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‘भारत की कृपादृष्टि है, तभी हम खुशहाल’; छोटू से मुस्लिम देश ने बांग्लादेश को दिखाया आईना, ढाका को बड़ी नसीहत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर टिप्पणी करते हुए नशीद ने कहा कि दोनों देशों को आपसी मतभेद सुलझा लेने चाहिए। उन्होंने ANI से कहा कि मैं तो बहुत कुछ कह सकता हूँ, लेकिन असल बात यही है कि कृपया अपने मतभेद सुलझा लें।

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने सोमवार को बताया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने में भारत की अहम भूमिका है। मालदीव जैसे द्वीपीय देश भी सबकी खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए भारत की ओर देखते हैं। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने कहा, “देखिए, हम सबकी अपनी-अपनी भूमिकाएँ हैं, लेकिन भूमिकाएँ अलग-अलग हैं। अपनी सुरक्षा के लिए हमें भारत की जरूरत है।” मोहम्मद नशीद बांग्लादेश में ‘बे ऑफ़ बंगाल कन्वर्सेशन’ में हिस्सा लेने गए हैं। यह तीन दिन का एक कॉन्फ्रेंस है जिसे थिंक टैंक ‘सेंटर फ़ॉर गवर्नेंस स्टडीज़’ (CGS) ने आयोजित किया है।

उन्होंने “न्यू स्ट्रैटेजिक मिडिल” नाम के एक सेशन में बात की। कॉन्फ्रेंस में उन्होंने क्लाइमेट चेंज पर भी अपने विचार रखे। इवेंट के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र में भारत की भूमिका की पुरजोर वकालत की। जब मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति से हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा मौजूदगी के फायदों या असर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मैंने हमेशा पाया है कि मैं किसी भी भारतीय अधिकारी से कुछ भी कह सकता हूँ और वे सुनते हैं। हम बहुत छोटा देश हैं, फिर भी वे सुनते हैं। और मुझे लगता है कि यह आपकी अपनी सुरक्षा का मामला है। आप इस पर कितना खर्च करना चाहते हैं? मेरा मतलब है, मालदीव सेना पर कितना खर्च कर सकता है? बहुत ज़्यादा नहीं। हममें से कोई भी सेना पर कितना खर्च कर सकता है? इसलिए, मुझे लगता है कि मिलकर कोशिश करना और यह देखना कहीं बेहतर है कि दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में शांति बनी रहे।”

भारत बहुत तेजी से तरक्की कर रहा

उन्होंने कहा, “भारत बहुत तेजी से तरक्की कर रहा है और हमें उस तरक्की का हिस्सा बनना होगा। यह सब हमारे अपने लोगों की खुशहाली के लिए है।” हालांकि, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू ‘इंडिया आउट’ कैंपेन के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन अब उन्होंने कई मुद्दों पर भारत के साथ फिर से काम करना शुरू कर दिया है। जब नीति में इस बदलाव के बारे में पूछा गया, तो मोहम्मद नशीद ने कहा, “जब आप सरकार में आना चाहते हैं, तो आप कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन एक बार जब आप सरकार में आ जाते हैं, तो आपको एहसास होता है कि आप ये सब बातें नहीं कह सकते और आपको नई व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि भारत के बिना हमारा काम चल सकता है। हमें यह बात समझनी और माननी होगी।”

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति ने बांग्लादेश के बारे में भी कहा, “मुझे बांग्लादेश बहुत पसंद है और मुझे यहाँ घर जैसा महसूस होता है। यह हमेशा मेरा घर रहा है। मुझे आपका देश सचमुच बहुत पसंद है। और मुझे यह भी बताना चाहिए कि मालदीव में बहुत सारे बांग्लादेशी लोग हैं और उन्होंने हमारे देश को बनाने में मदद की है, आपके लोगों की कड़ी मेहनत से ही हम मध्यम आय वाला देश बन पाए हैं। इसलिए, मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ।”

दोनों देशों को “आपसी मतभेद सुलझा लेने” चाहिए

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर टिप्पणी करते हुए नशीद ने कहा कि दोनों देशों को “आपसी मतभेद सुलझा लेने” चाहिए। उन्होंने ANI से कहा, “मैं तो बहुत कुछ कह सकता हूँ, लेकिन असल बात यही है कि कृपया अपने मतभेद सुलझा लें।” नशीद की यह टिप्पणी बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दो साल पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का नई दिल्ली आना “अप्रत्याशित” था, और इस बात पर जोर दिया था कि उड़ान की व्यवस्था में भारतीय सेना की कोई भूमिका नहीं थी। त्रिवेदी ने ढाका में ‘बे ऑफ़ बंगाल कन्वर्सेशन’ में भी बात की, जहाँ उन्होंने हसीना की कानूनी स्थिति और उनके प्रत्यर्पण (extradition) पर चल रही चर्चाओं से जुड़े सवालों के जवाब दिए। उनकी कानूनी स्थिति और प्रत्यर्पण की माँगों पर बात करते हुए त्रिवेदी ने कहा, “हसीना जी को भारतीय वायु सेना या भारतीय सेना भारत नहीं लाई थी।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN