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जब प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे अनुपमा फेम सुधांशु पांडे तो क्यों नहीं पूछा था सवाल, अब बताया

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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सुधांशु पांडे बीते साल वृंदावन गए थे। वहां उन्होंने प्रेमानंदजी से मुलाकात की थी। अब एक पॉडकास्ट में उन्होंने वहां का अनुभव बताया है। साथ ही यह भी कि वह किसी साधु-संत के पास जाकर क्या करते हैं।

सुधांशु पांडे महाकाल के भक्त हैं। बीते साल वह प्रेमानंद महाराज के आश्रम भी जा चुके हैं। वह रीसेंटली एक पॉडकास्ट में थे तो उनसे वहां का अनुभव पूछा गया। सुधांशु ने बताया कि वह मानते हैं कि जब किसी साधु के पास जाएं तो उनसे कोई सवाल ना पूछे। सुधांशु ने बताया कि जब वह प्रेमानंदजी से मिले तो सिर्फ उनकी ऊर्जा को ग्रहण किया।

प्रेमानंद महाराज से क्या पूछा

सुधांशु पांडे बीते दिनों निधि वासंदानी के पॉडकास्ट में थे। वहां उनसे पूछा गया कि प्रेमानंद महाराज से उन्होंने क्या सवाल पूछा? इस पर वह बोले, ‘मैंने उनसे सवाल नहीं पूछा। मैंने सिर्फ उनको सुना। मुझे लगता है कि जब भी आप इस तरह के साधु, महात्मा लोगों के पास जाएं तो सबसे जरूरी होता है उनको सुनना। क्योंकि मुझे लगता है कि सवाल तो पूछना ही बेकार है ऐसे गुरुओं के आगे।’

मेडिटेशन की अवस्था में रहते

सुधांशु आगे बताते हैं, ‘असल में मैं आपको एक चीज बताता हूं, क्योंकि मैं जीवन में इतना ध्यान कर चुका हूं, मैं लगातार मेडिटेशन की अवस्था में रहता हूं। मुझे ऐसा लगता है कि मैं आपके साथ भी हूं यहां और इसी समय मैं इससे डिटैच होकर एक और विजन से भी इस पूरी चीज को देख रहा हूं। तो यह मेरे दिमाग की एक स्थिति है और रहती है। जब भी मैं किसी गुरु के सामने जाता हूं तो सिर्फ उनकी ऊर्जा को लेता हूं और कुछ नहीं करता।’

जब प्रेमानंदजी से मिले सुधांशु

सुधांशु पांडे साल 2025 में प्रेमानंद महाराज के पास गए थे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो भी पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, कितना भी पावर और पैसा हो, वह ज्ञान और आध्यात्मिकता की ताकत की जगह नहीं ले सकता। ज्ञान ही धर्म है और धर्म ही ज्ञान है। जय सनातन, जय महाकाल, जय बांके बिहारी।

क्या हुई थी बातचीत

इस वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने सुधांशु से सवाल किया था, ‘नाम जप करते हो?’ इस पर सुधांशु बोले थे, ‘मेरी पत्नी ने शुरू किया है अभी, मैंने थोड़ा-थोड़ा किया है। मैं महाकाल को समर्पित हूं। मैं करीब 20 साल से महाकाल को ही समर्पण किया है।’ इस पर प्रेमानंदजी बोले, ‘भगवान शिव और हरि एक ही हैं, अलग नहीं हैं। तत्व तो एक ही हैं, रूप अनेक धारण किए हुए हैं। एक ही परमात्मा हैं। उनसे जुड़ना चाहिए। हमें हृदय से जुड़ना चाहिए। हृदय से जुड़ने का मतलब उसकी बार-बार याद आना। हम जिसको हृदय से प्यार करते हैं। उसकी याद आती है और याद ही भगवत प्राप्ति करवाती है। जैसे हम नाम जप रहे हैं और याद संसार की आ रही है तो काम नहीं बना। अभी माला भी नहीं है, लेकिन प्रभु की याद आ रही है। इसी स्मृति से जन्म-संसार के बंधनों को काट देता है।’ प्रेमानंदजी ने सुधांशु से कहा था कि 24 घंटे में 24 मिनट भी भगवान को याद कर लें तो जीवन सफल हो जाएगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN