Home - चलते-फिरते फोन पर देखें LIVE TV, इंटरनेट की भी जरूरत नहीं; सरकार...

चलते-फिरते फोन पर देखें LIVE TV, इंटरनेट की भी जरूरत नहीं; सरकार की नई सुविधा

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीयों के लिए खुशखबरी है। अब लोग बिना इंटरनेट सीधे अपने फोन पर लाइव TV देखें सकेंगे, वो भी बिना इंटरनेट के। सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती, डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) तकनीक की टेस्टिंग कर रहा है। कैसे होगा सारा काम, चलिए बताते हैं…

भारतीयों के अच्छी खबर है। हो सकता है कि जल्द ही आप बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के भी अपने फोन पर लाइव टीवी देख सकें। उम्मीद है कि सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती, डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) ब्रॉडकास्टिंग को कमर्शियल तौर पर शुरू करने के लिए ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) जारी करेगा।

एक्सचेंज4मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रसार भारती अगले महीने RFP जारी कर सकता है। यह D2M टेक्नोलॉजी को ट्रायल से बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में अगला कदम होगा। हालांकि, अभी इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है। खबरों के मुताबिक, तेजस नेटवर्क्स के बनाए इक्विपमेंट के साथ टेक्नोलॉजी वैलिडेशन टेस्ट के सरकारी रिव्यू में पास होने के बाद इस योजना में तेजी आई है।

D2M ब्रॉडकास्टिंग की मदद से यूजर्स बिना सेल्युलर कनेक्शन के अपने मोबाइल फोन पर लाइव टीवी और ऑडियो स्ट्रीम कर सकते हैं, साथ ही न्यूज अपडेट और इमरजेंसी अलर्ट भी पा सकते हैं।

डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) ब्रॉडकास्टिंग क्या है?

D2M उस सेल्युलर नेटवर्क पर निर्भर नहीं करता है जिसका इस्तेमाल आप आम तौर पर कॉल या इंटरनेट के लिए करते हैं। इसके बजाय, D2M उसी तरह काम करता है जैसे स्मार्टफोन पर FM रेडियो काम करता है, जहां एक रिसीवर रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आम तौर पर नागरिकों को इमरजेंसी अलर्ट भेजने के लिए किया जाता है। हालांकि, कमर्शियल तौर पर लॉन्च होने पर यूजर्स लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स और दूसरे मल्टीमीडिया कंटेंट भी देख पाएंगे। D2M उन इलाकों में काम आ सकता है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है।

टेंशन में प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां

चूंकि यह मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं है, इसलिए आपको अपने डेटा प्लान से डेटा खर्च करने की भी जरूरत नहीं होगी। D2M से मोबाइल डेटा नेटवर्क पर दबाव भी कम हो सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों ने D2M को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि इससे उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है।

प्रसार भारती के कहने पर IIT कानपुर ने जो स्टडी की, उसमें पाया गया कि 470-582MHz बैंड में D2M ब्रॉडकास्टिंग से सेल्युलर नेटवर्क में कोई नुकसानदायक रुकावट नहीं आती और न ही इससे स्मार्टफोन असामान्य रूप से गर्म होते हैं।

प्रसार भारती, IIT कानपुर और सांख्य लैब्स (जो अब तेजस नेटवर्क्स का हिस्सा है) के साथ मिलकर 19 से ज्यादा शहरों में D2M ट्रायल कर रहा है। दिल्ली और बेंगलुरु में पहले किए गए ‘प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट’ डेमोंस्ट्रेशन से यह पता चला था कि मल्टीमीडिया कंटेंट को सीधे मोबाइल डिवाइस पर भेजा जा सकता है। EY की एक रिपोर्ट में देशभर में इसे लागू करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल और लंबे समय के लिए कमर्शियल फ्रेमवर्क का सुझाव दिया गया है।

हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती

इसे बड़े पैमाने पर लागू करने में अभी भी हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियां हैं। IIT कानपुर के 2022 के रोडमैप पेपर के अनुसार, अभी उपलब्ध ज्यादातर मोबाइल डिवाइस D2M को सपोर्ट नहीं करते हैं क्योंकि इस टेक्नोलॉजी के लिए ATSC 3.0 स्टैंडर्ड की जरूरत होती है। इसके लिए एंटीना, लो-नॉइज एम्पलीफायर, बेसबैंड फिल्टर और रिसीवर के साथ-साथ एक अलग बेसबैंड प्रोसेसिंग यूनिट की भी जरूरत होगी। मौजूदा नेटवर्क सेटअप भी बड़े पैमाने पर D2M ट्रांसमिशन के लिए तैयार नहीं है और इसके लिए टेरेस्ट्रियल टावरों के ज्यादा घने नेटवर्क की जरूरत होगी।

सरकार ने D2M को टीवी पहुंच की कमी का एक संभावित समाधान बताया है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार भारत में करीब 28 करोड़ घरों में से लगभग 19 करोड़ घरों में टीवी सेवाएं उपलब्ध हैं, यानी लगभग 9 करोड़ घरों में टीवी नहीं है। देश में मोबाइल डिवाइस की संख्या बहुत अधिक होने के कारण प्रस्तावित RFP इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN