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टाटा संस की लिस्टिंग की चर्चा ने फिर पकड़ा जोर, फायदे की उम्मीद में चढ़ गया यह शेयर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बड़ी नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए जारी नए नियमों ने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावनाओं को एक बार फिर हवा दे दी है। इस खबर के बाद गुरुवार को टाटा केमिकल्स के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली और ये 4 प्रतिशत चढ़कर 770 रुपये के स्तर पर पहुंच गए।

आरबीआई के नए नियमों ने बढ़ाई टाटा संस पर लिस्टिंग की मजबूरी

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को सिस्टमिक रूप से महत्वपूर्ण NBFC यानी ऊपरी स्तर की वित्तीय कंपनियों की पहचान के लिए नए मानदंड तय किए। इन नियमों के अनुसार, जिन NBFC कंपनियों की कुल एसेट 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, उनके लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। आरबीआई ने उद्योग जगत से आए उस सुझाव को खारिज कर दिया, जिसमें इस सीमा को बढ़ाकर ढाई लाख करोड़ रुपये करने की मांग की गई थी।

साथ ही, पहले की जटिल मल्टी कैटेगरी सिस्टम को सरल बनाकर अब केवल संपत्ति के आकार के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन सी कंपनी इस दायरे में आती है। रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस श्रेणी में आने वाली संस्थाओं की पहचान हर साल विशेष तौर पर की जाएगी।

टाटा केमिकल्स को होगा सबसे बड़ा फायदा

टाटा संस की लिस्टिंग से सबसे अधिक फायदा टाटा केमिकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी समूह की अन्य कंपनियों को हो सकता है। टाटा केमिकल्स के पास टाटा संस में 3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, जिसका अनुमानित मूल्य करीब 20 हजार करोड़ रुपये बैठता है। दिलचस्प बात यह है कि यह राशि टाटा केमिकल्स के वर्तमान बाजार पूंजीकरण के बराबर है। अगर टाटा संस लिस्ट होती है, तो यह टाटा केमिकल्स के शेयरधारकों के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है

टाटा संस की संपत्ति 1.75 लाख करोड़ से अधिक

टाटा संस की अनुमानित स्टैंडअलोन संपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो आरबीआई द्वारा तय सीमा को आसानी से पार कर जाती है। देश की सबसे बड़ी कंपनी समूह की इस होल्डिंग कंपनी को सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था, लेकिन टाटा संस ने आरबीआई से अपना NBFC लाइसेंस समाप्त करने का आवेदन किया है।

अगर यह आवेदन मंजूर हो जाता है, तो लिस्टिंग की बाध्यता खत्म हो जाएगी। हालांकि, फिलहाल यह आवेदन लंबित है। पिछले साल जनवरी में आरबीआई ने ऊपरी स्तर की NBFC कंपनियों की जो सूची जारी की थी, उसमें यह कहा गया था कि टाटा संस का डी-रजिस्ट्रेशन अनुरोध विचाराधीन है।

निवेशकों की निगाहें आरबीआई के फैसले पर टिकी

अब सभी निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरबीआई टाटा संस के NBFC लाइसेंस समाप्त करने के आवेदन पर क्या निर्णय लेता है। अगर यह आवेदन खारिज होता है या लंबित रहता है, तो टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना लगभग अनिवार्य हो जाएगा। ऐसे में टाटा केमिकल्स और अन्य ग्रुप कंपनियों के शेयरों में और तेजी आ सकती है। फिलहाल बाजार इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN