Source :- LIVE HINDUSTAN
गर्मी की छुट्टियों में कई बच्चे घर पर ही रहते हैं और धूप के कारण बाहर खेलने जा नहीं पाते। ऐसे में दिनभर मोबाइल या टीवी में लगे रहते हैं। बढ़ते स्क्रीनटाइम की वजह से बच्चों की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है। पीडियाट्रिशियन ने इसे कम करने के कुछ टिप्स दिए हैं।
बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं और वे पूरी तरह मस्ती के मूड में भी आ गए हैं। तेज धूप और गर्मी की वजह से बच्चे ज्यादातर समय घर के अंदर ही रहते हैं। ऐसे में खेल-कूद से जल्दी बोर होकर वे टीवी या मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं। दूसरी तरफ पेरेंट्स भी अपने काम में बिजी रहते हैं और इस बात पर ध्यान नहीं दे पाते कि बच्चा कितने घंटों से स्क्रीन देख रहा है। हालांकि लिमिट में स्क्रीनटाइम ठीक माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों की आंखों और दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। नारायण हेल्थ सेंटर के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर शोरूक मोटवानी के मुताबिक, किसी भी उम्र के बच्चों के लिए घंटों तक मोबाइल या टीवी देखना नुकसानदायक हो सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि बच्चों का स्क्रीनटाइम कम करने के लिए पेरेंट्स क्या तरीके अपना सकते हैं।
ज्यादा स्क्रीनटाइम होने के नुकसान
- आंखों पर सीधा असर-
- घंटों तक मोबाइल, टीवी या टैबलेट देखने से बच्चों की आंखें कमजोर हो जाती है, ऐसे में आंखों में सूखापन, जलन, लालपन, धुंधला दिखना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार ये परेशानी बढ़ जाती है, जिसके लिए इलाज कराना पड़ता है।
- नींद की कमी-
- बच्चों को ज्यादा नींद आनी चाहिए लेकिन ओवर स्क्रीनटाइम के कारण उनकी नींद कम हो जाती है। ब्लू लाइट बच्चों की नींद को प्रभावित करती है। ये लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को बनने से कम कर देती है और इससे नींद में कमी आ जाती है।
- फोकस की कमी-
- लगातार स्क्रीनटाइम लेने से बच्चों के दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे उनका फोकस कमजोर होने लगता है। इसका असर पढ़ाई पर भी पड़ता है और बच्चों का मन पढ़ने में कम लगने लगता है। इतना ही नहीं, ज्यादा स्क्रीन देखने की आदत याददाश्त और सीखने की क्षमता को भी खराब कर सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा स्क्रीनटाइम बच्चों के मानसिक विकास के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
पेरेंट्स स्क्रीनटाइम कैसे कंट्रोल करें
1- डेली रूटीन चार्ट बनाएं
बच्चों का स्क्रीनटाइम कम करने का सबसे बेस्ट तरीका है कि पेरेंट्स डेली रूटीन चार्ट बनाएं। इस चार्ट में खाने-पीने से लेकर खेलकूद और स्क्रीनटाइम की लिमिट भी तय करें। अगर रोजाना का स्क्रीनटाइम 2 घंटे है, तो इसे घटाकर 1 घंटा करें। धीरे-धीरे इसे और कम करते जाएंगे।
2- एक्टिविटीज पर दें ध्यान
फिजिकल एक्टिविटीज पर ध्यान दें। बच्चों को किताबें पढ़ने, पेंटिंग, डांसिंग, गार्डनिंग, स्टोरीटेलिंग और कविता राइटिंग जैसी चीजों को करने से कहें। बच्चे जब क्राफ्ट एक्टिविटीज में व्यस्त रहेंगे तो उनका दिमाग मोबाइल की ओर नहीं लगेगा।
3- नो स्क्रीन जोन बनाएं
अगर बच्चा साथ में हैं, तो उसके साथ खुद भी फोन न देखें। जैसे खाने की मेज, सोने से पहले, एक्टिविटीज के दौरान आप भी मोबाइल न चलाएं। इससे बच्चा डिस्ट्रैक्ट नहीं होगा और उसका दिमाग भी मोबाइल की तरफ नहीं लगेगा।
4- 20-20-20 रूल अपनाएं
पीडियाट्रिशियन का कहना है कि पेरेंट्स को 20-20-20 रूल बनाना चाहिए। इस रूल में बच्चे को 20 मिनट तक स्क्रीन टाइम दें, फिर 20 मिनट तक उसे हरियाली या अन्य चीजों को देखने को कहें। फिर 20 मिनट आंख बंद करके लेटने को कहें। ऐसा करने से आंखों को आराम मिलेगा और दिमाग भी शांत रहेगा।
5- सोने से पहले न देखने दें
घर में ये रूल बना लें कि बेड पर जाने के बाद कोई मोबाइल नहीं देखेगा। सोने से करीब 2 घंटे पहले ही स्क्रीनटाइम बंद करें। इससे नींद अच्छी आएगी और दिमाग रिलैक्स मोड पर रहता है। इसकी जगह आप बुक रीडिंग या फिर गाने सुनने वाला ऑप्शन बच्चों को दे सकती हैं।
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