Home BUSINESS NEWS HINDI टाटा की इस कंपनी का चमकेगा विदेशी कारोबार… 250 रुपये तक जा...

टाटा की इस कंपनी का चमकेगा विदेशी कारोबार… 250 रुपये तक जा सकता है शेयर

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

Tata steel share target: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील के शेयर गुरुवार को डिमांड में रहे। शेयर में तेजी ऐसे समय आई जब टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कंपनी के नीदरलैंड कारोबार से 400-500 मिलियन यूरो एबिटा मिलने की उम्मीद है। टाटा स्टील के शेयर को लेकर एक्सपर्ट भी बुलिश हैं। बता दें कि बीते दिनों ज्यादातर ब्रोकरेज ने 220 रुपये से ज्यादा का टारगेट प्राइस दिया था।

क्या है शेयर का परफॉर्मेंस?

टाटा स्टील के शेयर की बात करें तो 187.15 रुपये पर है। एक दिन पहले के मुकाबले यह शेयर 1.08% बढ़कर बंद हुआ। मई 2026 में शेयर 224.40 रुपये तक गया था। यह शेयर के 52 हफ्ते का हाई है। अगस्त 2025 में शेयर 152.55 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। बीते दिनों ब्रोकरेज यस सिक्योरिटीज ने इस शेयर के लिए ‘एड’ रेटिंग और 240 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

ब्रोकरेज Axis सिक्योरिटीज ने इस स्टॉक पर ‘होल्ड’ रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस 235 रुपये तय किया। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने टाटा ग्रुप के इस शेयर के लिए 250 रुपये का प्राइस टारगेट तय किया है।

नीदरलैंड कारोबार पर चेयरमैन ने क्या कहा?

टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने गुरुवार को कंपनी की 119वीं सालाना आम बैठक में कहा कि चालू वित्त वर्ष में कंपनी के नीदरलैंड ऑपरेशन्स से 400-500 मिलियन यूरो मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इसे समय के साथ बढ़ाकर €800 मिलियन से €1 बिलियन तक ले जाने का लॉन्ग-टर्म लक्ष्य भी है। इस बैठक में शेयरहोल्डर्स ने इंटरनेशनल ऑपरेशन्स के परफॉर्मेंस को लेकर सवाल उठाए थे। डच ऑपरेशन्स ने FY26 में €267 मिलियन का EBITDA दर्ज किया था।

चंद्रशेखरन ने शेयरहोल्डर्स को बताया कि कंपनी ने यूरोप में हो रहे नुकसान को रोक लिया है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हमें अभी और काम करना है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2007 में टाटा स्टील द्वारा कोरस ग्रुप (जिसके स्टील बनाने वाले एसेट्स में UK और नीदरलैंड के प्लांट शामिल थे) को खरीदने के बाद से ही डच ऑपरेशन्स खुद से फंडेड रहे हैं। उन्होंने कहा कि खरीद के बाद से हमने नीदरलैंड्स को कोई फंड नहीं दिया है। इसके सभी ऑपरेशन्स खुद से कमाए गए कैश से ही चले हैं और इन्होंने पिछले कुछ सालों में लगभग €1 बिलियन का डिविडेंड भी दिया है।

ब्रिटेन के कारोबार पर भी चंद्रशेखरन ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कंपनी साउथ वेल्स के पोर्ट टैलबोट प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस की जगह इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) लगाने की दिशा में काम कर रही है। करीब 1.25 अरब पाउंड की इस परियोजना को ब्रिटेन सरकार से 500 मिलियन पाउंड का समर्थन भी मिला है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN