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ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि फ्रांस की जनता बड़े स्तर पर बदलाव चाहती है। इस पर इजरायल भड़का गया है। इजरायल ने कहा है कि आंतकवाद को बढ़ावा देने वाले देश ज्ञान न दें।
फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुई हिंसक घटनाओं और लूटपाट पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने उपद्रवियों को चेतावनी देते हुए कहा कि तोड़फोड़ और अराजकता फैलाने वाले हर व्यक्ति को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
देश के बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई। उन्होंने घोषणा की कि सोमवार शाम से प्रभावित इलाकों में आंशिक कर्फ्यू लागू लगाया जाएगा। अगर हिंसा पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो सरकार पूरे देश में आपातकाल लागू करने से भी पीछे नहीं हटेगी। बता दें कि पूरे देश में हिंसा चरम पर है। हिंसा में करीब सौ पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। मैक्रों ने हिंसा रोकने के लिए जल्द से जल्द पुलिस की नई रणनीतियां लागू करने का निर्देश भी दिया है। इससे पहले लोगों ने पेरिस, लियोन, मार्सेई और अन्य शहरों की सड़कों पर आगजनी की।
गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा
इस बीच मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इससे पहले गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस्तीफा देने की पेशकश की थी लेकिन मैक्रों ने उनसे आपात स्थिति में पुलिस की जरूरतों को पूरा करने के लिए पद पर बने रहने को कहा था। मैक्रों ने अपने एक बयान में कहा कि मौजूदा हालात में कानून प्रवर्तन एजेंसियों का नेतृत्व लगातार जारी रहना जरूरी है।
हिंसा रोकने में नाकाम रहा प्रशासन- न्याय मंत्री
न्याय मंत्री जेराल्ड दारमानिन ने भी माना कि हिंसा के सामने प्रशासन साफ तौर पर नाकाम रहा। उन्होंने फ्रांसीसी टीवी पर कहा कि खुफिया तंत्र भी हिंसा का पहले से सही अंदाजा लगाने में विफल रहा। मैक्रों ने नुनेज को निर्देश दिया कि वह हिंसा पर चूकों के बारे में पारदर्शिता रखे।
सॉकर क्लब मार्से और लिले ने स्टोर बंद किए
फ्रांस के मशहूर शॉकर क्लब मार्से ने सोमवार को एक बयान में कहा कि लूटपाट करने वालों ने ला कैनबिएरे में स्थित उनके आधिकारिक स्टोर को काफी नुकसान पहुंचा है। इस वजह से स्टोर को फिलहाल बंद कर दिया गया है। उत्तर में स्थित लिले के सिटी सेंटर स्टोर को भारी नुकसान पहुंचा है।
आपस में लड़ पड़े ईरान-इजरायल
इन सब के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि फ्रांस की जनता बड़े स्तर पर बदलाव चाहती है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुद ही यह स्थिति पैदा की है। अराघची ने कहा कि ईरानियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का स्वागत करने वाले राष्ट्रपति को अब फ्रांस के भविष्य की आवाज सुननी पड़ेंगी। मैक्रों ने खुद यह स्थिति पैदा की थी जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि उन्हें ईरानियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर कोई आपत्ति नहीं है।
भड़क गया इजरायल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों पर दिए गए बयान के बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि जो सरकार देश में प्रदर्शनकारियों को फांसी देती है, वही अब पेरिस को प्रदर्शन की आजादी पर ज्ञान दे रही है। ईरान के विदेश मंत्री फ्रांस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं। ये सरकार देश में प्रदर्शन करने वालों को फांसी देती है।
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