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बार एंड बेंच और लाइवलॉ के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को त्विषा शर्मा की मौत के मामले में निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने त्विषा के पिता की ओर से ट्रायल को दिल्ली ट्रांसफ़र करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी करते हुए यह आदेश दिया.
कोर्ट ने कहा, “मामले के मेरिट पर ट्रायल की कार्यवाही पर रोक रहेगी.”
हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि त्विषा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह की ज़मानत अर्ज़ियों पर दो हफ़्ते के भीतर फ़ैसला किया जाए.”
नोएडा की रहने वाली त्विषा शर्मा की मुलाक़ात भोपाल के वकील समर्थ सिंह से एक डेटिंग ऐप के ज़रिए हुई थी. दोनों ने शादी कर ली. शादी के महज़ पांच महीने बाद 12 मई को त्विषा भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गईं.
उनके परिवार ने आरोप लगाया कि पति और ससुराल वालों ने दहेज की मांग को लेकर उन्हें लगातार घरेलू हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. इसके बाद कटारा हिल्स थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई.
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त्विषा की सास गिरिबाला सिंह को, जो मध्य प्रदेश में ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं, एक सत्र अदालत ने जल्द ही अग्रिम ज़मानत दे दी थी.
इसके बाद राज्य सरकार और त्विषा के परिवार ने इस आदेश को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने अग्रिम ज़मानत का आदेश रद्द कर दिया.
हाई कोर्ट ने बाद में त्विषा के परिवार की मांग पर उनकी मौत की सही वजह पता करने के लिए एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश भी दिया.
इसके बाद सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को गिरफ़्तार कर लिया.
सीबीआई की हिरासत की अवधि 2 जून को ख़त्म होने के बाद भोपाल की एक अदालत ने दोनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. उनकी ज़मानत अर्ज़ियां फिलहाल लंबित हैं.
सीबीआई की चार्जशीट
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इसी साल अगस्त में त्विषा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई ने उनके पति समर्थ सिंह और सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की थी.
सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में कहा, “दोनों अभियुक्तों (त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह) की ओर से लगातार मानसिक क्रूरता के कारण त्विषा के पास अपनी ज़िंदगी खत्म करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.”
सीबीआई ने दोनों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 (पति या रिश्तेदार की ओर से क्रूरता), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) दो या अधिक लोगों द्वारा साझा तौर पर कोई जुर्म करने की मंशा के तहत आरोप लगाए.
हालांकि सीबीआई ने शुरुआत में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु के लिए सज़ा के तहत एफआईआर दर्ज की थी.
त्विषा के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने बीबीसी से कहा था, “सीबीआई ने आगे की जांच की अनुमति भी मांगी है. उसके मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए सबूतों के आधार पर कुछ और लोगों की भूमिका की जांच की जा सकती है और ज़रूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है.”
अंकुर पांडे ने यह भी कहा था कि पहली और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा होंगी. उन्होंने कहा, “क्योंकि, आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी धारा सीबीआई ने लगाई हैं, इसका मतलब है कि जांच में मौत को कथित आत्महत्या माना गया है.”
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की ‘जीवन आस्था’ हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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