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पाकिस्तान क्रिकेट में उथल-पुथल: दौरे के बीच कोच और सात खिलाड़ियों को हटाए जाने पर क्यों उड़ रहा मज़ाक

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Source :- BBC INDIA

सरफ़राज़ अहमद

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मिर्ज़ा ग़ालिब का एक मशहूर मिसरा है- “होता है शबो रोज़ तमाशा मेरे आगे.”

यह मिसरा पाकिस्तान क्रिकेट पर पूरी तरह लागू होता है, बल्कि अगर मिर्ज़ा ग़ालिब आज ज़िंदा होते, तो वो पाकिस्तान क्रिकेट पर पूरा दीवान लिख देते.

दरअसल, पाकिस्तान क्रिकेट में कुछ ऐसी घटनाएं और फ़ैसले लगातार होते रहते हैं जो मज़ाक़िया लगते हैं और पूरी दुनिया में हंसी का कारण बनते हैं.

जैसे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का एक ताज़ा फैसला, जो पाकिस्तान क्रिकेट टीम के इंग्लैंड दौरे के ख़त्म होने का इंतज़ार करने के बजाय, दौरे के दौरान ही कर दिया गया.

इस फ़ैसले में न सिर्फ़ टीम से सात खिलाड़ियों को हटाकर घर वापस बुला लिया गया बल्कि उनकी जगह पाकिस्तान से सात दूसरे खिलाड़ियों को इंग्लैंड भेज दिया गया.

कोच भी हटाए गए

माइक हेसन

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इससे भी बड़ा फ़ैसला पाकिस्तान टेस्ट टीम के हेड कोच सरफ़राज़ अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को तुरंत हटाने का है. उनकी जगह पाकिस्तान के व्हाइट-बॉल हेड कोच माइक हेसन और बॉलिंग कोच एश्ले नोफ्के को तुरंत इंग्लैंड भेज दिया गया और उन्होंने अपनी नई ज़िम्मेदारियां संभाल ली हैं.

माइक हेसन न सिर्फ़ 9 सितंबर को एजबेस्टन में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ शुरू होने वाले तीसरे और आख़िरी टेस्ट में पाकिस्तान टेस्ट टीम के हेड कोच की ज़िम्मेदारी संभालेंगे, बल्कि ऐसी ख़बरें हैं कि यही हेड कोच आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में न्यूज़ीलैंड और श्रीलंका के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की अगली दो टेस्ट सिरीज़ में भी होंगे.

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने हेडिंग्ले और लॉर्ड्स टेस्ट मैचों में इंग्लैंड से मिली हार के बाद यह बड़ा क़दम उठाया है, लेकिन पाकिस्तान और पाकिस्तान के बाहर इस फ़ैसले को असलियत बताने के बजाय, इसे ऐसा फ़ैसला कहा जा रहा है जिसने क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तानी क्रिकेट और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का मज़ाक़ उड़ाया है और उसे मज़ाक़ का पात्र बना दिया है.

इस फ़ैसले की आलोचना करने वालों में पूर्व टेस्ट क्रिकेटर, पत्रकारिता की दुनिया के बड़े नाम और आम क्रिकेट फ़ैंस शामिल हैं.

सबसे बुनियादी सवाल यह पूछा जा रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इतनी जल्दी में क्यों था कि उसने टेस्ट सिरीज़ ख़त्म होने का इंतज़ार नहीं किया, जबकि अभी तो आख़िरी टेस्ट बाकी था.

उनका कहना है कि आख़िरी टेस्ट के बाद जब टीम पाकिस्तान लौटती, तो हालात का डिटेल में रिव्यू किया जाता और ज़रूरी फ़ैसले लिए जाते.

कौन क्या कह रहा है?

पाकिस्तान के पूर्व हेड कोच मिकी आर्थर

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सबसे पहले, आइए इस फ़ैसले पर आए कड़े रिएक्शन को देखते हैं ताकि पता चल सके कि क्रिकेट की दुनिया इस बारे में क्या कह रही है.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रमीज़ राजा ने बीबीसी रेडियो 5 लाइव से कहा, “मैं ख़ुद को यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा हूं कि सब ठीक है लेकिन ऐसा नहीं है. इससे पता चलता है कि पाकिस्तान क्रिकेट ने बहुत घबराकर कदम उठाया है. यह खेल के लिए अच्छा नहीं है, यह टीम में शामिल हुए खिलाड़ियों के कॉन्फिडेंस के लिए अच्छा नहीं है और यह उन खिलाड़ियों के लिए भी अच्छा नहीं है जो टीम में बने हुए हैं.”

पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ ने इस सारी अफ़रा-तफ़री और उलझन के लिए पीसीबी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, “विडंबना यह है कि जिन लोगों ने टीम बनाई थी, वही अब टीम को सज़ा दे रहे हैं. ज़िंदगी में, हम भूल जाते हैं कि सब कुछ एक सर्कल की तरह है. अगर आप आज किसी की बेइज्ज़ती करते हैं, तो कल वही चीज़ आपके साथ भी होगी.”

पाकिस्तान के पूर्व हेड कोच मिकी आर्थर ने एक्स पर रिएक्ट करते हुए इस फ़ैसले को मज़ाक़िया बताया है और कहा है कि यही वजह है कि वे इस मुश्किल में हैं क्योंकि वे खिलाड़ी, कोच और सिलेक्टर बदलते रहते हैं और कोई स्थिरता नहीं है.

शाहिद अफ़रीदी

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पूर्व कप्तान शाहिद अफ़रीदी ने एक्स पर लिखा, “इतने अनुभवी सिलेक्टर वाली सिलेक्शन कमिटी का यह अब तक का सबसे हैरान करने वाला फ़ैसला है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस फ़ैसले के पीछे क्या लॉजिक या वजह है. रिप्लेसमेंट खिलाड़ियों का सिलेक्शन भी समझ से परे है. इंग्लैंड में टेस्ट मैच के लिए टी-20 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है.”

पूर्व कप्तान शोएब मलिक भी बहुत ग़ुस्से में हैं.

उनका कहना है, “जिन खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया गया, वे अभी भी हमारे नेशनल क्रिकेटर हैं जिन्होंने पाकिस्तान की सेवा की है. ‘पहली फ़्लाइट से वापस भेजा गया’ जैसे शब्द बेइज्ज़ती करने वाले हैं. जवाबदेही उनसे शुरू होनी चाहिए जिन्होंने सिस्टम को नुक़सान पहुंचाया है, खिलाड़ियों से नहीं, खासकर उनसे जो बेंच पर बैठे रहे हैं या सिर्फ़ दो या तीन टेस्ट मैच खेले हैं. साथ ही, जवाबदेही टूर ख़त्म होने के बाद होनी चाहिए, टूर के बीच में नहीं.”

क्रिकेट इन्फ़ो के सीनियर एडिटर उस्मान समीउद्दीन कहते हैं, “यह उन खिलाड़ियों और कोचों के साथ बहुत शर्मनाक व्यवहार है जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी पाकिस्तान को रिप्रेज़ेंट करने के सम्मान के लिए लगा दी है और बदले में उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है.”

कमेंटेटर हर्षा भोगले, पत्रकार शिल्डबेरी और विज़डन के एडिटर लॉरेंस बूथ उन लोगों में से हैं जिन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के फ़ैसले पर हैरानी और निराशा जताई है.

टूर से किसे वापस भेजा जाता है?

इमाम उल हक़

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आमतौर पर जब भी किसी खिलाड़ी को टूर के बीच में घर वापस भेजा जाता है, तो इसके सिर्फ़ दो कारण होते हैं. या तो खिलाड़ी अनफ़िट होता है और खेलने में असमर्थ होता है या जिस खिलाड़ी ने अनुशासन तोड़ा है, उसे फ़्लाइट में बिठाकर घर भेज दिया जाता है.

लेकिन इंग्लैंड टूर के बीच में जिन सात खिलाड़ियों को घर वापस भेजा गया है, उनमें इमाम-उल-हक़ को छोड़कर कोई भी अनफिट नहीं है.

इमाम-उल-हक़ इस समय अपनी चोट की वजह से सबसे ज़्यादा सुर्खियों में हैं. वह लॉर्ड्स टेस्ट टीम में थे लेकिन उन्होंने टीम मैनेजमेंट को बताया कि उनकी पिंडली में मोच आ गई है और उन्होंने दोनों इनिंग्स में बैटिंग नहीं की, जिसके बाद मीडिया में उनके बारे में अटकलें लगने लगीं कि यह चोट नकली है.

इस बारे में पाकिस्तान के एक पूर्व चीफ सिलेक्टर मुहम्मद वसीम ने भी एक यूट्यूब चैनल पर बात की और इमाम-उल-हक की कथित नकली चोट की कहानी बता दी.

हालांकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इमाम-उल-हक़ की चोट के नक़ली होने की ख़बर पर कोई कमेंट नहीं किया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अब इसकी जांच करने जा रहा है.

सलमान अली आग़ा के साथ नाइंसाफ़ी

सलमान अली आग़ा

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इमाम-उल-हक़ के अलावा, जिन छह और खिलाड़ियों को देश वापस बुलाया गया है, उनमें हैरानी की बात है कि सलमान अली आग़ा भी शामिल हैं.

यह एक गंभीर मज़ाक़ जैसा लगता है कि हेडिंग्ले में पहले टेस्ट में, जब बाबर आज़म उंगली की चोट के कारण नहीं खेल पाए, तो उन्हीं सलमान अली आग़ा को कप्तानी दी गई और फिर लॉर्ड्स में अगले टेस्ट में, ख़राब बैटिंग फॉर्म के कारण उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया.

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि अब उन्हें दौरे से हटाकर घर भेज दिया गया है. यहां यह बताना बहुत ज़रूरी है कि सलमान अली आग़ा इस समय पाकिस्तान के टी-20 कैप्टन भी हैं. तो, क्या बोर्ड उनके जैसे सीनियर प्लेयर के साथ, जो किसी भी फॉर्मेट में नेशनल टीम के कैप्टन हैं, इस तरह का बर्ताव कर सकता है?

अगर सलमान अली आग़ा तीसरे टेस्ट में सिलेक्शन के लिए उपलब्ध नहीं भी हैं, तो भी उन्हें इस तरह से घर का रास्ता दिखाना पूरी तरह से ग़लत है.

इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में सलमान अली आग़ा को टी-20 कप्तानी से भी हटा दिया जाए. अगर ऐसा होता है, तो किसी को हैरानी नहीं होगी.

व्हाइट बॉल के खिलाड़ी

सैम अयूब

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इंग्लैंड भेजे जा रहे सात नए खिलाड़ियों के बारे में सबसे हैरानी की बात यह है कि उनमें से ज़्यादातर सफ़ेद बॉल के खिलाड़ी हैं जिन्होंने हाल ही में वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए वनडे टूर्नामेंट खेला है.

अगर हम इन सात खिलाड़िय. को अलग-अलग देखें, तो उनमें से एक अब्दुल्ला फ़ज़ल हैं, जिन्हें वेस्ट इंडीज़ टूर के दौरान पीठ की दिक़्क़त की वजह से घर वापस भेज दिया गया था, लेकिन अब वह ठीक हो गए हैं और उन्हें फिर से टीम में शामिल कर लिया गया है.

उनके अलावा, सिर्फ़ विकेटकीपर-बल्लेबाज़ साद बेग ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट के फ़र्स्ट-क्लास मैचों में शानदार बैटिंग और विकेटकीपिंग से अपनी बात मज़बूत की है, लेकिन पहले फ़ेज़ में उनके साथ भी ग़लत बर्ताव हुआ और ग़ाज़ी ग़ौरी को विकेटकीपर के तौर पर चुना गया.

इंग्लैंड जाने वाले खिलाड़ियों में सैम अयूब भी एक अहम नाम हैं, लेकिन उनकी पहचान व्हाइट-बॉल क्रिकेटर के तौर पर है. उन्होंने बिना किसी बड़ी कामयाबी या परफ़ॉर्मेंस के 8 टेस्ट खेले हैं, जबकि पिछले साल उन्होंने कुछ ही फ़र्स्ट-क्लास मैच खेले थे.

फ़ास्ट बॉलर मीर हमज़ा अभी काउंटी क्रिकेट खेल रहे हैं. उनके अनुभव का फ़ायदा उठाने की जगह, फ़ास्ट बॉलर रज़ाउल्लाह को चुना गया है, जो फ़र्स्ट-क्लास टूर्नामेंट प्रेसिडेंट्स ट्रॉफ़ी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बॉलर्स में 14वें नंबर पर थे.

इसी तरह इमरान रंधावा भी क़ायदे-आज़म ट्रॉफ़ी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले बॉलर्स में 14वें नंबर पर थे, लेकिन उनकी किस्मत भी जाग गई है. अराफ़ात मिन्हास बेशक इस समय सबसे टैलेंटेड व्हाइट-बॉल क्रिकेटरों में से एक हैं, लेकिन टेस्ट टीम के लिए उनका सिलेक्शन भी हैरान करने वाला है और सबसे दिलचस्प बात यह है कि हेडिंग्ले टेस्ट में पांच विकेट लेने वाले लेफ्ट-आर्म स्पिनर अली उस्मान को भेज दिया गया है, जबकि लेफ्ट-आर्म स्पिनर अराफात मिन्हास को इंग्लैंड भेजा गया है.

आकिब जावेद (बाएं) के साथ मिस्बाह उल हक़

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मिस्बाह-उल-हक़ ने दिया इस्तीफ़ा

इस ड्रामाई स्थिति में एक और ज़रूरी बात यह है कि सिलेक्शन कमिटी का हिस्सा मिस्बाह-उल-हक़ ने सोमवार रात को ईमेल के ज़रिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है.

आकिब जावेद, मिस्बाह-उल-हक़, असद शफीक़ और सरफ़राज अहमद सिलेक्शन कमिटी के मेंबर हैं, लेकिन सभी अच्छी तरह जानते हैं कि इस समय सिलेक्शन और दूसरे मामलों में लिए जा रहे सभी ज़रूरी फ़ैसले आकिब जावेद ही ले रहे हैं, जो इस समय पीसीबी की गुड बुक में हैं.

इसके अलावा, व्हाइट-बॉल हेड कोच माइक हेसन भी फ़ैसले लेने के मामले में पीछे नहीं हैं और अब टेस्ट टीम की कमान भी उन्हें सौंप दी गई है, जिससे उनकी मज़बूत स्थिति साफ़ पता चलती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS