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फॉर्म-16 में 0 टैक्स दिख रहा? फिर भी भरना पड़ सकता है ITR, जानिए किन लोगों के लिए ज्यादा जरूरी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आप नौकरीपेशा हैं और हाल ही में आपको कंपनी की ओर से फॉर्म-16 मिला है, जिसमें टैक्स पेयबल जीरो दिखाया गया है, तो यह सोचकर निश्चिंत मत हो जाइए कि अब आपको ITR (Income Tax Return) भरने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार कई ऐसे मामले हैं, जिनमें टैक्स देनदारी जीरो होने के बावजूद ITR फाइल करना अनिवार्य होता है। ऐसे में अगर आपने केवल फॉर्म-16 देखकर रिटर्न नहीं भरा, तो भविष्य में नोटिस, जुर्माना या अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

दरअसल, कई लोगों का टैक्स सेक्शन 87A (Section 87A) के तहत मिलने वाली टैक्स छूट (Rebate) की वजह से शून्य हो जाता है। मौजूदा नियमों के अनुसार पुराने टैक्स सिस्टम में 7 लाख रुपये तक और नए टैक्स सिस्टम में 12 लाख रुपये तक की आय (सैलरी वालों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर लगभग 12.75 लाख रुपये) पर टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। लेकिन, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ITR भरने की जिम्मेदारी भी खत्म हो गई।

एक्सपर्ट के मुताबिक ITR फाइल करने की बाध्यता केवल टैक्स की रकम पर निर्भर नहीं करती। यह आपकी कुल आय, विदेशी संपत्तियों, बैंक खातों, बड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य निर्धारित शर्तों पर आधारित होती है। अगर इनमें से कोई भी शर्त लागू होती है, तो रिटर्न भरना जरूरी हो सकता है।

अगर आपकी आय बेसिक छूट सीमा से अधिक है या आपने वित्त वर्ष के दौरान कुछ बड़े वित्तीय लेन-देन किए हैं, तब भी ITR फाइल करना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने बैंक में बड़ी राशि जमा की है, विदेश यात्रा पर भारी खर्च किया है, विदेशी शेयर या संपत्ति रखी है, किसी विदेशी बैंक खाते के सिग्नेटरी हैं या अन्य रिपोर्टेबल ट्रांजैक्शन किए हैं, तो आयकर विभाग आपको रिटर्न दाखिल करने के लिए कह सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सेक्शन 87A की छूट सभी प्रकार की आय पर लागू नहीं होती। अगर आपकी आय में LTCG (Long Term Capital Gain), STCG (Short Term Capital Gain), क्रिप्टो या अन्य VDA (Virtual Digital Assets) से होने वाली कमाई शामिल है, तो इन पर अलग टैक्स नियम लागू होते हैं और इन मामलों में टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलता।

ITR फाइल करना केवल टैक्स भरने के लिए ही जरूरी नहीं होता, बल्कि इसके कई अन्य फायदे भी हैं। बैंक से लोन लेना हो, होम लोन या कार लोन के लिए आवेदन करना हो, विदेश का वीजा लेना हो या अपनी आय का आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाना हो, हर जगह ITR सबसे मजबूत वित्तीय दस्तावेज माना जाता है। इसके अलावा अगर आपके वेतन से जरूरत से ज्यादा TDS कट गया है, तो उसका रिफंड भी केवल ITR फाइल करने पर ही मिल सकता है।

अगर किसी निवेश में आपको पूंजीगत नुकसान (Capital Loss) हुआ है और आप उसे भविष्य में एडजस्ट करना चाहते हैं, तब भी समय पर ITR दाखिल करना जरूरी है। बिना रिटर्न फाइल किए ऐसे नुकसान का लाभ आगे नहीं मिल पाएगा।

एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि हर टैक्सपेयर को अपना AIS (Annual Information Statement) और फॉर्म 26AS जरूर जांचना चाहिए। इनमें आपके सभी बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी दर्ज होती है। अगर इसमें कोई ऐसा ट्रांजैक्शन दिखाई देता है, जो आपकी घोषित आय से मेल नहीं खाता, तो रिटर्न दाखिल करना और भी जरूरी हो जाता है।

अगर कोई व्यक्ति ITR फाइल करने के लिए पात्र होने के बावजूद रिटर्न दाखिल नहीं करता, तो उसे सेक्शन 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, विदेशी संपत्तियों की जानकारी छिपाने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

इसलिए, केवल यह देखकर कि फॉर्म-16 में टैक्स शून्य है, यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब कोई जिम्मेदारी नहीं बची। रिटर्न भरने से पहले यह जरूर जांच लें कि कहीं आप उन कैटेगिरी में तो नहीं आते, जहां टैक्स न होने के बावजूद ITR फाइल करना अनिवार्य है। सही समय पर रिटर्न दाखिल करना न सिर्फ कानूनी रूप से सुरक्षित रखता है, बल्कि भविष्य में होने वाली कई वित्तीय जरूरतों को भी आसान बना देता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN