Source :- LIVE HINDUSTAN
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। वित्त मंत्रालय के नए फैसले के मुताबिक पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली लेवी को 1.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 0.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसका मतलब है कि पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी में सीधे 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है।
इसी तरह, डीजल के निर्यात पर कुल शुल्क 25 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी डीजल पर निर्यात का टैक्स 5 रुपये प्रति लीटर कम हुई है। डीजल के निर्यात पर 25 रुपये प्रति लीटर की कुल लेवी में 24 रुपये स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी SAED और एक रुपये रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस यानी RIC शामिल था। अब RIC को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। हालांकि, घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ATF के निर्यात पर भी फैसला
इसके अलावा, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 15 रुपये प्रति लीटर रखा जाएगा। बता दें कि सरकार हर 15 दिन पर इस टैक्स की समीक्षा करती है। सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर ये अतिरिक्त शुल्क 27 मार्च 2026 से लागू किए थे। इसका मकसद पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्यात को कम करना था।
क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
इस फैसले का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। यह फैसला पेट्रोल, डीजल या ATF का निर्यात करने वाली कंपनियों की लागत को प्रभावित करेगा।
विंडफॉल टैक्स का मतलब
विंडफॉल टैक्स की बात करें तो यह एक अतिरिक्त टैक्स है, जो सरकार तेल कंपनियों पर लगाती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अचानक बहुत बढ़ जाती है और तेल कंपनियों को सामान्य से काफी ज्यादा मुनाफा होने लगता है, तो सरकार उस अतिरिक्त मुनाफे के एक हिस्से पर टैक्स लगा सकती है। इसे ही विंडफॉल टैक्स कहा जाता है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




