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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती और जाने-माने शिया धर्मगुरु इमरान रज़ा अंसारी ईरान के सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुए.
जम्मू-कश्मीर के पांच नेताओं और धर्मगुरुओं ने पुष्टि की थी कि उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता के ऑफ़िस के इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट ने समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था.
इन पांच लोगों में से चार शिया समुदाय से हैं. वहीं, सुन्नी समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था.
एक शिया धर्मगुरु ने कहा कि 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चल रहे इस समारोह के लिए अधिकारियों ने उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं दी जबकि एक का पासपोर्ट नहीं बन पाया है. वहीं एक शिया नेता व्यस्तताओं के चलते इसमें शामिल नहीं हो पाए.
जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरी-ए-शियान के अध्यक्ष आग़ा सैयद हसन अल-मोसवी अल-सफ़वी को गुरुवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोक दिया गया. उन्हें बताया गया कि उनका पासपोर्ट सस्पेंड कर दिया गया है.
शिया धर्मगुरु और जम्मू-कश्मीर इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (जेकेआईएम) के चेयरमैन मसरूर अब्बास अंसारी को भी ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए आमंत्रित किया गया था. उन्होंने कहा कि उनका पासपोर्ट आवेदन पिछले नौ वर्षों से अटका हुआ है.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने शिया धर्मगुरुओं के इन आरोपों पर टिप्पणी के लिए श्रीनगर के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से संपर्क किया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. जवाब मिलने पर इस ख़बर को अपडेट किया जाएगा.
महबूबा मुफ़्ती
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मुफ़्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा ईरान के प्रति अपनाई गई नीति की मुखर आलोचक रही हैं.
गुरुवार को ईरान रवाना होने से पहले बीबीसी से बात करते हुए, जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि वह इस निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रही हैं.
ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद शोक व्यक्त करने के लिए वह 10 मार्च को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास गई थीं.
उनके पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ईरान और दुनिया की छह बड़ी ताक़तों के बीच हुई डील का स्वागत किया था.
ईरान के इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट के निदेशक मोहसेन कुम्मी ने मुफ़्ती को लिखे अपने पत्र में कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान और रिपब्लिक ऑफ़ इंडिया के बीच गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को देखते हुए, मैं भारतीय राष्ट्र के एक विशिष्ट अतिथि के रूप में आपको इस गंभीर समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित करना बहुत बड़ा सम्मान मानता हूं.”
ईरान में अंतिम यात्रा से पहले ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि देने के बाद मुफ़्ती ने एक्स पर एक पोस्ट कर कहा, “ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की शहादत पर अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त करने के लिए तेहरान में होना मेरे लिए सम्मान की बात है. वो एक सम्मानित नेता थे जिन्होंने धारा के विपरीत खड़े होने का साहस किया और पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ी.”
आग़ा सैयद हसन
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प्रतिबंधित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी गुट के पूर्व कार्यकारी सदस्य, हसन का दावा है कि उनको इमिग्रेशन अधिकारियों ने ईरान जाने से रोक दिया.
उनके बेटे मुंतज़िर मेहदी ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर ब्यूरो ऑफ़ इमिग्रेशन के अधिकारियों ने उनके पिता का पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया.
मेहदी द्वारा बीबीसी के साथ साझा किए गए हसन के पासपोर्ट ज़ब्ती मेमो से पता चलता है कि पासपोर्ट को “सस्पेंड” कर दिया गया है. पासपोर्ट कब सस्पेंड किया गया उसका मेमो में कोई ज़िक्र नहीं है.
मेहदी ने कहा, “उन्हें बताया गया कि उन्हें ईरान जाने की इजाज़त इस शर्त पर दी जाएगी कि वो कश्मीर में हुई गिरफ़्तारियों (ख़ामेनेई की मौत के बाद) या भारत के आधिकारिक रुख़ के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहेंगे.”
पीडीपी के नेता और बडगाम निर्वाचन क्षेत्र से विधायक मेहदी ने कहा, “उन्होंने उनकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया.”
इसराइली-अमेरिकी हमले में ख़ामेनेई की मौत के बाद कश्मीर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए. इसके बाद प्रशासन ने कुछ इलाकों में पाबंदियां लगा दी थीं और हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट सर्विस भी रोक दी गई थी.
महबूबा मुफ़्ती ने तब कहा था कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, इसमें महिलाएं भी शामिल थीं. उन्होंने उनकी रिहाई की मांग की थी.
सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने भी श्रीनगर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें गिरफ्तार लोगों की रिहाई और उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की गई.
हालांकि पुलिस ने मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
लेकिन तब श्रीनगर पुलिस के एक प्रवक्ता ने “सभी मीडिया संगठनों, सोशल मीडिया यूज़र्स और आम जनता” के लिए एक एडवाइज़री जारी की थी, जिसमें कहा गया था “इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी जानकारी की रिपोर्टिंग, पब्लिशिंग या शेयरिंग करते समय पूरी ज़िम्मेदारी बरतें.”
श्रीनगर साइबर पुलिस ने तीन मार्च को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और लोकसभा सांसद आग़ा रुहुल्लाह और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू के ख़िलाफ़ भी मामले दर्ज किए थे.
उन पर “डर का माहौल बनाने, क़ानून-व्यवस्था बिगाड़ने और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने” का आरोप था.
इन दोनों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर उस दौरान हुए प्रदर्शन का एक वीडियो शेयर किया था.
सैयद रूहुल्लाह मेहदी
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आगा सैयद रूहुल्लाह को भी ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था. उन्होंने बीबीसी को बताया कि वह “पहले से तय कामों” की वजह से ईरान नहीं जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे मुंबई में पहले से तय कुछ कार्यक्रमों में शामिल होना है, इसलिए मैं वहां नहीं जा पाऊंगा.”
मोदी सरकार के मुखर आलोचक और आक्रामक नेता रूहुल्लाह जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं. उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका-इसराइल युद्ध का भी विरोध किया है.
रूहुल्लाह 2024 के आम चुनाव में लोकसभा के लिए चुने जाने से पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बडगाम विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
मसरूर अब्बास अंसारी
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अंसारी बैन किए गए संगठन ‘जम्मू-कश्मीर इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (जेकेआईएम)’ के चेयरमैन हैं. उन्हें भी ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता मिला था.
अधिकारियों द्वारा “पासपोर्ट न दिए जाने” की वजह से वह ईरान नहीं जा पाए. उन्होंने कहा कि उनके पासपोर्ट आवेदन पर पिछले नौ सालों से कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई.
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का हिस्सा रहे जेकेआईएम संगठन को केंद्र सरकार ने 2025 में ‘ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम’ (यूएपीए) के तहत बैन कर दिया था.
एक्स पर एक पोस्ट में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता अंसारी ने कहा, “ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होना बहुत बड़े सम्मान और जीवन में एक बार मिलने वाले सौभाग्य जैसा होता. लेकिन, क्योंकि मुझे पासपोर्ट नहीं मिल पा रहा है, इसलिए मैं इस बुलावे को स्वीकार नहीं कर पा रहा हूं.”
इमरान रज़ा अंसारी
अंसारी एक जाने-माने शिया धर्मगुरु हैं. वो ‘ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन’ के आजीवन अध्यक्ष और सज्जाद लोन की अगुवाई वाली ‘पीपुल्स कॉन्फ्रेंस’ के महासचिव भी हैं.
अंसारी और महबूबा जम्मू-कश्मीर के वे दो नेता हैं जो भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ईरान जाने वाले विशेष विमान में सवार हुए थे.
2014 में पहली बार जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए अंसारी ने 2015-2018 के दौरान जम्मू-कश्मीर में सत्ता में रही पीडीपी-बीजेपी सरकार में मंत्री के तौर पर काम किया.
अंसारी के पिता इफ़्तिख़ार हुसैन अंसारी पीडीपी के संस्थापक सदस्य थे. अनुच्छेद 370 हटाए जाने से एक साल पहले 2018 में अंसारी ने पीडीपी छोड़ दी और लोन का साथ दिया जो उस समय बीजेपी के करीबी सहयोगी थे.
शुक्रवार को अपने फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में अंसारी को ईरान के दिवंगत नेता ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए उनके ताबूत के पास रोते हुए देखा जा सकता है.
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