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पेट्रोल पर ₹8/लीटर और डीजल पर ₹9/लीटर का नुकसान, IOC, BPCL समेत HPCL को रोजाना ₹530 करोड़ का घाटा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब देश की सरकारी तेल कंपनियों की कमाई पर दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, IOC (Indian Oil Corporation), BPCL (Bharat Petroleum Corporation) और HPCL (Hindustan Petroleum Corporation) को मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल पर करीब ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने के बीच कच्चे तेल की लागत बढ़ने से इन कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ गया है। आइए जरा विस्तार से जानते हैं कि तेल कंपनियों को रोजाना कितने रुपये का घाटा हो रहा है?

कंसोलिडेटेड डेली लॉस करीब ₹530 करोड़

ICRA का अनुमान है कि मौजूदा कीमतों पर तीनों सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) का कंसोलिडेटेड डेली लॉस करीब ₹530 करोड़ तक पहुंच सकता है, यानी अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और घरेलू ईंधन की कीमतों में बदलाव नहीं होता, तो कंपनियों के लिए यह दबाव आगे भी जारी रह सकता है। घरेलू LPG भी कंपनियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सितंबर में एक घरेलू LPG सिलेंडर पर करीब ₹300 की अंडर-रिकवरी का अनुमान लगाया गया है।

क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत बढ़ी

कच्चे तेल में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और सप्लाई से जुड़ी परेशानियां प्रमुख वजह हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष में बढ़ोतरी, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बंद होना और रेड सी एरिया में हाउथी एक्टीविटीज के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत जिस क्रूड ऑयल बास्केट का आयात करता है, उसकी कीमत 21 सितंबर 2026 को बढ़कर $117.4 प्रति बैरल हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में इसका औसत करीब $66 प्रति बैरल था।

कुल प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो पर दबाव

दिलचस्प बात यह है कि रिफाइनिंग मार्जिन अभी भी पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं। ICRA के अनुसार, वेस्ट एशिया संकट शुरू होने के बाद से सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन लगातार 10 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा है। रिफाइनरी बंद होने से सप्लाई में आई समस्या और इन्वेंट्री में कमी जैसी स्थितियों से रिफाइनिंग मार्जिन को सहारा मिला है। हालांकि, महंगा क्रूड और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की ऊंची कीमतें तेल कंपनियों की कुल प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो पर दबाव डाल सकती हैं।

LPG के मोर्चे पर भी बढ़ा दबाव

LPG के मोर्चे पर भी दबाव बढ़ा है। 30 जून 2026 तक घरेलू LPG से जुड़ी क्युमुलेटिव नेगेटिव बफर करीब ₹61,940 करोड़ पहुंच गई थी। ICRA के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घरेलू LPG पर प्रति सिलेंडर नुकसान करीब ₹500 तक रहा, जबकि सितंबर में यह करीब ₹300 आंका गया है। इसके अलावा डीजल और ATF (Aviation Turbine Fuel) पर लगाए गए एक्सपोर्ट लेविस भी कंपनियों के लिए लागत और कैश फ्लो के समीकरण को प्रभावित कर रहे हैं।

आने वाले समय में सरकारी तेल कंपनियों की फाइनेंशियल पोजिशन कई चीजों पर निर्भर करेगी। इसमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के मार्जिन, घरेलू पेट्रोल-डीजल की रिटेल प्राइस में बदलाव और LPG पर सरकार की सब्सिडी प्रमुख हैं। ICRA का कहना है कि अगर महंगा क्रूड लंबे समय तक बना रहता है और घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो OMCs को वर्किंग कैपिटल की जरूरत पूरी करने के लिए ज्यादा शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग भी करनी पड़ सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN