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पिता करते थे मजबूरी अब बेटे प्रवीण चित्रवेल ने जीता रजत, सेल्वा प्रभु थिरुमारन को मिला कांस्य पदक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत के त्रिकूद खिलाड़ियों प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु तिरुमरन ने शनिवार को ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्रमशः रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए।

भारतीय एथलीट प्रवीण चित्रवेल और सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने शनिवार को पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीते। इसी के साथ लगातार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए ट्रिपल जंप में दो पोडियम फिनिश किये। प्रवीण चित्रवेल, जो 2022 राष्ट्रमंडल खेल में 3 सेमी. से कांस्य पदक से चूक गए थे, ने चार साल बाद रजत पदक जीतकर खुद को साबित किया। उन्होंने 16.58मी. की छलांग लगाई, जबकि जॉर्डन स्कॉट ने 16.72मी. छलांग के साथ स्वर्ण पदक जीता। दिलचस्प बात यह है कि चित्रवेल ने 2022 में 16.89मी. की छलांग लगाई थी। जिसे फाउल के कारण अमान्य करार दिया गया। सेल्वा प्रभु ने अपने पहले राष्ट्रमंडल खेल में 16.52मी. की छलांग के साथ कांस्य पदक जीता।

प्रवीण चित्रवेल के पिता करते थे मजदूरी

प्रवीण चित्रवेल तमिलनाडु के तंजावुर जिले के एक गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। उनके पिता दिहाड़ी पर खेतों में मजदूरी करते थे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। प्रवीण के एथलेटिक्स करियर की शुरुआत 2018 के पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ तमिलनाडु के चेन्नई स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कोच इंदिरा सुरेश के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया और भारत के सबसे प्रतिभाशाली ट्रिपल जंप खिलाड़ियों में अपनी पहचान बनाई।

नागरकोइल में प्रशिक्षण के दौरान प्रवीण ने 2018 यूथ ओलंपिक गेम्स में पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा का कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में यूथ ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। उनके शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स का समर्थन मिला, जिसकी मदद से उन्होंने इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस), बेल्लारी में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया

वर्ष 2023 में प्रवीण चित्रवेल एशिया के शीर्ष ट्रिपल जंप खिलाड़ियों में शामिल हो गए। उन्होंने अस्ताना में आयोजित एशियाई इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 16.98 मीटर की राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड छलांग के साथ रजत पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 17.37 मीटर की छलांग लगाकर भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और हांगझोउ एशियाई खेलों में कांस्य पदक अपने नाम किया।

वर्ष 2024 में प्रवीण ने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया और भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसी साल उन्होंने विश्व इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की अहम प्रतिस्पर्धाओं का अनुभव मिला। 2025 में प्रवीण ने शानदार वापसी करते हुए एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एफआईएसयू वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स दोनों में रजत पदक जीते। 2026 में उन्होंने अपने लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN