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पहले दिखा फिर ग़ायब हुआ, दोबारा दिखा: कनाडा में आँख मिचौली खेलता एक टापू

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Source :- BBC INDIA

ब्रिटिश कोलंबिया के विलस्टन जलाशय में दिखाई देने वाले छोटे द्वीप की एक तस्वीर. यह घने जंगलों से आच्छादित भूमि का एक टुकड़ा है जो साफ, नीले पानी के ऊपर तैर रहा है और ऊपर से सूर्य की रोशनी से जगमगा रहा है. इसके पीछे दूर पहाड़ी तटरेखा की रूपरेखा दिखाई दे रही है.

इमेज स्रोत, Supplied by Rocky Avery

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत की एक झील में तैरता हुआ छोटा सा टापू फिर से दिखाई दिया है. शुरुआती खोज के बाद ये टापू ग़ायब हो गया था.

पेड़ों से ढका यह टापू पहली बार अगस्त की शुरुआत में ब्रिटिश कोलंबिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील विलिस्टन रिज़र्वायर के बीच में देखा गया था.

कुछ नाविकों ने इसका वीडियो बनाया था, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

जुलाई के आख़िर में लीग गई एक सैटेलाइट तस्वीर से टापू के मौजूद होने की पुष्टि हुई थी. इसका आकार फुटबॉल मैदान के क़रीब डेढ़ गुने के बराबर है. लेकिन कुछ हफ्तों बाद यह उस जगह से ग़ायब हो गया.

ब्रिटिश कोलंबिया के अधिकारियों का कहना है कि वे अब इसे फिर से किनारे के पास खोजने में कामयाब रहे हैं. हालांकि, यह साफ़ नहीं है कि यह टापू आया कहां से.

ब्रिटिश कोलंबिया हाइड्रो (पॉवर प्लांट) के प्रवक्ता बॉब गैमर को इस टापू के बारे में पहली बार तब पता चला जब कनाडा के सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल हुए थे.

बीसी हाइड्रो सरकार के स्वामित्व वाली बिजली कंपनी है, जो जलाशय और पास के बांध का रखरखाव करती है.

नाविकों द्वारा बनाए गए वीडियो में पेड़ों से ढका ज़मीन का एक हिस्सा पानी में तैरता हुआ दिखाई दे रहा था.

बीसी हाइड्रो के प्रवक्ता बॉब गैमर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि यह आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया वीडियो है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “मैंने सोचा कि यह कहीं का भी हो सकता है. शायद यह असली नहीं है.”

लेकिन उनकी टीम ने 21 जुलाई की एक सैटेलाइट तस्वीर निकाली, जिससे पुष्टि हुई कि टापू असली था और प्रांत के दूरदराज़ उत्तरी हिस्से में तैर रहा था.

हालांकि, कुछ ही हफ्ते बाद 5 अगस्त को ली गई सैटेलाइट तस्वीर में टापू उस जगह से ग़ायब दिखाई दिया.

इसके ग़ायब होने की ख़बर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की, जिससे दुनियाभर में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी.

गैमर ने कहा, “हमें नहीं पता कि यह कहां चला गया. क्या यह डूब गया? क्या यह किसी दूसरे हिस्से में पहुंच गया?”

गैमर ने बताया कि अब वह इन सवालों का जवाब दे सकते हैं.

उनके मुताबिक़, टापू संभवतः बहते हुए किनारे की ओर चला गया और उस जगह से करीब 30 किलोमीटर दूर जा पहुंचा, जहां पहली बार देखा गया था.

उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि एक नई सैटेलाइट तस्वीर और ऊपर से उड़ान भर रहे पायलटों के दो प्रत्यक्षदर्शी बयानों से हुई.

बीसी हाइड्रो के अनुमान के मुताबिक़, टापू का क्षेत्रफल 9,800 वर्ग मीटर यानी क़रीब एक हेक्टेयर है. यह लगभग एक कनाडाई फ़ुटबॉल मैदान या डेढ़ अमेरिकी फ़ुटबॉल मैदान के बराबर है.

यह भी साफ़ नहीं है कि यह टापू कैसे बना. हालांकि, एक मजबूत संभावना है कि कई सालों में जमा हुई बहकर आई लकड़ियों से यह टापू बना हो.

इन लकड़ियों ने पौधों और पेड़ों की जड़ें जमाने के लिए आधार का काम किया होगा.

गैमर का मानना है कि इस साल गर्मियों में पानी का स्तर बढ़ने के बाद यह जलाशय के किनारे से टूटकर अलग हो गया. इस साल पानी का स्तर 2012 के बाद अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था.

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SOURCE : BBC NEWS