Home National news hindi परविंदर सिंह झोटा कौन थे, जिनके मर्डर पर पंजाब में विपक्ष ने...

परविंदर सिंह झोटा कौन थे, जिनके मर्डर पर पंजाब में विपक्ष ने आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरा?

4
0

Source :- BBC INDIA

नशा-विरोधी कार्यकर्ता के तौर पर पहचाने जाने वाले परविंदर सिंह झोटा की मानसा बाज़ार में दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई.

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 6 मिनट

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पंजाब पुलिस ने मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त अश्वनी कुमार को गिरफ़्तार कर लिया है.

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने भी गिरफ़्तारी की पुष्टि की है, हालांकि पुलिस की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है.

नशे की समस्या और केमिस्ट की दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले झोटा की पंजाब के मानसा ज़िले के एक व्यस्त बाज़ार में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

इस बीच, राज्य में विपक्ष ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरा है.

बीबीसी पंजाबी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी ज़िलों के एसएसपी, एसडीएम और डीएसपी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई.

हत्या के बारे में पुलिस ने क्या कहा?

बठिंडा रेंज के डीआईजी हरजीत सिंह ने वारदात के बारे में जानकारी दी

झोटा की हत्या के बारे में मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए बठिंडा रेंज के डीआईजी हरजीत सिंह ने कहा, “शुरुआती जांच में पता चला है कि अश्वनी नामक एक दवा दुकान के मालिक ने नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाई. परविंदर सिंह मानसा में नशा-विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे.”

अभियुक्त को पकड़ने के लिए पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की थीं. बीबीसी संवाददाता चरणजीव कौशल ने बताया कि फोरेंसिक टीमें भी घटनास्थल की जांच कर रही हैं.

इस बीच, मानसा में डीसी दफ़्तर के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. प्रदर्शनकारी हत्या के सभी अभियुक्तों की गिरफ़्तारी, मामले में कड़ी कार्रवाई और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं.

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि हत्या करने वाले व्यक्ति और झोटा के बीच पहले से दुश्मनी और झगड़ा था.

घटना के वायरल वीडियो

घटना के बाद मौके पर पहुँची पुलिस

घटना के एक वीडियो में परविंदर सिंह झोटा और मेडिकल स्टोर के मालिक के बीच दुकान के अंदर नशीली दवाओं की तस्करी के आरोपों को लेकर बहस होती दिखाई देती है.

वीडियो में झोटा पुलिस को बुलाने की बात करते सुनाई देते हैं. दुकानदार के पास एक पिस्तौल भी दिखाई देती है. उन्हें पिस्तौल चलाने की चुनौती देते हुए भी सुना जा सकता है.

कुछ समय बाद गोली चलती है और झोटा घायल हो जाते हैं. इसके बाद वह मेडिकल स्टोर से निकलकर दूसरी दुकान में छिप जाते हैं.

एक अन्य वीडियो में एक शख़्स हाथ में पिस्तौल लेकर बाज़ार के पिछले हिस्से में जाता दिखाई देता है. इस वीडियो में गोली चलने की एक और आवाज़ सुनाई देती है. इसके बाद वह शख़्स पिस्तौल लेकर वापस दुकान में चला जाता है.

गोली लगने के बाद झोटा को घायल अवस्था में मानसा के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

मानसा के एसएमओ डॉ. गुरमेल सिंह के अनुसार, इस वारदात में दो अन्य लोगों को भी गोली लगी है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

परविंदर सिंह झोटा कौन थे?

परविंदर सिंह झोटा फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी भी थे

परविंदर सिंह झोटा दक्षिणी पंजाब के मानसा शहर के रहने वाले थे. वह फ़्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी भी रह चुके थे. कुछ साल पहले ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ के गठन के साथ वह सुर्खियों में आए. उन्होंने अपना संगठन बनाया और कथित ड्रग डीलरों को पुलिस के हवाले करना शुरू कर दिया.

बीबीसी पंजाबी ने जुलाई 2023 में प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि अतीत में झोटा और मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार के बीच विवाद रहा था.

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, 12 जुलाई, 2023 की शाम झोटा अपने 7-8 समर्थकों के साथ मानसा के एक मेडिकल स्टोर में घुस गए थे और स्टोर की तलाशी लेने की कोशिश की थी.

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद झोटा ने जबरन मेडिकल स्टोर पर ताला लगा दिया. फिर मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार के गले में जूतों की माला डालकर उन्हें मानसा के मुख्य बाज़ार से होते हुए पुलिस स्टेशन ले जाया गया था.

इसी घटना के बाद झोटा सुर्खियों में आए.

अश्वनी कुमार के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई थी, लेकिन उसी रात उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.

पुलिस ने इस घटना के संबंध में परविंदर सिंह उर्फ़ झोटा और पांच अन्य लोगों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धाराओं 355, 451, 323, 148 और 149 के तहत एफ़आईआर दर्ज की थी. पुलिस ने झोटा को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था.

झोटा पर दूसरों को धमकाकर पैसे वसूलने के आरोप भी लगे थे. उनके ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि कई मामलों में उन्हें बरी भी किया गया है.

हत्या के प्रयास के एक मामले में पुलिस ने झोटा को 5 जून, 2023 को गिरफ्तार किया था. उस समय मानसा शहर में विभिन्न संगठनों ने ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद पुलिस ने मामला वापस ले लिया और झोटा को रिहा कर दिया.

विपक्ष ने पंजाब की आप सरकार को घेरा

झोटा का माँ

विपक्षी दलों ने दावा किया कि झोटा की हत्या से नशे की समस्या के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. बीजेपी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाबदेही की मांग की.

पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने हत्या की सीबीआई जांच कराने की मांग की. उन्होंने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की.

ढिल्लों ने कहा कि झोटा कोई आम नागरिक नहीं थे, बल्कि लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी और उनकी अवैध बिक्री के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे.

कुछ अन्य विपक्षी दलों ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और नागरिकों की सुरक्षा करने में सरकार की कथित नाकामी को लेकर भगवंत मान के इस्तीफ़े की मांग की.

लुधियाना से सांसद और पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की “पूरी तरह नाकामी” को उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मान सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था “तबाह” हो चुकी है, हर तरफ़ अव्यवस्था है और अलग-अलग जगहों पर गोलियां चलने की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि झोटा की बेरहमी से की गई हत्या ने मान सरकार के शासन में कानून-व्यवस्था की “भयावह सच्चाई” और पंजाब में नशे के माफ़िया के “बेलगाम विस्तार” को उजागर कर दिया है.

उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया, “पंजाब में जंगल राज है.”

पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि इस घटना को पंजाब में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताने वाले लोगों से जुड़े मामलों की एक परेशान करने वाली श्रृंखला के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

सितंबर में संगरूर के गुलजार सिंह की कथित तौर पर ज़हर खाने के बाद मौत हो गई थी. इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल करने के बाद उन्हें धमकी दी गई थी.

बाजवा ने मोहनजीत सिंह को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने का मामला भी उठाया. मोहनजीत सिंह ने पिछले महीने संगरूर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल के पास एक मकान की छत से काला झंडा लहराया था.

ध्यान दें: संशोधित संस्करण में भाषा और वाक्य-विन्यास सुधारे गए हैं. प्रकाशन से पहले मुख्य अभियुक्त की पहचान, पुलिस के आधिकारिक बयान की स्थिति और 2023 के मामलों से जुड़ी जानकारी की तथ्यात्मक पुष्टि कर लें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

SOURCE : BBC NEWS