाले कैंसर का रिस्क कहीं ना कहीं इससे भी जुड़ा होता है? कैंसर स्पेशलिस्ट ने इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें साझा की हैं, जो आपको जरूर पता होनी चाहिए।

आजकल देर रात डिनर करना एक लाइफस्टाइल बन गया है। भारतीय घरों में रात के 10 या 11 बजे खाना नॉर्मल है। लोग खाते ही बिस्तर पर चले जाते हैं और साल के 365 दिन उनका यही रूटीन रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देर रात खाना कैंसर के रिस्क से भी जुड़ा हो सकता है? एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ ऋषि शर्मा बताते हैं कि आप रात का खाना कितने बजे खाते हैं, ये बात तय करती हैं कि भविष्य में आपको कैंसर का रिस्क होगा या नहीं। एक स्टडी में भी पाया गया कि जो लोग अपना डिनर रात में जल्दी फिनिश कर लेते हैं, उनमें कुछ खास किस्म के कैंसर का खतरा कम होता है। आइए विस्तार में जानते हैं डॉक्टर क्या बताते हैं।

देर रात खाने से शरीर पर क्या होगा है असर?

डॉ ऋषि आसान शब्दों में समझाते हुए बताते हैं कि हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म एक तय शेड्यूल के अनुसार काम करता है। सुबह के समय शरीर की इन्सुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है, जबकि दिन ढलते-ढलते ये कम होना शुरू हो जाती है। इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। जब शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होती है, तो ग्लूकोज को संभालने का तरीका प्रभावित हो सकता है।

रात में खाना खा कर तुरंत सोने से क्या असर होता है?

कैंसर स्पेशलिस्ट कहते हैं कि जब आप रात में खाना खाते हैं और तुरंत सोने चले जाते हैं, तो शरीर को भोजन पचाने और रात के दौरान होने वाली रिपेयर प्रक्रियाओं को साथ-साथ करना पड़ता है। इस तालमेल की वजह से कोई भी एक काम ठीक से नहीं हो पाता। यही वजह है कि रात को खाना खा कर तुरंत सोने पर एसिडिटी, पेट में जलन और गैस-ब्लोटिंग जैसी शिकायत बनी रह सकती है। साथ ही ये आदत शरीर की नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है।

कैंसर के रिस्क से कैसे जुड़ा है इंसुलिन का बढ़ता लेवल?

डॉ ऋषि कहते हैं कि अगर इंसुलिन स्पाइक बना रहेगा, तो बॉडी के अंदर एक ग्रोथ सिग्नल जाता रहेगा। जब ये चीज सालों साल चलती रहेगी, तो ये कैंसर जैसे मैकेनिज्म को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि हर बार खाने के बाद इंसुलिन बढ़ने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। भोजन के बाद इंसुलिन बढ़ना नेचुरल प्रक्रिया है, लेकिन लंबे समय से हो रहे मेटाबॉलिक बदलाव चिंता का विषय हो सकते हैं।

स्टडी में निकलकर आया कैंसर और डिनर टाइमिंग का लिंक

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर द्वारा 2018 में स्पेन में कंडक्ट की गई एक स्टडी में कैंसर और रात के खाने की टाइमिंग के बीच कनेक्शन पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग शाम साढ़े आठ बजे से पहले अपना डिनर कर लेते हैं, और उनके खाने और सोने के बीच लगभग दो घंटे का गैप रहता है, उनमें भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर का रिस्क 20 प्रतिशत तक कम होता है।

आपको किन बातों का ध्यान रखना है?

डॉक्टर कहते हैं इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बस अपने रूटीन में कुछ छोटे-छोटे बदलाव ले कर आएं। सबसे पहले तो कोशिश करें कि आपके रात का खाना 8 या 8:30 बजे तक फिनिश हो जाए। खाने और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का गैप जरूरी है। इसके अलावा डिनर के बाद थोड़ी देर वॉक जरूर करें।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN