Source :- LIVE HINDUSTAN

फारो द्वीप पर एक हजार साल पुरानी परंपरा के उत्सव को मनाते हुए कम से कम  700 डॉल्फिन और व्हेल मछलियों की हत्या कर दी गई। ऐक्टिविस्ट्स ने इसपर आपत्ति जताई है लेकिन फारो की सरकार ने ही डॉल्फिन मारने की छूट दे दी है।

इंसानों की क्रूरता की ऐसी तस्वीर आपने शायद ही कभी देखी हो। मछलियों को पकड़कर जीवन यापन करना एक सामान्य बात है लेकिन व्हेल और डॉल्फिन जैसी सैकड़ों मछिलियों को जिंदा ही चाकू से चीर डालना और फिर उनको तड़फड़ाते देखकर जश्न मनाना बहुत ही दिल दहलाने वाला है। डेनमार्क के फारो द्वीप पर लोग हर साल एक बार इस तरह का क्रूर’उत्सव’ मनाते हैं। इस आयोजन को ‘द ग्रिंड’ कहा जाता है।

लाल हो गया समंदर का पानी

इस संहार को देखन के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी पहुंचते हैं। इस बार ‘द ग्रिंड’ के दौरान लगभग 700 व्हेल और डाल्फिन को नाव से खींचकर किनारे की ओर लाया गया और फिर उथले समंदर में उन्हें चाकुओं से फाड़ डाला गया। मछलियों की इस तरह की नृशंस हत्या से इतना खून निकला कि समंदर का पानी लाल हो गया।

जानकारी के मुताबिक यह आयोजन 27 मई को किया गया था। इसके बाद समंदर के किनारे सैकड़ों मछलियां पड़ी दिखीं। फारो आईलैंड के ग्लोबल मरीन कंजर्वेशन सी शेफर्ड के डायरेक्टर वैलेंटीना क्रास्ट ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय सरकारों से इस कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘द ग्रिंड’ वाले दिन कम से कम 402 व्हेल और 300 डाल्फिन को मार डाला गया।

PETA की अध्यक्ष एलिसा एलेन ने कहा कि, ये जलीय जीव दर्द से कराहते हैं और छटपटाते हैं। व्हेल और डाल्फिन जैसी मछलियां अपने परिवार के साथ रहती हैं और उनके पूरे परिवार को ही इस तरह निर्दयता से मार डाला डाता है। ये मछलियां ज्यादा संवेदनशील होती हैं और ऐसे में उन्हें दर्द का अहसास भी ज्यादा होता है। एक एनीमल राइट ऐक्टिविस्ट ने कहा कि यह नृशंस कार्यक्रम 1000 साल से चला आ रहा है। फारो एक स्वतंत्र राज्य है और यहां के लोग इसे अपनी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं।

फारो के प्रशासन का भी कहना है कि इस उत्सव के दौरान पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। उनका कहना है कि उत्तर अटलांटिक में व्हेल और डाल्फिन की संख्या काफी अच्छी है। ऐसे में पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है। जानकारी के मुताबिक तोर्शावन में 402 पायलट व्हेल और 4 बॉटलनोज डॉल्फिन मारी गई हैं। स्कालाबोटनुर में 168 व्लाइट साइडेड डॉल्फिन और व्हालविक में 132 वाइट साइडेड डॉल्फिन मारी गई हैं।

क्या है वाइकिंग युग की परंपरा?

बताया जाता है कि यह परंपरा 1000 साल पुरानी वाइकिंग युग की है। ऐक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह परंपरा आज के युग में जरूरी नहीं है। फारो द्वीप की संसद ने अपने पशु कल्याण कानून में भी बदलाव कर दिया है। डॉल्फिन को सुरक्षा देने वाला कानून भी हटा दिया गया है।

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