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पायलट सीधे ‘हाइजैक’ क्यों नहीं कहता? जानिए ‘7500, 7600 और 7700’ का खुफिया राज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 ने बुधवार को पहले इमरजेंसी कोड 7700 भेजा और बाद में उसे बदलकर 7500 कर दिया। 7500 का मतलब है कि विमान में गैर-कानूनी दखल या हाईजैक जैसी स्थिति हो सकती है।

हवा में उड़ते विमान में जब कोई बड़ा खतरा पैदा होता है, तो पायलट के पास बोलने का मौका हमेशा नहीं होता। कॉकपिट में अगर कोई बाहरी व्यक्ति घुस आए, रेडियो काम करना बंद कर दे या अचानक कोई इमरजेंसी आ जाए, तो खुले में बात करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में पायलट आवाज की जगह चार अंकों का एक कोड भेजता है। यह कोड एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बिना एक शब्द सुने बता देता है कि विमान में क्या हो रहा है, और अभी क्या हालात हैं।

दरअसल, बुधवार को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 ने पहले कोड 7700 भेजा। इसके कुछ देर बाद विमान ने कोड बदलकर 7500 कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि पायलट कोड से ही संदेश क्यों भेज रहा था और इस कोड का क्या मतलब है?

7500 का मतलब

कोड 7500 बताता है कि विमान में गैर-कानूनी दखल हो रहा है, जिसमें हाईजैकिंग भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुसार, ऐसी स्थिति में पायलट को ट्रांसपोंडर को 7500 पर सेट करने की कोशिश करनी चाहिए। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) भी 7500 को हाईजैक या गैर-कानूनी दखल का कोड मानता है। कंट्रोलर इसे देखते ही हाईजैक के खास नियम लागू करते हैं।

7600 का मतलब

कोड 7600 का मतलब है कि विमान और कंट्रोल टावर के बीच रेडियो बातचीत नहीं हो पा रही। विमान सामान्य रूप से उड़ सकता है, लेकिन क्रू और कंट्रोलर एक-दूसरे से बात नहीं कर पाते।

7700 का मतलब

कोड 7700 आम इमरजेंसी के लिए है। जब पायलट इमरजेंसी घोषित करता है और विमान की पहचान साफ नहीं होती, तो कंट्रोलर इस कोड का इस्तेमाल करते हैं। ICAO के नियम भी कहते हैं कि इमरजेंसी में विमान आमतौर पर 7700 सेट करे, बशर्ते हालात और ATC के निर्देश इसकी इजाजत दें।

पायलट रेडियो पर सीधे ‘हाईजैक’ क्यों नहीं कहते?

FAA के नियमों के मुताबिक, गैर-कानूनी दखल की स्थिति में पायलट को रेडियो पर स्थिति बतानी चाहिए, अगर हालात इसकी इजाजत दें। अगर बात करना सुरक्षित या संभव न हो, तो ट्रांसपोंडर कोड दूसरा तरीका है। 7500 हर बात का विकल्प नहीं है। यह सिग्नल है कि रेडियो पर खुलकर बोलना सही नहीं है। ICAO भी कहता है कि पायलट 7500 चुनने की कोशिश करे। जरूरत पड़ने पर 7700 भी इस्तेमाल हो सकता है।

ATC 7500 देखे तो क्या करता है?

जब कोई विमान 7500 भेजता दिखे, तो कंट्रोलर हाईजैक के नियम लागू करते हैं। वे पायलट से पूछकर पुष्टि करते हैं कि कोड जानबूझकर चुना गया है। अगर पायलट हां कहे या जवाब न दे, तो आगे सवाल नहीं पूछे जाते। कंट्रोलर विमान को फॉलो करते रहते हैं, पायलट की मांग पूरी करते हैं और संबंधित अधिकारियों को सूचना देते हैं। यह पुष्टि जरूरी है, क्योंकि 7500 के बड़े नतीजे हो सकते हैं। FAA स्पष्ट करता है कि ATC यह कोड तभी दे जब पायलट खुद गैर-कानूनी दखल की बात बताए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN