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दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर पांच मंज़िला पीजी इमारत गिरने के बाद रात भर मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी रही.
एम्स के मुताबिक़ ट्रॉमा सेंटर में 10 लोगों को लाया गया जिनमें से पांच की पहले ही मौत हो चुकी थी. गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की बाद में मौत हो गई.
तीन लोगों का इलाज चल रहा था और एक घायल को मामूली चोटों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
रात भर कैसे चला बचाव अभियान?
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जो इमारत गिरी उसमें ज़्यादातर संख्या में स्टूडेंट रहते थे.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस और डीडीएमए की टीमें फायर टेंडरों और कैट्स एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया. संयुक्त पुलिस आयुक्त, डीसीपी दक्षिण-पश्चिम और अतिरिक्त डीसीपी अभियान की निगरानी कर रहे थे.
पीटीआई के मुताबिक़, एनडीआरएफ की दो टीमें बचाव अभियान में लगी थीं. मलबे के नीचे फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर भी भेजे गए थे.
मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ़ के खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है.
मलबे में फंसे लोगों से फोन पर संपर्क
बचाव अभियान के दौरान मलबे में फंसे कुछ लोगों के फोन आने की जानकारी भी सामने आई.
पीटीआई के मुताबिक़, मौके पर मौजूद बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि मलबे में फंसे लोगों के फोन आ रहे थे और बचाव दल उनसे संपर्क में थे.
एक पुलिस अधिकारी ने भी बताया कि मलबे में फंसे लोगों की ओर से फोन आ रहे थे और बचाव दल उनसे लगातार संपर्क में था.
क्या हुआ था?
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दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट इलाक़े में रविवार दोपहर एक पांच मंज़िला पीजी इमारत गिर गई थी. इसमें कई लोगों के अब भी दबे होने की आशंका है.
दिल्ली के एडिशनल डीसीपी अभिमन्यू पोसवाल ने पत्रकारों को बताया कि “इमारत के मालिक के बारे में जानकारी निकाली जा रही है. हमारे पास सारी सूचनाएं हैं और जल्द ही उसे अरेस्ट किया जाएगा. लापरवाही का मामला दर्ज किया जाएगा.”
उन्होंने ये भी कहा था कि रविवार शाम तक 9 बच्चों को मलबे से निकाला जा चुका था.
पोसवाल ने कहा कि “बचाए गए एक बच्चे ने बताया कि अंदर 15-16 बच्चे थे, हालांकि अभी पक्की जानकारी नहीं है. राहत और बचाव अभियान अभी जारी है.”
उधर, एनडीआरएफ़ के आईजी एनएस बुंदेला ने कहा था, “पांच मज़िला इमारत की ऊपरी मंज़िल से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. जो लोग ज़िंदा हैं, उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना बहुत ज़रूरी है. इसलिए इस अभियान में कुछ समय लगेगा.”
दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कहा, “स्थानीय पूछताछ से पता चला कि यह 40-50 साल पुरानी इमारत थी, जिसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं. इसका इस्तेमाल पीजी हॉस्टल के तौर पर किया जा रहा था. घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था.”
हादसा मोती बाग़-2 स्थित शिव मंदिर के पास हुआ. चश्मदीदों ने बीबीसी संवाददाता शुभ राणा को बताया कि इस इलाक़े में अधिकतर स्टूडेंट रहते हैं और कई इमारतों में पीजी चलता है.
दिल्ली सरकार की ओर से सेंट्रलाइज़्ड एक्सिडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज़ (कैट्स) के नोडल अधिकारी बलराज सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि बताया जा रहा है कि 20 से 30 कैज़ुअल्टी की आशंका है. मौके पर 17 एंबुलेंस तैनात की गई हैं.”
घटना के कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया, “कुछ स्टूडेंट अंदर से फ़ोन भी कर रहे हैं और लगता है कि अभी भी कुछ और लोग अंदर फंसे हुए हैं.”
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संवेदना ज़ाहिर करते हुए राहत और बचाव कार्य में हर संभव मदद देने की बात कही है.
जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद चंद्रशेखर आज़ाद, सांसद पप्पू यादव, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.
चश्मदीदों ने क्या बताया
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, दिल्ली अग्निशमन विभाग को दोपहर करीब 1.30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया.
जिस समय इमारत ढही, इलाक़े में एक ज़ोर का धमाका सुनाई दिया.
पड़ोस की ही एक दुकान में बैठे एक चश्मदीद स्टूडेंट ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि धमाके की आवाज़ सुनते ही सारे लोग बाहर भागे.
उसने कहा, “अचानक भूकंप जैसी आवाज़ सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे. यहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर गई थी.”
“अभी भी मलबे के अंदर से आवाजें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं, ‘हमें बचाओ, हमें बचाओ!’… कम से कम 25-30 बच्चे हैं. यहां पास में लड़कों और लड़कियों के लिए पीजी था.”
उस स्टूडेंट ने बताया कि इस इमारत के बेसमेंट में रेनोवेशन का काम चल रहा था.
“इन इमारतों को 100 साल की लीज़ पर दिया गया है. अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए वे लोग नीचे बेसमेंट बना रहे थे. उन्होंने ऊपर की बिल्डिंग मज़बूत कर दी, लेकिन नीचे के पिलर कमज़ोर थे. जिसकी वजह से वह बिल्डिंग गिरी है.”
उस स्टूडेंट ने बताया, “बेसमेंट में कई मज़दूर काम कर रहे थे वो सभी दब गए हैं. साथ ही बिल्डिंग के सामने फल वगैरह बेचने वाले रेहड़ी पटरी वाले भी थे वो भी दब गए हैं.”
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एक अन्य चश्मदीद स्टूडेंट ने एएनआई को बताया, “ये ‘हॉस्टल डेज़’ नाम की बिल्डिंग है. इसके ठीक बगल में एक और पीजी की इमारत भी गिर गई है. ‘हॉस्टल डेज़’ लड़कों के लिए बना पीजी है. यह पांच मंज़िला इमारत थी. इसके बगल वाली इमारत भी गिर गई है. इसके बगल में दो और इमारतें हिल रही थीं. इनमें भी पीजी चलता है. मलबे से इनके एंट्रेस ब्लॉक हो गए हैं.”
“जितने बच्चे अपने कमरों के अंदर थे, वे सभी मलबे में दब गए. इमारत गिरने के बाद से करीब 15-20 मिनट से दमकल और बचाव दल मौके पर काम कर रहे हैं. कई बच्चों को जैसे तैसे खींच खींच कर बाहर निकाला जा रहा है.”
‘बेसमेंट में खुदाई के चलते इमारत गिरी’
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घटना के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचीं. उन्होंने कहा कि इमारत के बेसमेंट में खुदाई चल रही थी, जिस कारण पिलर हिला और बिल्डिंग गिर गई.
सीएम रेखा गुप्ता ने मीडिया से कहा, “11 लोगों को रेस्क्यू किया गया है. हमारे लिए सबसे ज़रूरी उन बच्चों की जान बचाना है, जो संभवतः अभी भी अंदर फंसे हैं. जो भी इस हादसे का ज़िम्मेदार है, चाहे वो बिल्डिंग का मालिक हो या कोई अधिकारी, उस पर कार्रवाई होगी.”
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने एक्स पर लिखा, “दिल्ली के मोती बाग स्थित सत्य निकेतन में इमारत गिरने की ख़बर बेहद दुखद और चिंताजनक है. मलबे में स्टूडेंट समेत कई लोगों के दबे होने की आशंका बेहद विचलित करने वाली है.”
उन्होंने सरकार से इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है.
कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने आशंका ज़ाहिर की है कि इमारत के मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय के कई स्टूडेंट दबे हो सकते हैं. एनएसयूआई ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “हर स्टूडेंट और व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना चाहिए और इस घटना की निष्पक्ष जांच कर ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना चाहिए.”
पीएम मोदी समेत नेताओं ने क्या कहा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बचाव अभियान जारी है.
पीएमओ के एक्स हैंडल पर पीएम मोदी का एक बयान जारी कर कहा गया है, “दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है. अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. अधिकारी मौके पर काम कर रहे हैं और इस हादसे से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं.”
उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के गिरने की ख़बर से बहुत दुखी हूं. मैंने मुख्यमंत्री, दिल्ली के पुलिस के कमिश्नर और एनडीआरएफ़ के डायरेक्टर जनरल से बात की और हालात को जाना.”
गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, “स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ़ की टीमें आपसी तालमेल के साथ बचाव अभियान चला रही हैं. घायलों को सभी ज़रूरी चिकित्सा मदद दी जा रही है. मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं.”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “स्टूडेंट का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था- अब हालात जानलेवा हैं. कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण स्टूडेंट पीजी में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं. हर स्टूडेंट की जान क़ीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए.”
अभिजीत दीपके ने लगाया लापरवाही का आरोप
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घटना के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राहत और बचाव को लेकर एक्स पर एक वीडियो साझा किया.
उन्होंने लिखा, “स्टूडेंट्स मलबे के नीचे दबे हैं और स्थानीय लोग अपने हाथों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन का एक भी व्यक्ति नज़र नहीं आ रहा. जब ज़िंदगी बचाने के लिए हर मिनट क़ीमती है, प्रशासन कहां है? यह सब कब तक चलता रहेगा?”
अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “कल पीएम ने डीयू का दौरा किया, राजनीतिक भाषण दिया और ‘दिमाग़ी नक्सल’ शब्द का भी इस्तेमाल किया, जबकि उन्होंने हमारी शिक्षा व्यवस्था की ख़राब हालत के बारे में बहुत कम बात की. आज साउथ कैंपस में एक हॉस्टल की इमारत गिर गई है और आशंका है कि मलबे के नीचे स्टूडेंट फंसे हो सकते हैं. अभी तक कितने लोगों की जान गई है, इसकी जानकारी नहीं है.”
“आख़िर कब तक इस देश के स्टूडेंट को ख़राब व्यवस्था और लापरवाही की क़ीमत चुकानी पड़ेगी? आदिवासी इलाक़ों में देखभाल और मदद की कमी के कारण आदिवासी स्टूडेंट की जान जा रही है और देश की राजधानी में पढ़ने वाले स्टूडेंट भी सुरक्षित नहीं हैं.”
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने एक्स पर लिखा, “हादसे की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि हॉस्टल के रूप में संचालित इस इमारत की सुरक्षा जांच और अनुमति से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं.”
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “सत्य निकेतन में एक और इमारत गिर गई. यह डीयू के साउथ कैंपस के कॉलेज छात्रों के लिए पीजी आवास था. क़रीब 30-40 छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका है.”
“एमसीडी के बिल्डिंग विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के ट्रांसफ़र की दर 1.25 करोड़ रुपये है. इसलिए यह रुकने वाला नहीं है. यह साकेत में इमारत गिरने जैसी ही कहानी है. ऑडिट के नाम पर एक बार फिर कारोबारियों, जिम, होटल और अस्पतालों से करोड़ों रुपये वसूले जाएंगे. कुछ भी नहीं बदलेगा.”
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