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बात परमाणु हथियारों की नहीं, ट्रंप तो बहुत बड़े झूठे; ईरान ने खड़े कर दिए सवाल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर का बयान आया है। इस बयान में कहा गया है कि बात परमाणु हथियारों की नहीं है।  

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर का बयान आया है। इस बयान में कहा गया है कि बात परमाणु हथियारों की नहीं है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बहुत बड़ा झूठा बताया गया है। आईआरजीसी के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा कि दुश्मन जानता है कि ईरान परमाणु हथियारों के पीछे नहीं है। उनकी ईरान से समस्या इसके परमाणु कार्यक्रम की नहीं बल्कि इसकी विशालता की है, जिसे वे खत्म करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप ने ईरान हमले के पीछे का मकसद उसके परमाणु ठिकानों को तबाह करना बताया था। उन्होंने कहा था कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाए। मोहेबी की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब ईरान, अमेरिका से हॉर्मुज को फिर से खोलने की नई योजना पर औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

मोहेबी ने अमेरिकी उन दावों को भी चुनौती दी कि ईरान ने हॉर्मुज पर अपने हिस्से का नियंत्रण खो दिया है। आईआरजीसी के प्रवक्ता ने कहा कि हो सकता है अमेरिका, बड़े खर्च और हाई रिस्क के बावजूद, अंधेरे में किसी छोटे जहाज से हॉर्मुज से 100 या 200 बैरल तेल एक्सपोर्ट कर लेता हो। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हॉर्मुज खुला हुआ है। बता दें कि केपलर के डेटा से मिले संकेतों से पता चलता है कि हॉर्मुज के रास्ते तेल निर्यात में सुधार हुआ है। अब यह करीब 10 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंचने वाला है। हालांकि अभी भी यह युद्ध से पहले के स्तर का आधा ही है। वहीं, मोहेबी ने यह भी कहा कि अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाए रखेगा।

मोहेबी ने कहा कि पड़ोसियों को संदेश साफ है। मुझे लगता है कि क्षेत्र की सरकारों और देशों ने भी यह बात समझ ली होगी कि अमेरिका उन्हें सुरक्षा मुहैया करा पाने में नाकाम रहा है। वह खुद असुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में लाखों करोड़ों डॉलर निवेश किए हैं। वहां व्यापक सैन्य बुनियादी ढांचा और हथियार तैनात किए हैं। इसके बावजूद ये बेस न केवल सुरक्षा देने में नाकाम रहे, बल्कि अस्थिरता का स्रोत बन गए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ये बेस खुद की रक्षा भी नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि मध्यस्थ देश ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म करने तथा होर्मुज को फिर से खोलने के लिए समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अब भी गहरे मतभेद बने हुए हैं। क्षेत्रीय और अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पर्दे के पीछे जारी यह अप्रत्यक्ष बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब आठ माह से जारी इस संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है और ईरान को भी बड़ा झटका लगा है।

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक इस रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के अब तक कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन सभी विफल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान का शुरुआती प्रस्ताव खारिज किए जाने के बावजूद राजनयिक प्रयास रुके नहीं हैं। ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि यदि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा दे, उसकी जब्त संपत्तियां जारी कर दे और तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटा दे तो वह एक सप्ताह के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के हवाले से सरकारी मीडिया में आई खबर के अनुसार विदेश मंत्री अब्बास अराघची कतर के मध्यस्थों के साथ ताजा घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN