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दिल्ली ना ढाका; बांग्लादेश में फिर गूंजे भारत विरोधी नारे, तारिक रहमान सरकार के खिलाफ आंदोलन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इस रैली का नेतृत्व एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने किया। रैली में कट्टरपंथी एनसीपी सांसद हसनात अब्दुल्ला भी शामिल थे, जो पूर्व में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग-अलग करने की धमकियां देकर विवादों में रह चुके हैं।

बांग्लादेश में बढ़ती महंगाई, बिजली संकट और ईंधन की कमी को लेकर प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन फिर से तेज हो गए हैं। ढाका में नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) द्वारा आयोजित एक विशाल रैली के दौरान न केवल गृह और ऊर्जा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की गई, बल्कि एक बार फिर भारत विरोधी नारेबाजी भी देखने को मिली। ढाका स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित इस महारैली में भारी भीड़ उमड़ी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एनसीपी नेता “दिल्ली ना ढाका” का नारा लगाते दिखे, जिसके जवाब में रैली में मौजूद हजारों लोगों ने “ढाका, ढाका” के नारे लगाए।

इस रैली का नेतृत्व एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने किया। रैली में कट्टरपंथी एनसीपी सांसद हसनात अब्दुल्ला भी शामिल थे, जो पूर्व में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग-अलग करने की धमकियां देकर विवादों में रह चुके हैं।

बिना सबूत के लगाए भारत पर आरोप

2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे नाहिद इस्लाम ने रैली को संबोधित करते हुए भारत के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार बांग्लादेश को भारत की साजिशों से बचाने में सक्षम नहीं है।” उन्होंने बिना किसी तथ्य या सबूत के सीमा पर हत्याओं, असम और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के उत्पीड़न और दिल्ली में मस्जिदों को ढहाने की योजना के झूठे दावे किए।

गंगा जल समझौते को लेकर अल्टीमेटम

नाहिद इस्लाम ने गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि इसका निष्पक्ष नवीनीकरण नहीं हुआ तो बांग्लादेश के लोग सड़कों पर उतरेंगे और एक इंच भी समझौता नहीं करेंगे।

दिसंबर में समाप्त हो रही है संधि

आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई 30 वर्षीय गंगा जल संधि इस साल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जनवरी से मई के बीच पानी के बंटवारे से जुड़ी यह संधि बांग्लादेश के लिए बेहद अहम है, क्योंकि देश की एक-तिहाई आबादी आजीविका के लिए गंगा नदी पर निर्भर है। इसे बांग्लादेश में पद्मा के नाम से जाना जाता है।

अगस्त 2024 में शेख हसीना के हटने और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं काफी भड़काई गई थीं। फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी (BNP) सरकार आने के बाद ऐसे भड़काऊ बयानों में कुछ कमी आई थी। लेकिन अब घरेलू स्तर पर बिजली संकट और महंगाई से घिरी सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में नेताओं ने जनता का ध्यान भटकाने के लिए एक बार फिर भारत विरोधी बयानों और नारों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN