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कोई परेशानी है तो फोन करो, होर्मुज के लिए ईरान बनाएगा हॉटलाइन; एक वॉर्निंग भी दी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते में यह भी फैसला किया गया है कि होर्मुज में आवाजाही को लेकर एक हॉटलाइन बनाई जाएगी। होर्मुज का प्रबंधन ईरान के हाथ में होगा लेकिन अमेरिका को किसी जहाज के गुजरने से दिक्कत है तो वह संपर्क कर सकता है। 

अमेरिका के साथ वार्ता में ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने कहा कि होर्मुज अब पहले जैसी स्थिति में कभी नहीं लौट पाएगा। उन्होंने यह भी कहा का कि इसका प्रबंधन ईरानी प्रशासन के ही जिम्मे रहेगा। उन्होंने कहा कि कभी को इस बात का पता होना चाहिए कि युद्ध से पहले होर्मुज से आवाजाही जिस तरीके से चल रही थी अब वैसे नहीं चल पाएगी। उन्होंने कहा ईरान अमेरिका ना कभी विश्वास करता था और ना ही आगे कर पाएगा।

स्विट्जरलैंड यात्रा से वापस आने के बाद गलिबाफ ने कहा कि वार्ता में ईरान एक टेलीफोनिक हॉटलाइन बनाने का फैसला किया है। इसपर अमेरिका या फिर अन्य देशों के साथ किसी भी तरह की गलतफहमी दूर करने की कोशिश की जाएगी और जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान कोऑर्डिनेशन मकैनिजम बनाने पर सहमत हुए हैं। ऐसे में कोई भी जहाज हॉटलाइन के जरिए संपर्क कर सकता है।

अमेरिका से गलतफहमी दूर करने को हॉटलाइन

उन्होंने कहा कि यह हॉटलाइन उच्च सुरक्षा और ट्रैफिक फ्लो को सुनिश्चित करेगी। ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में काम करेगा। गलिबाफ ने कहा कि अगर लेबनान या फिर कहीं और परेशानी पैदा होती है तो होर्मुज में भी समस्या शुरू हो जाएगी। गलिबाफ ने कहा कि हॉटलाइन इसलिए बनाई जा रही है कि अगर अमेरिका को भी किसी शिप के आवागमन पर आपत्ति होती है तो वे फोन कर सकते हैं।

क्यों कमजोर पड़ सकते हैं समझौते?

रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्ष लेबनान सरकार के साथ मिलकर टकराव को टालने पर एक प्रकोष्ठ बनाने पर भी सहमत हुए हैं। यह प्रकोष्ठ देश में लड़ाई खत्म करने से जुड़े वादों के पालन पर नज़र रखने में मदद करेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इज़रायली सेना और ईरान समर्थित हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच लगातार लड़ाई चल रही है जिससे अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के कमज़ोर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।

उस सहमति पत्र के अंतर्गत दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान खत्म करने का संकल्प लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान में संघर्ष खत्म करने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया है लेकिन यह भी कहा कि नया प्रकोष्ठ ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते की पहली बड़ी परीक्षा होगी।

अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक के अनुसार, बर्गेनस्टॉक में हुई बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के हालिया बयानों से पैदा हुई उलझन, नौवहन की आज़ादी सुनिश्चित करने के उपाय और लेबनान में तनाव बढ़ने से रोकने के तरीके शामिल थे।

राजनयिक ने कहा कि बातचीत करने वालों ने भविष्य में संभावित परमाणु समझौते के पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की और इस बात पर सहमत हुए कि आने वाले दिनों में तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के तेहरान लौटने से पहले बातचीत का पहला दौर लगभग 18 घंटे तक चला।

बैठकों के अगले दौर के लिए हालांकि कोई समय-सारणी घोषित नहीं की गई है लेकिन उम्मीद है कि दोनों पक्ष इस सप्ताह बातचीत जारी रखेंगे। वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही को शामिल करते हुए एक व्यापक समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN