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चीन के माफियाओं का अड्डा बना श्रीलंका, कैसे भारत के पड़ोस तक पहुंची गैंग वॉर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

श्रीलंका में चीनी साइबर माफिया की खूनी जंग से हड़कंप। कंबोडिया से भागे साइबर सरगना हाओ पों की हत्या और फर्जी वीजा के खेल ने देश की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

श्रीलंका तेजी से अंतरराष्ट्रीय चीनी साइबर क्राइम सिंडिकेट का नया बेस बनता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि विदेशी माफियाओं का गैंगवॉर अब इस देश की धरती तक पहुंच चुका है। हाल ही में एक ग्लोबल चीनी माफिया सिंडिकेट के सदस्य के अपहरण और हत्या ने श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी दी है कि इससे पहले कि हालात बेकाबू हों, इस संकट पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

1,000 से ज्यादा विदेशी नागरिक गिरफ्तार

श्रीलंका में हाल के महीनों में की गई छापेमारी के दौरान चीन, कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम के 1,000 से अधिक नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच 23 जुलाई को सबरागामुवा प्रांत के करंदना (एहलियागोडा) में एक चीनी नागरिक का शव मिलने से हड़कंप मच गया, जिसने देश में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय माफियाओं के खौफनाक नेटवर्क को उजागर कर दिया है। श्रीलंका भारत का समुद्री पड़ोसी देश है।

कौन था हाओ पों और क्यों हुआ मर्डर?

पुलिस जांच में पता चला कि मारा गया व्यक्ति ‘हाओ पों’ था, जो अंतरराष्ट्रीय चीनी साइबर क्राइम सिंडिकेट का एक प्रमुख सदस्य था। वह कंबोडियाई फर्जी पासपोर्ट के जरिए श्रीलंका में घुसा था। उसके पास से दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम का भी एक जाली पासपोर्ट बरामद हुआ।

हाओ पों कंबोडिया में रिसॉर्ट और ब्यूटी पार्लर जैसी वैध कंपनियों की आड़ में चीनी हैकरों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी करता था। पुलिस के मुताबिक, उसने वहां से करोड़ों डॉलर कमाए, लेकिन डाटा सप्लाई करने वाले दूसरे चीनी आपराधिक गैंग को मुनाफे का हिस्सा नहीं दिया और पैसे लेकर श्रीलंका भाग आया।

वह करीब 6 महीने पहले ही श्रीलंका आया था। वह अपने साथ एक चीनी शेफ, फिजियोथेरेपिस्ट, ड्राइवर और अपनी 31 वर्षीय वियतनामी गर्लफ्रेंड को लेकर आया था। इन नौकरों को वह करीब 3000 डॉलर यानी लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति माह वेतन देता था। श्रीलंका में भी वह इसी तरह का साइबर फ्रॉड नेटवर्क स्थापित करने के लिए ‘ओरा’ नाम की एक कंपनी रजिस्टर करवा रहा था।

आधी रात को पोर्ट सिटी से किडनैपिंग

हाओ पों की तलाश में विरोधी चीनी गैंग अप्रैल में ही श्रीलंका पहुंच चुका था। हाओ पों को इस बात की भनक थी, इसलिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और कोलंबो के यूनियन प्लेस स्थित एक लग्जरी अपार्टमेंट में रह रहा था। 22 जुलाई की आधी रात को जब वह कोलंबो पोर्ट सिटी के सस्पेंशन ब्रिज के पास अपने ड्राइवर और दो अन्य चीनी सुरक्षाकर्मियों के साथ मछली पकड़ रहा था, तभी हथियारों से लैस विरोधी गैंग एक वैन में वहां पहुंचा। गैंग ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया और हाओ को अगवा करके सीधे करंदना ले गए।

करोड़ों डॉलर के लिए मोबाइल की डिमांड

किडनैपर्स को हाओ पों का मोबाइल फोन चाहिए था ताकि वे उसके कंबोडियाई बैंक खाते में जमा करोड़ों डॉलर तक पहुंच सकें। लेकिन हाओ पों का फोन किडनैपिंग के दौरान कहीं गिर गया था और वह किडनैपर्स को बता नहीं पाया कि फोन कहां है। गैंग को लगा कि वह झूठ बोल रहा है, जिसके बाद बेरहमी से पिटाई करके उसकी हत्या कर दी गई।

फोन खोजने की गलती ने पहुंचाया सलाखों के पीछे

जब गैंग के सदस्य फोन की तलाश में वापस कोलंबो पोर्ट सिटी के ब्रिज पहुंचे, तो उनकी संदिग्ध गतिविधियों को देखकर पोर्ट सिटी पुलिस ने उनकी तस्वीरें खींच लीं। इन तस्वीरों को हाओ के ड्राइवर ने पहचाना और इसे एयरपोर्ट के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम में डाल दिया गया।

हत्या के बाद गैंग के कुछ सदस्य एयर इंडिया की फ्लाइट से मुंबई के रास्ते सिंगापुर भागने की फिराक में थे, लेकिन फेशियल रिकग्निशन सिस्टम ने उन्हें पकड़ लिया।

एयरपोर्ट से दो आरोपी गिरफ्तार हो गए, जबकि तीन भागने में सफल रहे। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी घटना में 8 चीनी नागरिक शामिल थे। चीन ने फरार हुए तीन आरोपियों के प्रत्यर्पण में श्रीलंका की मदद करने पर सहमति जताई है।

समुद्र की तलहटी से मिला फोन, सामने आए कई राज

पूछताछ में पता चला कि किडनैपिंग के दौरान आरोपियों की एक एयर पिस्टल समुद्र में गिर गई थी। जब श्रीलंका नेवी के गोताखोरों ने पिस्टल की तलाश की, तो उन्हें समुद्र के तल से हाओ पों का गायब हुआ मोबाइल फोन भी मिल गया। पुलिस की ट्रैकिंग से बचने के लिए आरोपियों ने मोबाइल की जगह सिर्फ वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल किया था। पुलिस का मानना है कि इस गैंग के ठहरने की व्यवस्था ‘ली जिन’ नाम के एक संदिग्ध वरिष्ठ सरगना ने की थी।

फर्जी कंपनियों के जरिए श्रीलंका के वीजा सिस्टम से खिलवाड़

पुलिस जांच में सामने आया है कि चीनी साइबर अपराधी श्रीलंका के वीजा सिस्टम का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके तीन प्रमुख तरीके सामने आए हैं।

1. शेल यानी कागजी कंपनियां: कोलंबो पोर्ट सिटी में फर्जी कंपनियां बनाकर ये अपराधी खुद को डायरेक्टर या कुशल कर्मचारी बताते हैं और आसानी से वीजा हासिल कर अपनी पूरी साइबर टीम को श्रीलंका ले आते हैं।

2. बाहरी ठिकानों का इस्तेमाल: ये पोर्ट सिटी में कंपनी रजिस्टर्ड कराते हैं लेकिन देश के अन्य हिस्सों में इमारतें और होटल किराए पर लेकर साइबर क्राइम सेंटर चलाते हैं।

3. वित्तीय अपराध: हाल के महीनों में श्रीलंका में ऐसे 10 से ज्यादा ठिकानों पर छापा मारा गया है। गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ में स्पष्ट हुआ है कि वे केवल साइबर धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से बड़े वित्तीय अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN