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बांग्लादेश: अदालत ने जेल में बंद हिंदू अधिकार नेता चिन्मय दास को जमानत दी, पर रिहाई के आसार नहीं

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न्यायमूर्ति के.एम. जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहेर की पीठ ने रविवार को तोड़फोड़ और पुलिस के काम में बाधा डालने से जुड़े दो मामलों में उन्हें जमानत दी

बांग्लादेश हाई कोर्ट ने रविवार को जेल में बंद हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो और मामलों में जमानत दे दी, लेकिन अन्य मामलों में आरोपों का सामना कर रहे दास के जेल से बाहर आने की संभावना नहीं है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। दास को पिछले महीने भी दो मामलों में जमानत मिली थी, जिनमें तोड़फोड़, हमला और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप से जुड़े मामले शामिल थे।

दास को नवंबर 2024 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान करने का आरोप था, जिसके बाद विरोध-प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव शुरू हो गया था। इसके बाद उनके खिलाफ कई अन्य मामले दर्ज किए गए, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास और तोड़फोड़ के आरोप शामिल हैं।

न्यायमूर्ति के.एम. जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहेर की पीठ ने रविवार को तोड़फोड़ और पुलिस के काम में बाधा डालने से जुड़े दो मामलों में उन्हें जमानत दी। समाचार पोर्टल बीडीन्यूज24 ने यह जानकारी दी। समाचार पोर्टल ने उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य के हवाले से बताया कि दास के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले हैं और अब उन्हें इनमें से चार मामलों में उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

हालांकि, ‘द बिजनेस स्टैंडर्ड’ न्यूज पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, उन पर चल रहे दूसरे मामलों की वजह से उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया जाएगा। देशद्रोह के मामले में उनकी जमानत पर रोक लगी हुई है, जबकि हत्या के मामले में सुनवाई चटगांव के ‘त्वरित सुनवाई न्यायाधिकरण’ में हो रही है। हत्या का यह मामला एक ऐसी घटना से जुड़ा है, जिसमें सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या कर दी गई थी। दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चटगांव में दास की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी।

उस समय भारत ने हिंदू संत की गिरफ्तारी पर ‘गहरी चिंता’ जताई थी और ढाका से ‘हिंदुओं समेत सभी अल्पसंख्यकों’ की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। यह घटना ऐसे समय में हुई, जब अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास आ गई थी – जिसकी वजह नई दिल्ली में उनका शरण लेना था। दास, जो पहले ‘इस्कॉन’ से जुड़े थे, ‘हिंदू सम्मिलित सनातन जागरण जोत’ नामक एक समूह के प्रवक्ता हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN