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ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

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Source :- BBC INDIA

पटना में सीपीआई ने ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सोमवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए.

चुनाव आयोग में कामकाज को लेकर इंडियन एक्स्प्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के बाद विपक्षी पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की थी. इस मामले में सीजेपी ने दो अक्तूबर से जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है.

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग की ओर से लिए गए फ़ैसलों को लेकर 14 बार आपत्तियां जताई थीं.

और उनका कहना था कि इस दौरान लिए गए अहम फ़ैसलों में उन्हें शामिल नहीं किया गया था.

इसके बाद चुनाव आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फ़ैसले सर्वसम्मति से हुए हैं.

हालांकि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग फिर भी नहीं थमी.

सोमवार को दिल्ली, पटना, इलाहाबाद, जयपुर, हैदराबाद, श्रीनगर समेत देश के कई शहरों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े को लेकर कई दर्शन हुए. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया जहां दायर एक याचिका में ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है.

सीजेपी के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने इस प्रदर्शन के बारे में एक्स पर लिखा, “2 अक्तूबर को सीजेपी मुंबई स्थित शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी.” उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को दोहराया है.

दरअसल सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देने के लिए बीते शनिवार यानी 26 सितंबर तक इस्तीफ़ा देने की मांग की थी.

कई जगह विरोध प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ जयपुर में प्रदर्शन

सोमवार को देश के कई शहरों में कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा समाजवादी पार्टी, सीपीआई और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

दिल्ली में एक प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता अलका लांबा ने आरोप लगाया, “केंद्र में बीजेपी की सरकार सिर्फ वोट चोरी की वजह से बची हुई है. ज्ञानेश कुमार इसे बचाने का काम करते आए हैं और कर रहे हैं.”

भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा, “हम राहुल गांधी के सिपाही हैं. देश की आज़ादी के लिए हमारे महान नेताओं ने देश के लिए बलिदान दिया. उन्होंने अपना ख़ून और अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी. लोकतंत्र को बचाने के लिए हम अपने ख़ून की आख़िरी बूंद तक कुर्बान कर देंगे. हम कांग्रेस पार्टी के सिपाही हैं, इस देश के नागरिक हैं, सच्चे भारतीय हैं, देशभक्त भारतीय हैं…”

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया

तेलंगाना के हैदराबाद में इंदिरा गांधी प्रतिमा से लेकर चुनाव आयोग के कार्यलय तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला.

जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ रैली निकाली.

राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “ज्ञानेश कुमार वोट चोरी कर रहे हैं, क रिपोर्ट के आधार पर ये सब उजागर हो चुका है. चुनाव आयोग को बचाने के लिए मोदी जी ने क़ानून बनाया है. ज्ञानेश कुमार भारतीय जनता पार्टी के एक एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं.”

कोलकाता में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में भी प्रदर्शन हुआ. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए श्रीनगर के कांग्रेस कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिए गए थे.

कर्नाटक के हासन में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. कांग्रेस के सांसद श्रेयस एम पटेल ने कहा, “बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें वोट देने का अधिकार दिया. हमारे लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार की गारंटी हमारे संविधान में दी गई है. हमें चिंता है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है.”

“हम इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि चुनाव आयोग के दो अधिकारियों ने आयोग के भीतर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने यह भी सवाल किया है कि क्या आयोग का कामकाज निष्पक्ष और पारदर्शी है.”

इलाहाबाद में सिविल सोसाइटी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ़्तारी और बर्ख़ास्तगी को लेकर पत्थर गिरजाघर स्थित सिविल लाइंस में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया.

मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) ने एक बयान जारी कर ‘प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं को बचाने’ की अपील की.

कांग्रेस ने क्या कहा?

पी चिदंबरम

सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर अपने हमले तेज़ कर दिए.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में लिखा, “देशभर में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर से वोट चोरी किए जाने और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.”

उन्होंने दावा किया, “मतदाता सूची से 13.30 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. पश्चिम बंगाल के अनुभव को देखते हुए, अगर ये लोग ट्रिब्यूनल में अपील करते हैं, तो 91 फ़ीसदी अपीलों को मंज़ूरी मिलने और उनके नाम मतदाता सूची में बहाल होने की संभावना है.”

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “देशभर में यह विरोध प्रदर्शन जारी है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश को धोखा दिया है. चुनावी जनादेश की चोरी की जा रही है. एसआईआर पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी है. फ़ॉर्म 6 में संशोधन के लिए इसे संसद में लाना ज़रूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इसलिए एसआईआर ग़ैरक़ानूनी हो जाता है. अगर एसआईआर ग़ैरक़ानूनी है, तो नाम जोड़ने और हटाने की सभी प्रक्रियाएं भी ग़ैरक़ानूनी हैं.”

उन्होंने कहा, “देशभर में ग़ुस्सा है. हर कोई विरोध प्रदर्शन करना चाहता है. देश को बचाने के लिए ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दिया जाना चाहिए.”

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ़्तार करने की मांग की.

कांग्रेस के एक्स हैंडल से एक पोस्ट में कहा गया, “ज्ञानेश कुमार ने जनता के वोट चुराकर लोकतंत्र की हत्या की है. ‘वोट चोर’ ज्ञानेश को गद्दी छोड़नी होगी और उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए.”

मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि वो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंज़ूरी के बिना चुनाव आयोग के नाम पर फ़ैसले ले रहे हैं.

लाइव लॉ ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है.

बार एंड बेंच के मुताबिक़ राकेश कुमार सिंह की याचिका में ‘क्वो वारंटो’ की रिट की मांग की गई है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसे फै़सले लिए और अब भी ले रहे हैं, जैसे कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को मिले सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार का इस्तेमाल वह अकेले करने के हकदार हों.

भारतीय संविधान के प्रावधानों के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में 5 तरीके के रिट दायर की जा सकती हैं. इनमें ‘क्वो वारंटो’ भी शामिल है.

यह रिट मुख्य रूप से तब जारी की जाती है जब कोई व्यक्ति बिना अधिकार के किसी सार्वजनिक पद पर क़ब्ज़ा कर लेता है.

भारत में चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं.

फिलहाल ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी दो अन्य चुनाव आयुक्त हैं.

जब तीनों के बीच किसी मुद्दे पर सहमति नहीं होती है, तो फै़सला बहुमत के आधार पर लिया जाना होता है.

एनडीए नेताओं ने किया ज्ञानेश कुमार का बचाव

भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के कई नेताओं ने ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है. रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, “संवैधानिक रूप से चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है. उनके इस्तीफ़े की मांग करना और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना अपने आप में लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है.”

उत्तर प्रदेश बीजेपी प्रेसीडेंट पंकज चौधरी ने रविवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों, डॉ. एसएस संधू और विवेक जोशी ने 26 सितंबर को बैठक की और एक साझा प्रेस बयान जारी किया. इसमें साफ़ किया गया कि देशभर में चल रही एसआईआर समेत सभी बड़े फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. चाहे 24 जून, 2025 का मूल आदेश हो या 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े अलग-अलग चरणों का कार्यक्रम, आयोग ने सभी फ़ैसले पूरी सहमति से लिए हैं. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को इस प्रक्रिया को क़ानूनी तौर पर सही माना था. इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर आरोप लगा रहा है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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