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डीजल के दाम बढ़े तो सड़कों पर उतरा सीरिया, अलेप्पो से हसाका तक विरोध-प्रदर्शन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सीरिया में डीजल की कीमत बढ़ाए जाने के बाद देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अलेप्पो, दारा, दीर एज़ोर और हसाका समेत कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए, सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाए। 

सीरिया में डीजल की कीमत अचानक हुई बढ़ोतरी से बवाल मच गया है। देश के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध उस समय हुआ है जब सीरिया पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के मुश्किल दौर से गुजर रहा है। दरअसल, सरकार ने डीजल की कीमत करीब 40 प्रतिशत बढ़ाकर 175 सीरियाई पाउंड प्रति लीटर कर दी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यही फैसला लोगों के गुस्से की वजह बना। अलेप्पो, दारा, दीर एजोर और हसाका समेत कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।

बता दें कि लंबे युद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से आम परिवार और छोटे कारोबार और दबाव में आ गए हैं। वही दबाव अब सड़क पर दिख रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदर्शन बहुत ही संवेदनशील समय में हो रहे हैं। दरअसल, सीरिया अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने, सरकारी व्यवस्था दोबारा खड़ी करने और विदेशी निवेश लाने की कोशिश कर रहा है।

नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा

बताया जा रहा है कि कई जगहों पर एक साथ विरोध होने से यह मामला सिर्फ महंगाई का मुद्दा नहीं रह गया। अब यह नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। इसी दौरान सुरक्षा और राजनीतिक तनाव भी जारी हैं। कुर्द इलाकों में भी घटनाएं हुई हैं। कोबानी में विरोध प्रदर्शन हुए और एक स्थानीय जेल में नौ लोगों की मौत की खबर आई। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन की समस्या अकेले सीरिया की नहीं है। क्षेत्र में ऊर्जा संकट भी चल रहा है। इससे दमिश्क के लिए स्थिति और कठिन हो गई है।

इन सब के बीच अच्छी खबर ये है कि कुछ ऊर्जा कंपनियां सीरिया में काम के मौके तलाश रही हैं। दूसरी ओर इराक सीरिया के रास्ते तेल भी भेज रहा है। 14 सितंबर को एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल दमिश्क पहुंचा। सरकारी समाचार एजेंसी सना के अनुसार इसमें करीब 50 कंपनियां और 80 से ज्यादा लोग शामिल थे। अमेरिकी अधिकारी जेक मैक्गी ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों को सीरिया में मौके देखने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। शेवरॉन, एचकेएन, वीजा और मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों ने सीरिया में काम शुरू करने या समझौते करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

यह दौरा सीरिया में अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स का पहला मिशन बताया गया। 2025 में अमेरिका ने सीरिया पर लगे कई प्रतिबंध हटा दिए थे। इसके बाद यह दौरा हुआ। सीरियाई अधिकारी उम्मीद लगाए हुए हैं कि अमेरिका से सुधरते संबंध निवेश और लंबे समय के व्यापारिक रिश्ते ला सकते हैं।

2024 में खत्म हुआ था बशर अल-असद का शासन

बता दें कि दिसंबर 2024 में बशर अल-असद का शासन खत्म हुआ था। तब से दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं। हयात तहरीर अल-शाम के हमले के बाद असद देश छोड़कर चले गए थे। अब उसी संगठन के नेता अहमद अल-शारा अंतरिम राष्ट्रपति हैं। वे पुराने विद्रोही समूह को नई सरकारी व्यवस्था में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। अक्टूबर 2025 में संसदीय चुनाव हुए। 210 सीटों में से दो-तिहाई सीटें इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए चुनी गईं। बाकी एक-तिहाई सीटों पर राष्ट्रपति ने नियुक्ति की। कुछ इलाकों में वोटिंग टाल दी गई थी, क्योंकि वहां दमिश्क का पूरा नियंत्रण नहीं था।

अब देश को एकजुट करना अब सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार अलग-अलग सशस्त्र समूहों और संस्थाओं को एक राष्ट्रीय व्यवस्था में लाने की कोशिश कर रही है। मार्च 2025 में सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज के साथ समझौता हुआ था। इसके तहत उनके सैन्य और नागरिक ढांचे को राज्य में शामिल किया जाना है। इससे पूर्वी सीरिया के बड़े हिस्से पर दमिश्क का नियंत्रण बढ़ सकता है। इस बीच ईंधन विरोध ने सरकार का टेंशन बढ़ा दिया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN